1.ठोस अवस्था चैप्टर वन ,
प्रथम प्रश्न,
कांच को अतिशीतित द्रव्य क्यों माना जाता है?
उत्तर: क्योंकि यह ठोस हुए भी द्रव्यों की कुछ गुण प्रदर्शित करता है द्रव्य के समान इसमें प्रवाहित होने का गुल होता है इसका यह गुण पुराने घरों में देखा जा सकता है जो तली पर कुछ मोटा होता है, यह केवल तभी संभव है जब यह अत्यंत इसे द्रव्यों के समान प्रवाहित हो..!
कांच को अतिशीतित द्रव्य क्यों माना जाता है?रसायन विज्ञान प्रथम प्रश्न।
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महाराण प्रताप का जीवन परिचय : मुख्य विंदु : जन्म ,मरण और उपलब्धियां आदि !
महाराणा प्रताप सिंह ( ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया रविवार विक्रम संवत १५९७ तदानुसार ९ मई १५४०–१९ जनवरी १५९७) उदयपुर, मेवाड में सिसोदिया राजवंश के राजा थे। उनका नाम इतिहास में वीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। उन्होंने कई सालों तक मुगल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किया। महाराणा प्रताप सिंह ने मुगलों को कईं बार युद्ध में भी हराया। उनका जन्म राजस्थान के कुम्भलगढ़ में महाराणा उदयसिंह एवं माता राणी जयवंत कँवर के घर हुआ था। १५७६ के हल्दीघाटी युद्ध में २०,००० राजपूतों को साथ लेकर राणा प्रताप ने मुगल सरदार राजा मानसिंह के ८०,००० की सेना का सामना किया। शत्रु सेना से घिर चुके महाराणा प्रताप को झाला मानसिंह ने आपने प्राण दे कर बचाया ओर महाराणा को युद्ध भूमि छोड़ने के लिए बोला। शक्ति सिंह ने आपना अश्व दे कर महाराणा को बचाया। प्रिय अश्व चेतक की भी मृत्यु हुई। यह युद्ध तो केवल एक दिन चला परन्तु इसमें १७,००० लोग मारे गए। मेवाड़ को जीतने के लिये अकबर ने सभी प्रयास किये। महाराणा की हालत दिन-प्रतिदिन चिंताजनक होती चली गई । २५,००० राजपूतों को १२ साल तक चले उतना अनुदान देकर भाहझमा शाह भी अमर हुआ।
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महाराणा प्रताप की सफलताएं *******
ई.पू. 1579 से 1585 तक पूर्व उत्तर प्रदेश, बंगाल, बिहार और गुजरात के मुग़ल अधिकृत प्रदेशों में विद्रोह होने लगे थे और महाराणा भी एक के बाद एक गढ़ जीतते जा रहे थे अतः परिणामस्वरूप अकबर उस विद्रोह को दबाने में उल्झा रहा और मेवाड़ पर से मुगलो का दबाव कम हो गया। इस बात का लाभ उठाकर महाराणा ने ई.पू. 1585 में मेवाड़ मुक्ति प्रयत्नों को और भी तेज कर लिया। महाराणा की सेना ने मुगल चौकियों पर आक्रमण शुरू कर दिए और तुरंत ही उदयपूर समेत 36 महत्वपूर्ण स्थान पर फिर से महाराणा का अधिकार स्थापित हो गया। महाराणा प्रताप ने जिस समय सिंहासन ग्रहण किया , उस समय जितने मेवाड़ की भूमि पर उनका अधिकार था , पूर्ण रूप से उतने ही भूमि भाग पर अब उनकी सत्ता फिर से स्थापित हो गई थी। बारह वर्ष के संघर्ष के बाद भी अकबर उसमें कोई परिवर्तन न कर सका। और इस तरह महाराणा प्रताप समय की लंबी अवधि के संघर्ष के बाद मेवाड़ को मुक्त करने में सफल रहे और ये समय मेवाड़ के लिए एक स्वर्ण युग साबित हुआ। मेवाड़ पर लगा हुआ अकबर ग्रहण का अंत ई.पू. 1585 में हुआ। उसके बाद महाराणा प्रताप उनके राज्य की सुख-सुविधा में जुट गए,परंतु दुर्भाग्य से उसके ग्यारह वर्ष के बाद ही 19 जनवरी 1597 में अपनी नई राजधानी चावंड में उनकी मृत्यु हो गई।
महाराणा प्रताप सिंह के डर से अकबर अपनी राजधानी लाहौर लेकर चला गया और महाराणा के स्वर्ग सीधरने के बाद अागरा ले आया।
'एक सच्चे राजपूत, शूरवीर, देशभक्त, योद्धा, मातृभूमि के रखवाले के रूप में महाराणा प्रताप दुनिया में सदैव के लिए अमर हो गए।
| शासन | १५७२ – १५९७ | |
|---|---|---|
| राज तिलक | २८ फ़रवरी १५७२ | |
| पूरा नाम | महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया | |
| पूर्वाधिकारी | उदयसिंह द्वितीय | |
| उत्तराधिकारी | महाराणा अमर सिंह[1] | |
| जीवन संगी | (11 पत्नियाँ)[2] | |
| संतान | अमर सिंह भगवान दास (17 पुत्र) | |
| राज घराना | सिसोदिया | |
| पिता | उदयसिंह द्वितीय | |
| माता | महाराणी जयवंताबाई[2] | |
| धर्म | सनातन धर्म | |
Best Hindi Funny Jokes|| अगर झूट बोलने से कव्वा काटता तो
_मैं चाहता हूं लोग मेरे post को ऐसे ढूंढे_
_जैसे बारात में गए लोग ठेका ढूंढते है_
●●●●●●●●●●◆◆◆◆◆◆◆◆◆
2.😂😂😂😂😂😂😂😂
😜_तुझसे 'अच्छी' तो मेरे -गांव की खटारा बस थी.
😝.....पगली . .😘 .
जिस पर 'लिखा' था ..
😊..लो मैं फिर आ गई
😩😒😃😃😃😃😃
3...कोई मुझे बतायेगा..
.
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भाग कर शादी करने में भागने की speed कितनी होनी चाहिए ??
😂😂😂😂😂
4..👊🏻😡
*मेरे सामने अच्छों अच्छों ने पानी भरा है..*☝🏻😍
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*क्योंकि सरकारी नल मेरे घर के बाहर गड़ा है.....*☝🏻😜
😂😜😂😜😂😜😂😜😂
4......लड़की : पंजाब एक्सप्रेस कब आएगी ?
टीटी : पांच बजे |
लड़की : लोकल ?
टीटी : नौ बजे |
लड़की : मालगाडी ?
टीटी : एक बजे, पर आपको जाना कहां है?
लड़की: कहीं नहीं,बस पटरी पर सेल्फी लेनी थी
😂😂😂😂😂😂😂
5....🤟😎
*अगर झूट बोलने से कव्वा काटता तो..*
*तो मुझे काटने के लिए कौवो को अपनी पूरी फ़ोर्स भेजनी पड़ती*☝🏻😝
🤪😜🤪😜🤪😜🤪😜🤪😜🤪
6......
उन सभी wife's को भी मदर्स डे की शुभकामनाये
जिनके husband उन्हें रोज़
"मेरी माँ, मुझे माफ़ कर"
बोलकर चुप करा देते हैं !
☝🏻😂😂😉😀😋😜
Happy mothers day 🙏🏻
तुरई तोरई शब्जी के विभिन्न रोगों में लाभ और इलाज, अम्रत है यह शब्जी 👌
तोरई तुरई शब्जी खाने के अद्भुत फायदे विभिन्न रोगों में?
दोस्तो आज हम तुरई शब्जी की बात करेंगे और इसके
बीमारियों के बारे में ।
*🐊तोरई, या तुरई (वैज्ञानिक नाम : Luffa acutangula) एक लता है जिसके फल सब्जी बनाने के काम आते हैं, इसे भारत के कुछ राज्यों में "झिंग्गी" भी कहा जाता है। यह वर्षा ऋतु में पैदा होती है।🐊*
*तोरी/तुरई के निम्नलिखित गुण :*
🐊 *पेट दर्द में* यदि पेट में दर्द हो रहा हो तो आप तुरई की सब्जी का सेवन करें। यह पेट दर्द दूर करने का आसान उपाय है। पेट दर्द की मुख्य वजह है अपच है। तुरूई अपच को खत्म कर देती है। जो लोग लंबे समय से तोरी की सब्जी खाते हैं उन्हें कब्ज और पेट दर्द नहीं होता है।
*🐊दाद, खुजली और खाज* दाद, खाज और खुजली की समस्या से यदि आप परेशान हैं तो तुरई के बीजों और पत्तों को पानी के साथ पीसकर इसका पेस्ट बनाएं और इसका लेप त्वचा पर लगाएं। यह खुजली और दाद से तुरंत राहत देती है। इसके अलावा आप तुरई के इस पेस्ट को कुष्ठ रोग पर भी लगा सकते हो।
*🐊बालों को काला करने के लिए* यदि बाल समय से पहले सफेद हो गए हों तो आप तुरई के छोटे-छोटे टुकड़ों को काटकर इसे सुखा लें और इसके सुखे हुए टुुकड़ों को नारियल तेल में मिला लें और कम से कम पांच दिनों तक इसे रखे रहें। और इस तेल को हल्का गरम करने के बाद बालों पर लगाएं । इस तेल कि नियमित मालिश करने से बाल जल्दी काले हो जाते हैं।
*🐊पथरी निकाले* पथरी को ठीक करने के लिए और इसके दर्द से बचने के लिए आप तुरई के बेल को पानी या फिर दूध के साथ घिसकर एक सप्ताह तक सेवन करें।
*🐊पीलिया की बीमारी* यदि किसी कारणवश पीलिया रोग हो जाए तो आप तोरी के फल के रस की कम से कम दो बूंदे रोगी के नाक में डालें। इस उपाय से नाक से पीले रंग का पदार्थ बाहर आ जाता है और पीलिया जल्दी ठीक हो जाता है।
*🐊डायबिटीज रोग में तुरई* मधुमेह यानि डायबिटीज में तुरई एक कारगर औषधि का काम करती है। इसमें इंसुलीन की तरह पेपटाइडस होता है। इसलिए जो लोग शुगर से परेशान हैं वे तुरई की खूब सब्जी खाएं।
*🐊लीवर की समस्य में तोरी* तुरई की सब्जी खाने से लीवर की समस्याएं ठीक होती हैं। इसके अलावा तोरी लीवर में खून को साफ करती है। लीवर के लिए यह किसी गुणकारी औषधि से कम नहीं होती है
अभिषेक ।
Techwar339@gmail.com
दोस्तो आज हम तुरई शब्जी की बात करेंगे और इसके
बीमारियों के बारे में ।
*🐊तोरई, या तुरई (वैज्ञानिक नाम : Luffa acutangula) एक लता है जिसके फल सब्जी बनाने के काम आते हैं, इसे भारत के कुछ राज्यों में "झिंग्गी" भी कहा जाता है। यह वर्षा ऋतु में पैदा होती है।🐊*
*तोरी/तुरई के निम्नलिखित गुण :*
🐊 *पेट दर्द में* यदि पेट में दर्द हो रहा हो तो आप तुरई की सब्जी का सेवन करें। यह पेट दर्द दूर करने का आसान उपाय है। पेट दर्द की मुख्य वजह है अपच है। तुरूई अपच को खत्म कर देती है। जो लोग लंबे समय से तोरी की सब्जी खाते हैं उन्हें कब्ज और पेट दर्द नहीं होता है।
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*🐊डायबिटीज रोग में तुरई* मधुमेह यानि डायबिटीज में तुरई एक कारगर औषधि का काम करती है। इसमें इंसुलीन की तरह पेपटाइडस होता है। इसलिए जो लोग शुगर से परेशान हैं वे तुरई की खूब सब्जी खाएं।
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Jai mata dee.om. happy shivaratri. क्या आपको पता है पार्ले-जी के पैकेट पर बनी ये लड़की कौन है ? क्या आपको पता है पार्ले-जी के पैके...
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ऋग्वेद :- इसमे देवताओं के सन्दर्भ में वर्णन किया गया ! २. यजुर्वेद :- इस वेद में यज्ञ के कर्मकांड की चर्चा की गई है ! ३. सामवेद :- इस वेद...













