pythagoras Theorem भारत की देंन है,२३२.Jvr.

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  • एक प्रमेय (Theorem) होती है जिसका हम नवमी-दसमी से लेकर बारह्वी कक्षा तक प्रयोग करते हैं, जिसे हम पईथागोरस थेओरम कहते हैं| पईथागोरस का जन्म हुआ ईसा से आठ शताब्दी पहले हुआ था और ईसा के पंद्रहवी शताब्दी पहले के भारत के गुरुकुलों के रिकार्ड्स बताते हैं कि वो प्रमेय हमारे यहाँ था, उसको हम बोधायन प्रमेय के रूप में पढ़ते थे|

बोधायन एक महिर्षि हुए उनके नाम से भारत में ये प्रमेय ईशा के जन्म के पंद्रहवी शताब्दी पहले पढाई जाती थी यानि आज से लगभग साढ़े तीन हज़ार साल पहले भारत में वो प्रमेय पढाई जाती थी, बोधायन प्रमेय के नाम से और वो प्रमेय है – किसी आयत के विकर्ण द्वारा व्युत्पन्न क्षेत्रफल उसकी लम्बाई एवं चौड़ाई द्वारा पृथक-पृथक व्युत्पन्न क्षेत्र फलों के योग के बराबर होता है। तो ये प्रमेय महिर्षि बोधायन की देन है जिसे हम आज भी पढ़ते हैं और पईथागोरस ने बेईमानी करके उसे अपने नाम से प्रकाशित करवा लिया है और सारी दुनिया आजतक भ्रम में है |
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शुल्ब सूत्र या शुल्बसूत्र संस्कृत के सूत्रग्रन्थ हैं जो स्रौत कर्मों से सम्बन्धित हैं। इनमें यज्ञ-वेदी की रचना से सम्बन्धित ज्यामितीय ज्ञान दिया हुआ है। संस्कृत कें शुल्ब शब्द का अर्थ नापने की रस्सी या डोरी होता है। अपने नाम के अनुसार शुल्ब सूत्रों में यज्ञ-वेदियों को नापना, उनके लिए स्थान का चुनना तथा उनके निर्माण आदि विषयों का विस्तृत वर्णन है। ये भारतीय ज्यामिति के प्राचीनतम ग्रन्थ हैं।
शुल्बसूत्र, स्रौत सूत्रों के भाग हैं ; स्रौतसूत्र, वेदों के उपांग (appendices) हैं। शुल्बसूत्र ही भारतीय गणित के सम्बन्ध में जानकारी देने वाले प्राचीनतम स्रोत हैं।
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शुल्बसूत्रों में बौधायन का शुल्बसूत्र सबसे प्राचीन माना जाता है। इन शुल्बसूत्रों का रचना समय १२०० से ८०० ईसा पूर्व माना गया है।
अपने एक सूत्र में बौधायन ने विकर्ण के वर्ग का नियम दिया है-
दीर्घचातुरास्रास्याक्ष्नाया रज्जुः पार्च्च्वमानी तिर्यङ्मानीच |
यत्पद्ययग्भूते कुरुतस्तदुभयं करोति ||
एक आयत का विकर्ण उतना ही क्षेत्र इकट्ठा बनाता है जितने कि उसकी लम्बाई और चौड़ाई अलग-अलग बनाती हैं। यहीं तो पाइथागोरस का प्रमेय है। स्पष्ट है कि इस प्रमेय की जानकारी भारतीय गणितज्ञों को पाइथागोरस के पहले से थी। दरअसल इस प्रमेय को बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय कहा जाना चाहिए।
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क्या होगा यदि 5 second के लिए पृथ्वी से ऑक्सीजन गायब हो जाए, पढ़िए और शेयर करिये,

For welfare of world ,plz share to everybody.

5 सेकंड के लिए धरती बहुत, बहुत ठंडी हो जाएगी.
जितने भी लोग समुद्र किनारे लेटे है उन्हें तुरंत सनबर्न होने लगेगा.
दिन में भी अंधेरा छा जाएगा.
हर वह इंजन रूक जाएगा जिनमें आंतरिक दहन होता है. रनवे पर टेक ऑफ कर चुका प्लेन वही क्रैश हो जाएगा.
धातुओ के टुकड़े बिना वैल्डिंग के ही आपस में जुड़ जाएगे. ऑक्सीजन न होने का यह बहुत भयानक  साइड इफेक्ट होगा.
पूरी दुनिया में सबके कानों के पर्दे फट जाएगे. क्योंकि 21% ऑक्सीज़न के अचानक लुप्त होने से हवा का दबाव घट जाएगा. सभी का बहरा होना पक्का है.
कंक्रीट से बनी हर बिल्डिंग ढेर हो जाएगी.
हर जीवित कोशिका फूलकर फूट जाएगी. पानी में 88.8% ऑक्सीज़न होती है. ऑक्सीजन ना होने पर हाइड्रोजन गैसीय अवस्था में आ जाएगी और इसका वाॅल्यूम बढ़ जाएगा. हमारी साँसे बाद में रूकेगी, हम फूलकर पहले ही फट जाएँगे.
समुंद्रो का सारा पानी भाप बनकर उड़ जाएगा. क्योंकि बिना ऑक्सीजन पानी हाइड्रोजन गैस में बदल जाएगा और यह सबसे हल्की गैस होती है तो इसका अंतरिक्ष में उड़ना लाज़िमी है.
ऑक्सीजन के अचानक गुम होने से हमारे पैरों तले की जमीन खिसककर 10-15 किलोमीटर नीचे चली जाएगी

रूह कांप गई क्या। ये न हो इस लिए अपने जीवनकाल में कुछ वृक्ष जरूर लगाएं....... और ज्यादा से ज्यादा लोगों को लगाने के लिये प्रेरित करें.....
Dhnyavaad
        
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Motivational : द्रण आत्मविश्वाश और कठिन परिश्रम से कुछ भी संभव है,

            gridy tech,
दृढ आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम से कुछ भी संभव है!

बालक युनेज-सैंडो अत्यंत दुर्बल ओर रोगी था। अपनी बुरी आदतों के कारण उसने बचपन में ही अपना स्वास्थ्य खराब कर लिया। एक दिन सैंडो अपने पिता के साथ अजायबघर देखने गया। रोम की गैलरी में उसने प्राचीनकाल के बलिष्ठ पुरुषों की मूर्तियां देखी। उसे विश्वास न हुआ की ऐसे माँसल भुजाओं वाले स्वस्थ और बलवान लोग भी इस संसार में हो सकते हैं। सैंडो इन प्रतिमाओं को देखकर प्रभावित हुआ।
उसने पिता से पूछा- 'पिताजी! यह प्रतिमाएँ काल्पनिक हैं अथवा ऐसा स्वास्थ्य कभी संभव हो सकता है?' पिता ने बड़े आत्मा विश्वास के साथ कहा- 'हाँ-हाँ, संसार में संभव क्या नहीं है, यदि तुम भी नियमित व्यायाम ओर परिश्रम करो, संयमी ओर निरालस्य बन सको तो ऐसा ही स्वास्थ्य क्यों नहीं प्राप्त कर सकते।'
बात सैंडो के मन में बैठ गई। पिछली खराब जिंदगी का चोला उसने उतार फेंका ओर नियमपूर्वक व्यायाम ओर कठोर श्रम करना प्रारंभ कर दिया। फलस्वरूप वह एक प्रख्यात बलवान बना। उसने व्यायाम की अनेक विधेय भी निकाली, जिन्हें सैंडो की कलाएं कहा जाता है।
सच है कि दृढ आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम के बल पर कुछ भी हासिल किया जा सकता है।

क्या RSS करना चाहती है भारत का इस्लामीकरण,पढ़े पूरा लेख और विचार करे।

जय हिंद।
कृप्या धैर्य रख कर पूरा लेख ध्यान से पढ़ें ।
सर्वप्रथम भारत मे संघ की स्थिति और शक्ति जान लीजिये !
1. भारत भर में शाखा : 51335 (51 हजार 335)
2. भारत का कुल क्षेत्रफल : 32,87,263 sq.km (32 लाख 87 हजार 263)
3. अनुमानित स्वयसेवक संख्या :10 करोड़
4. प्रति वर्ष अनुमानित शाखा लगने की संख्या : 1,53,69,900 (करीब एक करोड़ 54 लाख)
5. RSS की उम्र : 90 वर्ष
RSS पर विशेष विश्लेषण
भारत मे sq.km मीटर पर संघ की कितनी लाखा लगती है तो उसके लिए भारत के कुल क्षेत्रफल को संघ की शाखा संख्या से भाग कर देंगे ।
sq.km par shakha =32,87,263  / 51335= 64.03
तो उत्तर आएगा 64 ।
इसका अर्थ ये हुआ भारत में हर 64 वर्ग किलो मीटर मैं एक शाखा लगती है ।
RSS का कहना है कि देशभर में संघ की सबसे अधिक शाखाए लगने वाला राज्य केरल है जहा 4500 शाखा लगती है । इसका विश्लेषण करे तो चोकाने वाले तथ्य सामने आते है ।
केरल राज्य का कुल क्षेत्रफल है = 38863
केरल मे प्रतिवर्ग किलोमीटर संघ की कितनी शाखाएँ लगती है ??
उसके लिए भी हम केरल के कुल क्षेत्रफल को संघ की केरल मे कुल शाखा से भाग करते है ।
शाखा प्रति वर्ग किलो मीटर =38863 / 4500 = 8.64
(केरल राज्य)                      
sq. km प्रति शाखा = 8.64
जहां एक ओर RSS का पुरे भारत में शाखा का कवरेज देखेगे तो हर 64 sq.km पर एक शाखा लगती है ।
पर केरल एक ऐसा राज्य है जहां RSS का कवरेज बढ़कर हर 8.64 sq.km पर एक शाखा जरूर लगती है ,
इसका यह अर्थ भी निकलता है की केरल ही ऐसा राज्य है जहा हर मोहल्ले में शाखा लगती है । हमें यहाँ जमीनी सच्चाई का भी विश्लेषण करना चाहिए ।
एक आकड़े के अनुसार देशभर में सबसे ज्यादा 6000 लवजिहाद के केस अकेले केरल राज्य मैं हुए है ।
अर्थात एक ऐसा राज्य जहा पर सबसे ज्यादा संघ की शाखा लगती है ।
अर्थात एक ऐसा राज्य जहा के हर मोहहले मैं एक संघ की शाखा लगती है
यदि केरल मे 6000 लव जेहाद के केस हैं तो संघ की प्रति शाखा पर कितने केस बने ??
6000 केस संख्या को 4500 संघ शाखा संख्या से भाग कीजिये ।
लवजिहाद केस प्रति शाखा =6000/4500 = 1.33
इसका अर्थ यह हुआ की केरल मैं एक से ज्यादा 1.33 लड़की लवजिहाद का शिकार प्रति शाखा प्रति मोहल्ला बनती है ।
दुर्भाग्य से यह हाल उस राज्य का है जहा संघ सबसे ज्यादा सक्रीय है ।
इसका अर्थ यह भी निकलता है की केरल की तरह अगर पुरे देश मैं RSS की शाखाएँ सबसे अधिक हो जाये , फिर भी देश पर RSS का प्रभाव नहीं पड़ेगा । मित्रो यह RSS के हिंदुत्व के उद्देश्य पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है ।
यह तथ्य चीख चीख कर हमे मजबूर कर देते है की क्या RSS वास्तव मैं हिंदुत्व का काम कर रही है या छलावा ? उनकी सक्रियता पर सवाल खड़े हो जाते है या RSS भारत का इस्लामीकरण करना चाहती है क्या ?
मित्रो अपने दिल पर हाथ रखकर 2 मिनट के लिए पूरी तरह निष्पक्ष होकर अपनी आत्मा से ये प्रश्न पूछिये , यदि संघ जितना 90 वर्ष पुराना अगर कोई मुस्लिम संगठन होता ,और उस संघठन मे संघ की तुलना मे मात्र आधे ही स्वयं सेवी होते तो क्या उस संघटन ने भारत को कब का मुस्लिम राष्ट्र ना बना दिया होता ???
क्या बिना सरकार और मीडिया की चिंता किए सब मंदिर नहीं तोड़े जा चुके होते ??
परंतु RSS से एक राम मंदिर तक नहीं बना , हिन्दू राष्ट्र बनाना तो दूर आजादी के 70 मे 120 करोड़ गाय काट डाली गई परंतु संघ इतने बड़े संघठन के बावजूद गौ ह्त्या तक को ना रोक पाया ।
संघ के जिताये हुए और संघ के दिये संस्कारों से लैस इनके प्रधानमंत्री मोदी साहब
80 % गौ रक्षको को फर्जी बताते है ।
मित्रो आज का RSS अपनी दिशासे भटक चूका है । हो सकता है आपको स्वीकार करने मे कई वर्ष लग जाये क्योंकि देश के लोगो को नेहरू-गांधी परिवार का सत्य समझने समझने मे ही 70 साल लग गये ।लेकिन ये जान लीजिये संघ का मुख्य उद्देश्य मात्र हिन्दूओं को भ्रमित करके भाजपा के लिए हिन्दू वोट बैंक का जुगाड़ करना है । और उसके लिए फर्जी गौ प्रेम ,राष्ट्र प्रेम , फोकट की ब्यान बाजी हिन्दू राष्ट्र , राम मंदिर,लव जिहाद ये सब कार्य इसी एक मात्र उद्देशय की पूर्ति के लिए है । और संघ कभी भी दूसरे हिदुत्ववादी संघठन को खड़ा नहीं होने देगा ।
अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !
योगेश कुमार मिश्र
ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता
एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)
-: सम्पर्क :-
-090 444 14408
Abhishek yadav.
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Jai mata durge.
Lucknow.

मंगल पांडे ने नहीं तिलका मांझी ने किया था अंग्रेज़ों के खिलाफ पहला विद्रोह।

मंगल पांडे ने नहीं तिलका मांझी ने किया था अंग्रेज़ों के खिलाफ पहला विद्रोह।


चीखती घटनाएं तो इतिहास में बड़ी सहजता से जगह पा लेती हैं, मगर ख़ामोश घटनाएं उतनी ही आसानी से नजरअंदाज़ भी कर दी जाती हैं, लेकिन कभी-कभी ख़ामोश घटनाएं ज़्यादा वज़नदार साबित होती हैं। भारत के इतिहास में कई क्रांतियां हुई हैं, लेकिन इतिहासकारों द्वारा इतिहास को या तो दबाया गया या तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।
भारत में अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ कई भारतीयों ने आवाज़ उठाई थी, कई युद्ध हुए और कई लोगों की जानें गई। सन 1857 में तत्कालीन भारतीय गवर्नर लॉर्ड डलहौजी के ‘डाक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स’ नियम के तहत सतारा, झांसी, नागपुर और अवध को कंपनी में जोड़ देने की वजह से अन्य देसी प्रांतो ने विद्रोह कर दिया। उसी समय ‘मंगल पांडे’ नाम के ब्रिटिश सैनिक ने ब्राह्मण होने की वजह से ‘एनफील्ड रायफल’ की गाय औेर सूअर की चर्बी से बने कारतूस का विरोध किया और ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ के खिलाफ बगावत कर दी।
इस तरह 1857 में कंपनी शासन के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत हुई, जिसे भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा गया। मंगल पांडे का कोर्ट मार्शल करके 8 अप्रैल 1857 को उन्हें फांसी दे दी गई और इतिहासकारों ने उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रथम शहीद घोषित कर दिया। आज भी किताबों, स्कूलों, फिल्मों और नाटकों आदि में मंगल पांडे को प्रथम शहीद बताया जाता है। जबकि अंग्रेज़ों के खिलाफ जंग की शुरुआत बाबा तिलका मांझी के नेतृत्व में मंगल पांडे के जन्म से 90 वर्ष पूर्व सन 1770 में ही शुरू हो चुकी थी।
1750 में तिलकपुर गावं में जन्मे बाबा तिलका मांझी को, भारतीय इतिहासकारों की जातिवादी मानसिकता के कारण इतिहास में कहीं जगह नहीं मिली। तिलका मांझी ने गाय की चर्बी या किसी धार्मिक भावना को ठेस लगने के कारण अंग्रेज़ों के खिलाफ जंग की शुरुआत नहीं की थी। उन्होंने अन्याय और गुलामी के खिलाफ जंग छेड़ी थी। तिलका मांझी राष्ट्रीय भावना जगाने के लिए भागलपुर में स्थानीय लोगों को सभाओं में संबोधित करते थे। जाति और धर्म से ऊपर उठकर लोगों को राष्ट्र के लिए एकत्रित होने का आह्वान करते थे।
तिलका मांझी ने राजमहल की पहाड़ियों में अंग्रेज़ों के खिलाफ कई लड़ाईयां लड़ी। सन 1770 में पड़े अकाल के दौरान तिलका मांझी के नेतृत्व में संतालों ने सरकारी खजाने को लूट कर गरीबो में बांट दिया जिससे गरीब तबके के लोग तिलका मांझी से प्रभावित हुए और उनके साथ जुड़ गए। इसके बाद तिलका मांझी ने अंग्रेज़ों और सामंतो पर हमले तेज़ कर दिए। हर जगह तिलका मांझी की जीत हुई। सन 1784 में तिलका मांझी ने भागलपुर पर हमला किया और 13 जनवरी 1784 में ताड़ के पेड़ पर चढ़कर घोड़े पर सवार अंग्रेज़ कलेक्टर ‘अगस्टस क्लीवलैंड’ को अपने विष-बुझे तीर का निशाना बनाया और मार गिराया।
अंग्रेज कलेक्टर की मौत से ब्रिटिश सेना में आतंक मच गया। तिलका मांझी और उनके साथियों के लिए यह एक बड़ी कामयाबी थी। जब तिलका मांझी और उनके साथी इस जीत का जश्न मना रहे थे तब रात के अंधेरे में अंग्रेज सेनापति आयरकूट ने हमला बोला लेकिन किसी तरह तिलका मांझी बच निकले और उन्होंने राजमहल की पहाड़ियों में शरण लेकर अंग्रेज़ों के खिलाफ छापेमारी जारी रखी। तब अंग्रेज़ों ने पहाड़ों की घेराबंदी करके तिलका मांझी तक पहुंचने वाली तमाम सहायता रोक दी। मजबूरन तिलका मांझी को अन्न और पानी के अभाव के कारण पहाड़ों से निकल कर लड़ना पड़ा और एक दिन वो पकड़े गए। कहा जाता है कि तिलका मांझी को चार घोड़ों से घसीट कर भागलपुर ले जाया गया और बरगद के पेड़ से लटकाकर उन्हें फांसी दे दी गई थी।
जब तिलका मांझी को फांसी दी गई तब भारत के कथित प्रथम शहीद मंगल पांडे का जन्म भी नहीं हुआ था! भारत के आज़ादी के बाद जब भारतीय सिनेमा की शुरुवात हुई तो स्वतंत्रता संग्राम से सम्बंधित कई फिल्में बनी और लोगों ने बड़ी सराहना की। लेकिन बड़े दुःख की बात है कि भारत के प्रथम शहीद तिलका मांझी पर बॉलीवुड ने आज तक  कोई फिल्म नहीं बनाई जिससे भारत के लोग जान पाते कि आदिवासी  क्षेत्रों में भी वीर साहसी और योद्धा पाये जाते हैं।
भारत के आदिवासी वीर सपूतों एवं वीरांगनाओं की एक लम्बी लिस्ट है किस-किस की बात करूं, लेकिन बड़े अफ़सोस के साथ कहना चाहूंगा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के आदिवासी नायक एवं  वीरांगनाओं को शहीदों के रूप में याद ना करना अत्यन्त ही शर्मनाक बात है। जिस प्रकार से आदिवासी नायकों और वीरांगनाओं को मौत दी गई शायद ही कोई उस दर्द का एहसास कर सकता हो। लेकिन उस दर्द में भी आज़ादी की ख़ुशी छुपी हुई थी।
तिलका मांझी के इस बलिदान को इतिहासकारों ने भले ही नजरअंदाज़ कर दिया हो, लेकिन राजमहल के आदिवासी आज भी उनकी याद में लोकगीत गुनगुनाते है, उनके साहस की कथाएं सुनाते है। तिलका मांझी उनके दिलो में ज़िन्दा हैं। तिलका मांझी का नाम भले ही इतिहास में दर्ज़ नहीं, लेकिन बिहार के भागलपुर जिले में पिछली दो सदी से उनका नाम याद किया जाता रहा है। आज झारखण्ड और बिहार राज्यों में उनके नाम पर हाट, मुहल्लों और चौक का नामकरण किया गया है। बिहार के भागलपुर में तिलका मांझी के नाम पर 12 जुलाई 1960 में तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय नामकरण किया गया था।
स्वतंत्रता दिवस के दिन इन आदिवासी वीर सपूतों और वीरांगनाओं को भी याद किया जाए, इनके अदम्य साहस और वीरता को श्रद्धांजलि दी जाए और उन्हें राष्ट्रिय स्तर पर सम्मान दिया जाए।

फ्रिज रेफ्रीजिरेटर का जाने इतिहास। History of freez.

JAI MATA DEE DOSTO.
whtsapp .7068094926.
Youtube.==gridy tech.
दोस्तो आपके घर में फ़्रिज होगा ।लेकिन क्या 
आप फ़्रिज का इतिहास जानते है? ? कि कैसे ये युरोप के देशो से भारत में आया और क्यों आया ? ? ? ? दरअसल कुछ वर्ष पहले KELVINATOR नाम की फ़्रिज बनाने वाली कंपनी भारत में आई ।
क्यों आई ? ?क्या उसके मन में दया आ गई कि भारत के लोगो को ठंडा पानी पिलाना है ?नहीं कारण कुछ औ । वो कारण ये था कि KELVINATOR की marketing खत्म हो गयी पुरे युरोप और अमेरिका में |
क्यों खत्म हो गई ? ? ?
क्यों कि अमेरिका और युरोप के देशो में एक समस्या शुरु हो गई (कलोरो फ़लोरो कार्बन के एमिशन की ) (C.F.C) |
ये समस्या रेफ़ारिजरेटर के कारण हुई । क्योंके कि इससे C.F.C बहुत निकलता है । C.F.C से होता क्या है कि हमारे वातावरण एक़ अजोन परत होती है जो हमको सूर्य से निकलने वाली अॅल्ट्रा वालेट रेन से बचाती है ।ये अगर आपकी चमड़ी पर सीधी पर जाये तो आपकी चमड़ी जल जायेगी ।
तो हुआ ये कि कि रेफ़्रिजरेटर की जितनी तकनीकी दुनिया में विकसित हुई । उस से c.f.c की समस्या बढ़ गई और इतनी बढ़ गई कि युरोप के कुछ देश के आसमान में अजोन खत्म होने से एक बहुत भारी होल हो गया । जिससे वहां गर्मी बढ़ने लगी और गलेशियर पिघलने लगे । नदियओ में पानी ज्यादा होने लगा और वहां बाढ़ आ गई ।
1996 में अमेरिका के लासएंजलेस में बाढ़ आई । इतना बढ़ा अमेरिका का मैनेमेंट सिस्टम था लेकिन कुछ नहीं कर पाया । बाद पता लगा कि बाढ़ क्यों आई कि अमेरिका में गर्मी बढ़ गई और गलेशियर पिघले और नदियों पानी ज्यादा हुआ और बाढ़ आई ।
कारण पाता कि C.F.C एमिइशन बढ़ने से वातावरण में गर्मी बढ़ी । तो इन सारे देशो में एक भयंकर किस्म की घबराह्ट होने लगी । तो इन 12 ,13 देशो में नय एक समझोता किया कि धीरे धीरे इस c.f.c एमिइशन को technology ख्त्म कर देगें 2000 तक आते आते पुरा खत्म कर देगें । तो किसी ने सवाल किया कि c.f.c बनाने वाली टैकनोलोजी का क्या होगा । तो किसी ने कहा कि भारत में लाकर डंप कर देगें ।
फ़िर इसको लेकर वो भारत में घुस आये । अब डंप करने वाली वस्तु बिकेगी कैसे ? ? ?
तो इसके लिये उनहोने हैवी विज्ञापन किये कि आपका घर कुछ भी नहीं है अगर आपके घर में फ़्रिज नहीं है । आपका घर रद्दी है अगर आपके घर मे फ़्रिज नहीं है ।
अब रोज-रोज टी वी पर आप यही बात सुनेगे तो एक दिन उठा कर घर ले ही आयेगें । हिंदुस्तान के कुछ मूर्ख लोगो ने एक मिनट नहीं सोचा कि इस फ़्रिज की हमको क्या जरुर है ? जिस भारत में सुबह से शाम तक ताजी सब्जी मिलती हो ताजा पकाओ ,ताजा खाओ जैसे परंपरा हो , पानी ठंडा करने लिए मिट्टी के घड़े से बढ़िया ? क्या होगा ? करोड़ो वर्षो से ये देश मिट्टी के घड़े में पानी पीता आया है , लेकिन ये सब भूल कर हम फ्रिज ले आये है तो किया किया पहले रोज अच्छी भली ताजी सब्ज़ी खाते थे । अब सब्ज़िया ला ला कर उसको फ़्रिज में भर देते है ।
युरोप के देश सुखे है और वहां कुछ परंपरा भी ऐसी है कि रोज खाना नहीं बनाते । और सब्ज़िया भी रोज वहां मिलती नहीं है जो जाती है वो भारत से जाती है तो हफ़ते में एक दिन सब्ज़िया ख़रीद लाते उनको फ़्रिज में भर देते है वो पुरा हफ़ता खाते है ।
लेकिन हमारे भारत में तो हर दिन ताजी सब्ज़ी मिलती हैं और सुबह को अलग मिलती है दोपहर, शाम को अलग मिलती है । और भारत में हमारी मां हमे रोज गर्म गर्म रोटी बना कर देती है युरोप में किसी की मां नहीं देती ।
तो उनको जरुरत थी तो उनहोने अपने लिये फ़्रिज बनाया और और हम बिना वजह उठा इसे घर ले आये । अब एक और मूर्खता करते है पलास्टिक की बोतल मे फ़्रिज में ठंडा पानी रख देगें ।
आप जानते है पुरी दुनिया में पलास्टिक सबसे घटिया वस्तु है कुछ खाने और पीने के लिये! जपान और कई अन्य देशो खाने पीने की चीज़े पलस्टिक पैकिंग़ मे बेचने पर बैन लगा दिया है । । युरोप के देशो के लोगो को एक आदत है कोई भी चीज़ पीयें तो आधे से ज्यादा उनमे बर्फ़ डालेगें और एक दम ठंडी करके पीयेंगे ।
नतीजा ये है अमेरिका मे हर दुसरा आदमी कबजियत का शिकर हैं । पिछले एक सर्वे के अनुसार 90% अमेरिका के लोगो को कबजियत की परेशानी है घंटो घंटो टायलेट मे बैठे रहते हैं लेकिन टायलेट नहीं आती । वहां डाकटरो का कहना है कि उनके देश में कबजियत का सबसे बढ़ा कारण लोगो का ठंडा पानी पीना हैं अगर इससे बचन है तो ताजा पानी पियो ।
हमारे भारत में हजारो साल से शास्त्र यही सिखाते है कि ताजा पानी पियो ।
तो मित्रो विदेशियों द्वारा बहुत बार अपना माल बिकवाने के लिए पहले उस चीज को आपकी जरूरत बनाया जाता है !
और फिर आपके देश मे डंप किया जाता है !

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