रामायण के महारोचक तथ्य।

jai mata dee . om kalikaay namah.🏹🏹🏹🏹🏹🏹कभी सोचा है की प्रभु 🏹🏹श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?
नहीं तो जानिये-
1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,
2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,
3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,
4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,
5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |
6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,
7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,
8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,
9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,
10- अनरण्य से पृथु हुए,
11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,
12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,
13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,
14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,
15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,
16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,
17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,
18- भरत के पुत्र असित हुए,
19- असित के पुत्र सगर हुए,
20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,
21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,
22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,
23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |
24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |
25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,
26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,
27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,
28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,
29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,
30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,
31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,
32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,
33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,
34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,
35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,
36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,
37- अज के पुत्र दशरथ हुए,
38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |
इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ | शेयर करे ताकि हर हिंदू इस जानकारी को जाने..

🏹रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य🏹

1:~मानस में राम शब्द = 1443 बार आया है।
2:~मानस में सीता शब्द = 147 बार आया है।
3:~मानस में जानकी शब्द = 69 बार आया है।
4:~मानस में बैदेही शब्द = 51 बार आया है।
5:~मानस में बड़भागी शब्द = 58 बार आया है।
6:~मानस में कोटि शब्द = 125 बार आया है।
7:~मानस में एक बार शब्द = 18 बार आया है।
8:~मानस में मन्दिर शब्द = 35 बार आया है।
9:~मानस में मरम शब्द = 40 बार आया है।

10:~लंका में राम जी = 111 दिन रहे।
11:~लंका में सीताजी = 435 दिन रहीं।
12:~मानस में श्लोक संख्या = 27 है।
13:~मानस में चोपाई संख्या = 4608 है।
14:~मानस में दोहा संख्या = 1074 है।
15:~मानस में सोरठा संख्या = 207 है।
16:~मानस में छन्द संख्या = 86 है।

17:~सुग्रीव में बल था = 10000 हाथियों का।
18:~सीता रानी बनीं = 33वर्ष की उम्र में।
19:~मानस रचना के समय तुलसीदास की उम्र = 77 वर्ष थी।
20:~पुष्पक विमान की चाल = 400 मील/घण्टा थी।
21:~रामादल व रावण दल का युद्ध = 87 दिन चला।
22:~राम रावण युद्ध = 32 दिन चला।
23:~सेतु निर्माण = 5 दिन में हुआ।

24:~नलनील के पिता = विश्वकर्मा जी हैं।
25:~त्रिजटा के पिता = विभीषण हैं।

26:~विश्वामित्र राम को ले गए =10 दिन के लिए।
27:~राम ने रावण को सबसे पहले मारा था = 6 वर्ष की उम्र में।
28:~रावण को जिन्दा किया = सुखेन बेद ने नाभि में अमृत रखकर।
यह जानकारी  महीनों के परिश्रम केबाद आपके सम्मुख प्रस्तुत है ।
आस्तिक हिंदू को भेज कर धर्म लाभ कमाये
जय श्री राम
🙏�  जय श्री राम  ..

जामा मस्जिद माता महाकाली के मंदिर को तोड़ के बनाई गई थी जानिए एक एक सबूत।

जामा मस्जिद पहले माँ भद्र काली और यमनोत्री देवी का हिन्दू मंदिर था । पढ़ें पूरी कहानी । Yogesh Mishra
मित्रो लालकिला शाहजहाँ के जन्म से सैकड़ों साल पहले “महाराज अनंगपाल तोमर द्वितीय” द्वारा दिल्ली को बसाने के क्रम में ही बनाया गया था जो कि महाभारत के अभिमन्यु के वंशज तथा महाराज पृथ्वीराज चौहान के नाना जी थे | इतिहास के अनुसार लाल किला का असली नाम “लाल कोट” है,

“लाल कोट” को जिसे महाराज अनंगपालद्वितीय द्वारा सन 1060 ईस्वी में दिल्ली शहर को बसाने के क्रम में ही बनवाया गया था जबकि शाहजहाँ का जन्म ही उसके सैकड़ों वर्ष बाद 1592 ईस्वी में हुआ है | इसके पूरे साक्ष्य “प्रथवीराज रासोसे” ग्रन्थ में मिलते हैं | किले के मुख्य द्वार पर बाहर हाथी की मूर्ति अंकित है जबकि इस्लाम मूर्ति के विरोधी होते हैं और राजपूत राजा लोग हाथियों के प्रेम के लिए विख्यात थे | इसके अलावा लाल किले के महल मे लगे सुअर (वराह) के मुह वाले चार नल अभी भी हैं यह भी इस्लाम विरोधी प्रतीक चिन्ह है |

महाराज अनंगपाल तोमर द्वितीय माँ भद्र काली के उपासक थे तथा भगवान श्री कृष्ण की पत्नी देवी यमनोत्री उनकी कुल देवी थी | इन्ही के लिये उन्होने अपने आवास “लाल कोट” (लाल किला ) के निकट ही सामने भगवा पत्थर (हिंदुओं का पवित्र रंग ) से भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था तथा प्रत्येक राजउत्सव उसी परिसर में हुआ करते थे

यहाँ की इमारतों में उपस्थित अष्टदलीय पुष्प, जंजीर, घंटियां, आदि के लक्षण वहां हिंदू धर्म चिन्हों के रूप में आज भी मौजूद हैं | हिंदुओं के मंदिर हिंदू सन्यासियों के भगवा रंग के अनुरूप भगवा पत्थरों ( लाल पत्थर ) से बनाए जाते थे जबकि मुसलमानों के इमारतें सफेद चूने से बनी होती थी और उन पर हरा रंग का प्रयोग किया जाता था | दिल्ली के जामा मस्जिद में कोई भी मुस्लिम प्रतीक चिन्ह निर्माण काल से प्रयोग नहीं हुआ था बल्कि इस मस्जिद की बनावट इसके आकार वास्तु आदि हिंदुओं के भव्य मंदिर के अनुरुप है |

शाहजहां 1627 में अपने पिता की मृत्यु होने के बाद वह गद्दी पर बैठे तो उन्होने चाहता था कि खुदा का दरबार उसके दरबार से ऊंचा हो । खुदा के घर का फर्श उसके तख्त और ताज से ऊपर हो, इसीलिए उसने महाराज अनंगपाल तोमर द्वितीय स्थापित माँ भद्र काली तथा भगवान श्री कृष्ण की पत्नी देवी यमनोत्री जो कि महाराज अनंगपाल कुल देवी थी उसे तुड़वा कर मंदिर से जुड़ी हुई भोजला नामक छोटी सी पहाड़ी जहां महाराज अनंगपाल राजकीय उत्सव के समय उत्सव देखने आने वालों के घोड़े बांधते थे उसे भी मस्जिद परिसर में मिलाने के लिये चुना और 6 अक्टूबर 1650 को मस्जिद को बनाने का काम शुरू हो गया।

मस्जिद बनाने के लिए 5000 मजदूरों ने छह साल तक काम किया । आखिरकार दस लाख के खर्च करके और हजारों टन नया पत्थर की मदद से माँ भद्र काली मंदिर के स्थान पर ये आलीशान मस्जिद बनवाई गयी । 80 मीटर लंबी और 27 मीटर चौड़ी इस मस्जिद में तीन गुंबद बनाए गए। साथ ही दोनों तरफ 41 फीट उंची मीनारे तामीर की गईं। इस मस्जिद में एक साथ 25 हजार लोग नमाज अदा कर सकते हैं। इस बेजोड़ मस्जिद का नाम भगवान श्री कृष्ण की पत्नी देवी “यमनोत्री” के नाम के कारण मुसलमान “य” की जगह “ज” शब्द का उच्चारण करते हैं अत: मस्जिद ए जहांनुमा रखा गया । जिसे फिर लोगों ने जामा मस्जिद कहना शुरू कर दिया।

मस्जिद के तैयार होते ही उज्बेकिस्तान के एक छोटे से शहर बुखारा के सैय्यद अब्दुल गफूर शाह को दिल्ली लाकर उन्हें यहाँ का इमाम घोषित किया गया और 24 जुलाई 1656 को जामा मस्जिद में पहली बार नमाज अदा की गई। इस नमाज में शाहजहां समेत सभी दरबारियों और दिल्ली के अवाम ने हिस्सा लिया। नमाज के बाद मुगल बादशाह ने इमाम अब्दुल गफूर को इमाम-ए-सल्तनत की पदवी दी और ये ऐलान भी किया कि उनका खानदान ही इस मस्जिद की इमामत करेंगे |

उस दिन के बाद से आजतक दिल्ली की जामा मस्जिद में इमामत का सिलसिला बुखारी खानदान के नाम हो गया | सैय्यद अब्दुल गफूर के बाद सय्यद अब्दुल शकूर इमाम बने। इसके बाद सैय्यद अब्दुल रहीम, सैय्यद अब्दुल गफूर, सैय्यद अब्दुल रहमान, सैय्यद अब्दुल करीम, सैय्यद मीर जीवान शाह, सैय्यद मीर अहमद अली, सैय्यद मोहम्मद शाह, सैय्यद अहमद बुखारी और सैय्यद हमीद बुखारी इमाम बने।

एक वक्त ऐसा भी था जब 1857 के बाद अंग्रेजों ने जामा मस्जिद में नमाज पर पाबंदी लगा दी और मस्जिद में अंग्रेजी फौज के घोड़े बांधे जाने लगे। आखिरकार 1864 में मस्जिद को दोबारा नमाजियों के लिए खोल दिया गया। नमाजियों के साथ-साथ दुनिया के कई जाने माने लोगों ने जामा मस्जिद की जमीन पर सजदा अदा किया है। चाहे वो सऊदी अरब के बादशाह हों या फिर मिस्त्र के नासिर। कभी ईरान के शाह पहलवी तो कभी इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्नो, सबने यहां सजदा किया।

ABHIshek singh Yadav uttam. whtsapp 7068094926.
jai mahakali maai.

लगेगा आपके बच्चे का दिमाग
Patrika 10 Mar 2017 15:39

अगर आप भी अपने बच्चे का दिमाग तेज करना चाहते हैं, तो उसे खाने में चुकंदर जरूर खिलाएं। इसमें नेचुरल नाइट्रेट्स होते हैं जिससे दिमाग में ब्लड फ्लो बूस्ट होता है। यहां पढ़ें चुकंदर की पूड़ी की रेसिपी -

सामग्री -

चुकंदर (टुकड़ों में कटा हुआ ) – 1 कप
गेहूं का आटा – ज़रुरत के अनुसार
अदरक – 1/2 इंच का टुकड़ा
लहसुन – 4-5
हरी मिर्च – 1
नमक – स्वादानुसार
लाल मिर्च पाउडर – स्वादानुसार
तेल – 1/2 टीस्पून
तेल- तलने के लिए

विधि -

- चुकंदर की पूड़ी बनाने के लिए, चुकंदर को 1/2 कप पानी और नमक के साथ प्रेशर कूकर में तेज आंच पर 1 सीटी आने तक पका लें।
- जब चुकंदर ठंडा हो जाए तब उसे पानी सहित अदरक, लहसुन और हरी मिर्च के साथ मिक्सी में पीसकर प्यूरी बना लें।
-एक बर्तन में चुकंदर की प्यूरी लें, उसमें गेहूं का आटा डालें, उतना ही आटा डालें जितना प्यूरी के साथ गूंथा जाए, आटा गूंथते समय अलग से पानी नहीं डालना चाहिए।
- फिर इसमें स्वादानुसार नमक, लाल मिर्च पाउडर, 1/2 टीस्पून तेल डालकर, कड़ा आटा गूंथ लें और ढककर 15-20 मिनट के लिए रख दें।
- गूंथे आटे को छोटे हिस्सों में बाट लें (नींबू के साइज के बराबर)। फिर नींबू की तरह गोल करें और चपटा कर लें।
- चकले पर चपटी लोई को रखकर बेलन की मदद से छोटी पूड़ी की तरह बेल लें।
- कड़ाही में तेल गरम करें, चकले से बेली गई पूड़ी उठाएं और मध्यम आंच पर तेल में डालकर उसे सब तरफ से गोल्डन ब्राउन और कुरकुरे होने तक तलें।
- चुकंदर की पूड़ी तैयार है, इसे किसी भी अचार के साथ परोसें ।

क्या आप जानते हैं 1g,2g, 3g, 4g , 5g.का मतलब ।Do u know about 2g 3g 4g 5G.


फास्ट इंटरनेट के इस दौर में, क्या आप जानते हैं क्या है 1G, 2G, 3G, 4G, 5G का मतलब...
Jagran 04 Mar 2017, 15:00
भारतीय बाजार में कई ऐसे स्मार्टफोन्स हैं जो 1G, 2G, 3G या 4G को सपोर्ट करते हैं। हर कोई 4जी फोन लेना चाहता है

नई दिल्ली। भारतीय बाजार में कई ऐसे स्मार्टफोन्स हैं, जो 1G, 2G, 3G या 4G को सपोर्ट करते हैं। हर कोई 4जी फोन लेना चाहता है, लेकिन क्या किसी को 4जी का मतलब पता है? जाहिर है कि कई लोगों को इस बारे में नहीं पता होगा। इसी के चलते आज हम आपके लिए ये जानकारी लाएं हैं। आज हम आपको 1G, 2G, 3G, 4G और 5G का मतलब बताने जा रहे हैं।
सबसे पहले हम आपको G का मतलब बताएंगे:
G का मतलब Generation है। जब भी किसी फोन में नई तकनीक लाई जाती है तो उसे नेक्सट जनेरेशन का स्मार्टफोन कहा जाता है। जैसे फोन की शक्ल अब बदल चुकी है, पहले wired फोन आते थे, फिर cordless फोन आए और अब वायरलैस फोन का चलन है।
वायरलैस फोन के लिए 1G सबसे पहली जनरेशन थी:
ये एनेलोग सिग्नल का इस्तेमाल करता था। इसे 1980 में पेश किया गया। इसकी स्पीड लिमिट 2.4 kbps पर काम करता था। सबसे पहले इसे अमेरिका में पेश किया गया था, इन फोन्स की बैटरी लाइफ काफी खराब होती थी। यही नहीं, इनकी वॉयस क्वालिटी और सिक्योरिटी भी खराब थी। आप नीचे दी गई तस्वीरों में उन फोन्स को देख सकते हैं।

1991 में आई 2G तकनीक:
यह GSM पर आधारित थी। यह डिजिटल सिग्नल इस्तेमाल करती थी। इसकी स्पीड 64 kbps थी। इसे पहले फिनलैंड में लॉन्च किया गया था। इन फोन्स से एसएमएस, कैमरा और मेलिंग जैसे सर्विसेस को शुरु किया गया। नीचे दी गई तस्वीरों में उन फोन्स को देख सकते हैं।

2000 में आई 3G तकनीक:
इसके जरिए हैवी गेम्स, बड़ी फाइल्स को ट्रांसफर करना और वीडियो कॉलिंग फीचर जैसे सर्विस दी जाने लगी। इन्हें स्मार्टफोन भी कहा जाता है। इसके बाद नए डाटा प्लान्स लॉन्च किए गए। नीचे दी गई तस्वीरों में फोन्स को देख सकते हैं।

2011 में आई 4जी तकनीक:
इसके जरिए यूजर्स 100 Mbps यानि 1 Gbps की स्पीड का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये 3G से ज्यादा महंगा है। हालांकि, लुक के मामले में दोनों फोन में कोई अंतर नहीं है। नीचे दी गई तस्वीरों में फोन्स को देख सकते हैं।

2020 में लॉन्च हो सकता है 5G:
ऐसा माना जा रहा है कि इसकी कनेक्टिविटी और स्पीड में कोई लिमिट नहीं होगी। ये भविष्य की वायरलैस तकनीक होगी। 5जी सपोर्ट फोन में ज्यादा सिक्योरिटी होगी।

Goodby stone.


जय माता दी।
इन नुसखों की सबको जरूरत है, कृपा शेयर करके पुणय कमायें।
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1. पथरी का इलाज घरेलू नुस्खे से करना हो तो पथरचट्टा का 1 पत्ता और 4 दाने मिश्री पीस कर 1 गिलास पानी के साथ खाली पेट पिए।

2. 2 ग्राम मिश्री, 1 ग्राम सूखा धनिया और 1 ग्राम सरपगंधा पीस कर पानी के साथ लेने से हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है।

3. अगर आप को शूगर बढ़ने की बीमारी है तो सुबह सुबह खाली पेट करेले का जूस पिये। जूस बनाने से पहले करेले के बीज निकाल दे। जूस निकलने के बाद इसमें थोड़ा पानी मिलाये और पिये। इस उपाय को 2 महीने तक लगातार करे आपकी शूगर कंट्रोल में रहेगी।

4. शरीर में खून की कमी पूरी करने के लिये 1 गिलास मीठे दूध में 5 ग्राम बेलगिरी चूरन मिला कर पिये। कुछ दिन लगातार इस उपाय को करने से खून की कमी दूर होने लगती है।

5. खूनी बवासीर के इलाज में खून को रोकने के लिए 10 से 12 ग्राम धुले हुए काले तिल को घर में बनाया हुआ ताज़ा मक्खन के साथ खाये। इस के निरंतर प्रयोग करने से बवासीर में खून का निकलना  बंद हो जाता है।

6. सर्दी जुकाम की समस्या में नाक बंद होने लगे तो थोड़ी सी अज्वाइन पीस कर किसी पतले कपड़े में बाँध ले और थोड़ी थोड़ी देर में इसे सूंघे, इससे नाक खुल जाएगी। जाने सर्दी जुकाम के इलाज के देसी नुस्खे कैसे करे।

7. अगर किसी को लकवे का अटैक पड़े तो तुरंत 50 से 100 ग्राम तिल का तेल गुनगुना कर के पिला दे और कच्चा लहसुन चबाने को दे।

8. मसूड़ों में दर्द, दाँत दर्द और सूजन की समस्या का उपचार करने के लिए 1 ग्लास पानी में 3 से 4 पत्ते अमरूद के उबाल ले और हल्का गुनगुना होने पर छान ले। अब इस पानी से थोड़ा नमक मिला कर कुल्ला करे, दांतों और मसूड़ों के दर्द से छुटकारा मिलेगा।

9. 1 गिलास पानी में थोड़ी सी गिलोय और 5 से 6 तुलसी के पत्ते डाल कर उबाल ले और काढ़ा बना कर पिये। इस काढ़े मे पपीते के 3 से 4 पत्तों का रस मिला कर पीने से प्लेट्लेट की मात्रा तेजी से बढ़ती है। ये आयुर्वेदिक दवा स्वाइन फ़्लू, डेंगू और चिकनगुनिया मे रामबाण उपचार का काम करती है।

10. चेहरे पर दाग धब्बे और झुर्रियां हो तो थोड़े से बेसन में थोड़ी सी मलाई और 2 चम्मच नींबू का रस डाल कर अच्छे से मिला ले। अब इस मिश्रण को आधे घंटे के लिये चेहरे पर लगा कर रखे फिर धो ले।  इस gharelu upay से चेहरे की खुश्की दूर होती है, झुर्रियां सॉफ होती है और चेहरे पर चमक आती है।

11. सर्दियों में होने वाले रोगों से बचने और स्वस्थ रहने के लिए जरुरी है की खान पान का ध्यान रखा जाये। सर्दियों के मौसम में काली मिर्च, अदरक, लहसुन, तिल, केसर और गुड जैसी चीज़े खाना चाहिये। ठण्ड में विटामिन सी के लिए संतरा, अमरुद और नींबू का सेवन करे।

12. गले में टॉन्सिल और छाले होने पर आधा लीटर पानी में 20 ग्राम मेथी दाना डाल कर धीमी आँच पर पकाए और पानी को अच्छी तरह उबलने दे। पानी ठंडा होने पर इसे छान ले फिर इस में नमक डाल कर 5 से 10 मिनट तक गरारे करे। इस उपाय को दिन में 2 – 3 बार करने पर टॉन्सिल्स से होने वाला दर्द कम होने लगेगा।

13. जब छोटे बच्चों के दाँत निकलते है तब उन्हें काफ़ी पीड़ा होती है। इसके इलावा उल्टी – दस्त और बुखार जैसी परेशानियां भी होती है। ऐसे में बच्चों को संतरे का रस देने से उनकी बैचेनी दूर होती है और पाचन शक्ति बढ़ती है। एक बार में 2 चम्मच रस ही दे और दिन में कम से कम 3 बार आप बच्चे को संतरे का रस पिलाये।
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खाना खाने के बाद तुरंत पानी पीना या ठंढा पानी पीना क्यों है खतरनाक।

Jai hind vande matram.

कृपया मैसेज को पढें और अपने दोस्तों को भेजे

ये जानना बहुत जरुरी है.!

हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद.!
क्या कारण है.?
हमने दाल खाई,
हमने सब्जी खाई,
हमने रोटी खाई,
हमने दही खाया,
लस्सी पी, दूध, दही, छाझ, लस्सी, फल आदि.!
ये सब कुछ भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया
ये सब कुछ हमको उर्जा देता है
और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है.!
पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है
जिसको हम हिंदी मे कहते है "अमाशय"
उसी स्थान का संस्कृत नाम है "जठर"
उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है
"epigastrium"
ये एक थेली की तरह होता है
और यह जठर
हमारे शरीर मे सबसे
महत्वपूर्ण है
क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है।
ये बहुत छोटा सा स्थान हैं
इसमें अधिक से अधिक 350gms खाना आ सकता है.!
हम कुछ भी खाते
सब ये अमाशय मे आ जाता है.!

आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है

उसी को कहते हे "जठराग्न".!
ये जठराग्नि है
वो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है ।
ऐसे ही पेट मे होता है
जेसे ही आपने खाना खाया
की जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी..t
यह ऑटोमेटिक है,
जेसे ही अपने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह मे डाला
की इधर जठराग्नि प्रदीप्त हो गई.!
ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना' पचता है |

अब अपने खाते ही
गटागट पानी पी लिया
और खूब ठंडा पानी पी लिया.r

और कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते है.!

अब जो आग (जठराग्नि) जल रही थी
वो बुझ गयी.!
आग अगर बुझ गयी
.तो खाने की पचने की जो क्रिया है
वो रुक गयी.!
You suffer from IBS,
Never CURABLE

अब हमेशा याद रखें
खाना जाने पर
हमारे पेट में दो ही क्रिया होती है,
एक क्रिया है
जिसको हम कहते हे
"Digestion"
और दूसरी है "fermentation" फर्मेंटेशन का मतलब है
सडना...!
और
डायजेशन का मतलब हे
पचना.!

आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी
तो खाना पचेगा,
खाना पचेगा
तो उससे रस बनेगा.!
जो रस बनेगा
तो उसी रस से
मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डिया, मल, मूत्र और अस्थि बनेगा
और सबसे अंत मे मेद बनेगा.!

ये तभी होगा
जब खाना पचेगा.!

यह सब हमें चाहिए.
ये तो हुई खाना पचने की बात.
अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा..?

खाने के सड़ने पर
सबसे पहला जहर जो बनता है
वो हे यूरिक एसिड (uric acid)

कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है
की मुझे घुटने मे दर्द हो रहा है,
मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है

तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है
आप ये दवा खाओ,
वो दवा खाओ यूरिक एसिड कम करो|
और एक दूसरा उदाहरण खाना

जब खाना सड़ता है,
तो यूरिक एसिड जेसा ही एक दूसरा विष बनता है
जिसको हम कहते हे
LDL (Low Density lipoprotive)
माने खराब कोलेस्ट्रोल (cholesterol)

जब आप
ब्लड प्रेशर(BP) चेक कराने
डॉक्टर के पास जाते हैं
तो वो आपको कहता है (HIGH BP)

हाई-बीपी है
आप पूछोगे...
कारण बताओ.?

तो वो कहेगा
कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है |

आप ज्यादा पूछोगे
की कोलेस्ट्रोल कौनसा बहुत है ?

तो वो आपको कहेगा
LDL बहुत है |

इससे भी ज्यादा
खतरनाक एक  विष हे
वो है.... VLDL
(Very Low Density Lipoprotive)

ये भी कोलेस्ट्रॉल जेसा ही विष है।
अगर VLDL बहुत बढ़ गया
तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता|

खाना सड़ने पर
और जो जहर बनते है
उसमे एक ओर विष है
जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides.!

जब भी डॉक्टर
आपको कहे
की आपका "triglycerides" बढ़ा हुआ हे
तो समज लीजिए
की आपके शरीर मे
विष निर्माण हो रहा है |

तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे,
कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे,
कोई LDL -VLDL के नाम से कहे
समझ लीजिए
की ये विष हे
और ऐसे विष 103 है |

ये सभी विष
तब बनते है
जब खाना सड़ता है |

मतलब समझ लीजिए
किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है
तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए
की खाना पच नहीं रहा है ,

कोई कहता हे
मेरा triglycerides बहुत बढ़ा हुआ है
तो एक ही मिनिट मे डायग्नोसिस कर लीजिए आप...!
की आपका खाना पच नहीं रहा है |

कोई कहता है
मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है
तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे
की खाना पच नहीं रहा है |

क्योंकि खाना पचने पर
इनमे से कोई भी जहर नहीं बनता.!

खाना पचने पर
जो बनता है
वो है....
मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डिया, मल, मूत्र, अस्थि.!

और

खाना नहीं पचने पर बनता है....
यूरिक एसिड,
कोलेस्ट्रोल,
LDL-VLDL.!


और यही
आपके शरीर को
रोगों का घर बनाते है.!

पेट मे बनने वाला यही जहर
जब ज्यादा बढ़कर खून मे आते है !
तो खून दिल की नाड़ियो मे से निकल नहीं पाता
और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा
जो खून मे आया है
इकट्ठा होता रहता है
और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है
जिसे आप
heart attack कहते हैं.!

तो हमें जिंदगी मे ध्यान इस बात पर देना है
की जो हम खा रहे हे
वो शरीर मे ठीक से पचना चाहिए
और खाना ठीक से पचना चाहिए
इसके लिए पेट मे
ठीक से आग (जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए|

क्योंकि
बिना आग के खाना पचता नहीं हे
और खाना पकता भी नहीं है

महत्व की बात
खाने को खाना नहीं
खाने को पचाना है |

आपने क्या खाया कितना खाया
वो महत्व नहीं हे.!

खाना अच्छे से पचे
इसके लिए वाग्भट्ट जी ने सूत्र दिया.!

"भोजनान्ते विषं वारी"

(मतलब
खाना खाने के तुरंत बाद
पानी पीना
जहर पीने के बराबर है)

इसलिए खाने के
तुरंत बाद पानी
कभी मत पिये..!

अब आपके मन मे सवाल आएगा
कितनी देर तक नहीं पीना.?

तो 1 घंटे 48 मिनट तक नहीं पीना !

अब आप कहेंगे
इसका
क्या calculation हैं.?

बात ऐसी है....!

जब हम खाना खाते हैं
तो जठराग्नि द्वारा
सब एक दूसरे मे
मिक्स होता है
और फिर खाना पेस्ट मे बदलता हैं.!

पेस्ट मे बदलने की क्रिया होने तक
1 घंटा 48 मिनट का समय लगता है !

उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है.!

(बुझती तो नहीं लेकिन बहुत धीमी हो जाती है)

पेस्ट बनने के बाद
शरीर मे रस बनने की
परिक्रिया शुरू होती है !

तब हमारे शरीर को
पानी की जरूरत होती हैं।

तब आप जितना इच्छा हो
उतना पानी पिये.!

जो बहुत मेहनती लोग है
(खेत मे हल चलाने वाले,
रिक्शा खीचने वाले,
पत्थर तोड़ने वाले)

उनको 1 घंटे के बाद ही
रस बनने लगता है
उनको  घंटे बाद
पानी पीना चाहिए !

अब आप कहेंगे
खाना खाने के पहले
कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं.?

तो खाना खाने के
45 मिनट पहले तक
आप पानी पी सकते हैं !

अब आप पूछेंगे
ये मिनट का calculation....?

बात ऐसी ही
जब हम पानी पीते हैं
तो वो शरीर के प्रत्येक अंग तक जाता है !

और अगर बच जाये
तो 45 मिनट बाद मूत्र पिंड तक पहुंचता है.!

तो पानी - पीने से मूत्र पिंड तक आने का समय 45 मिनट का है !

तो आप खाना खाने से
45 मिनट पहले ही
पाने पिये.!

इसका जरूर पालण करे..!

अधिक अधिक लोगो को बताएं.!
If you think that
It's educating people
Then you may spread.
It's all upto you.


Dr. Komal agrawal Nagpur

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