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क्या आपको पता है parle G पर बनी लड़की की कहानी और अब कहा है वो कैसी कैसी दिखती है ???????

Jai mata dee.om.happy shivaratri.
क्या आपको पता

है पार्ले-जी के पैकेट पर बनी ये लड़की कौन है ?

क्या आपको पता है  पार्ले-जी के पैकेट पर बनी ये लड़की कौन है ?






हेल्लो दोस्तों जैसा की आप जानते है आज-कल बाज़ार में कई तरह के बिस्कुट मिलते है जो लोगो को बहुत पसंद भी आते है पर आप सभी ने पर्ले-जी बिस्किट तो जरुर खाया होगा, और शायद आप अभी भी खाते है.








पर क्या आपने कभी एसा सोचा है की ये पैकेट पर किसकी फोटो लगी है, ये लड़की कौन है, आपको कभी भी ये ख्याल आया है की पार्ले-जी जबसे मार्किट में आई है तब से एक ही लड़की की फोटो लगी रही है. बहुत सारे लोगो ने ये बात का पता लगाया पर कोई फायदा नहीं हुआ, पर दोस्तों आज हम आपको बता देते है की ये फोटो किसकी है,

 ये फोटो नीरू देशपांडे की है जो नागपुर से है.










नीरू जी जब चार साल की थी तब उसके पापा ने इसकी तस्वीर खिची थी, और ये तस्वीर को पार्ले-जी कंपनी ने अपने ब्रांड के पैकेट के लिए चुन लिया.



अभी नीरू देशपांडे 65 वर्ष की हो गयी है और वे अभी महाराष्ट्र में रहती है.








क्या आपको पता है की किसी विज्ञापन में पहली बार ऐसा हुआ है की किसी बाल कलाकार की 60 सालो से एक ही तस्वीर लगी हुई है.


Abhiahek yadav.uttam.
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कोई देश भारत से महान नहीं , और न कोई अन्य धर्म सनातन धर्म के समान : डॉ डेविड फ़्रॉली

Jai hind vande matram.Abhishek  yadav utttam.      

कोई देश भारत से महान नहीं , और न कोई अन्य धर्म सनातन धर्म के समान : डॉ डेविड फ़्रॉली


सबसे पहले तो आपको बता दें की डॉ डेविड फ़्रॉली हैं कौन ! डॉ डेविड फ़्रॉली विश्व प्रसिद्द लेखक है तथा अमरीकी है, इन्होंने भारत के इतिहास और धर्म के बारे में शोध किया, और फिर इन्होंने सनातन धर्म को ही स्वीकार कर लिया

डॉ डेविड फ़्रॉली लेखन के छेत्र में बेहद प्रसिद्द है, और भारत सरकार से लेखन के लिए इनाम जीत चुके है डॉ डेविड फ़्रॉली सनातन धर्म और भारत की तारीफ हर जगह करते है ये कई देशों की यात्रा करते है वहां भी भारत और सनातन धर्म की तारीफ ही करते रहते है ऐसा प्रतीत होता है की किसी मूल भारतीय से अधिक हिन्दुओ तो ये स्वयं हैं

डॉ डेविड फ़्रॉली बताते है की, न ही दुनिया में कोई देश भारत से महान है, न ही कोई भी अन्य धर्म महानता में सनातन धर्म की बराबरी तक कर सकता है  भारत के बारे में बताते हुए डॉ डेविड फ़्रॉली कहते है की जब अरब के इलाके में तथा यूरोप में लोगों को भाषा क्या होती है, उसका भी ज्ञान नहीं था, जब वो लिखना भी नहीं जानते थे तब भारत में हिन्दुओ ने कई वेद लिख डाले थे, ऐसा कोई किताब या धर्मग्रन्थ ही नहीं जो की ऋग्वेद से पुराना हो

डॉ डेविड फ़्रॉली बताते है की, जब दुनिया को ये भी नहीं पता था की शिक्षा क्या होती है, उस ज़माने में भारत में गुरुकुल चला करते थे, जहाँ शिक्षा दी जाती थी जब दुनिया में बाकि जगह घर क्या होता है ये भी लोग नहीं जानते थे तब भारत में कई सभ्यताएं और छोटे छोटे राज्य बन चुके थे, उदहारण के तौर पर सिंधु घाटी की सभ्यता डॉ डेविड फ़्रॉली यही नहीं रुकते वो तो यहाँ तक कहते है की, सनातन धर्म ही एकमात्र धर्म है  बाकि अन्य तो मानवनिर्मित पंथ है, जो की सनातन धर्म के देखा देखि लोगों ने अपने नए नए पंथ बनाये धर्म तो एक ही है वो है सनातन धर्म, जो मानवनिर्मित.

तो क्या महाभारत और रामायण के युग में भी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का अस्तित्व था? जानिये विस्तार से सभी देशो के बारे में।

Vande matram.@bhishek yadav.uttam.
Lucknow.
तो क्या महाभारत और रामायण के युग में भी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का अस्तित्व था?

महाभारत और रामायण हिन्दुओं के सबसे प्रमुख काव्य ग्रंथ है. दोनों ही भारत के सबसे धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथों के रूप में पहचाने जाते हैं. विश्व के सबसे लंबे साहित्यिक ग्रंथ महाभारत और श्रीराम की ज़िन्दगी पर आधारित रामायण, आज भी दुनिया के विभिन्न समाजों के लिए प्रासंगिक बने हुए हैं और सबसे ख़ास फ़िलोसोफिकल स्रोत के तौर पर मौजूद है.

 

लेकिन महाभारत और रामायण के दौर में आखिर बाकी सभ्यताएं किस तरह मौजूद थी? क्या सभ्यताओं का निर्माण शुरु हो गया था? आधुनिक ज़माने के सबसे महत्वपूर्ण देश, आखिर उस समय में किस अवस्था में मौजूद थे? पर सामने आए इस प्रश्न पर कई लोगों ने काफ़ी दिलचस्प दावे किए हैं.

नेपाल में हुआ था सीता का जन्म

इस शख्स के मुताबिक रामायण के दौर में अमेरिका को खोजा तक नहीं गया था और महाभारत का युग जीसस क्राइस्ट के पैदा होने के 1000-1500 साल पहले आया था. महाभारत के समय पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को भारत कहा गया था. ये भारत, आधुनिक भारत से कहीं ज़्यादा बड़े क्षेत्र में शामिल था. उस ज़माने में भारतीय महाद्वीप पर अलग-अलग शासकों का राज था.

एक और Quora thread में सामने आया कि कई ऐसे उदाहरण भी हैं जो साबित करते हैं कि महाभारत और रामायण के साम्राज्य भारत के बाहर मौजूद थे. मसलन, सीता का जन्म मिथिला में हुआ था, जो मौजूदा दौर में नेपाल में स्थित है. कैकेयी का साम्राज्य यानि माद्रा साम्राज्य आज के पाकिस्तान में मौजूद है. गांधार साम्राज्य वर्तमान समय में अफ़गानिस्तान में स्थित है. वहीं कंबोजास साम्राज्य को ईरान और पाराम कंबोजास आज के ज़माने के हिसाब से तज़ाकिस्तान में मौजूद है.

अगर दुनिया के बाकी हिस्सों की बात की जाए, तो वहां पर भी मानव अस्तित्व की मौजूदगी के अंश मिलते हैं. पुरातात्विक और पौराणिक सबूतों का विश्लेषण करने पर सामने आया कि ये सभ्यताएं भारतीय सभ्यता जितनी विकसित नहीं थी. साफ़ है कि आधुनिक पश्चिमी सभ्यता केवल 300 से 500 साल ही पुरानी है.

पांडवों के अस्त्र-शस्त्र रखने की जगह थी ऑस्ट्रेलिया ?

Quora पर अपने जवाब में एक महिला ने दावा किया कि, महाभारत और 18 मुख्य पुराण वेद-व्यास द्वारा लिखे गए थे, जिन्होंने वेदों को कई भागों में बांटा था. विष्णुपुराण के अाधार पर उन्होंने ये जानकारी साझा की है.

पुराणों के मुताबिक, अमेरिका क्रौंच द्वीप में स्थित था. ये क्रौंचद्वीप ग्रुथा समुद्रम में स्थित है. इस द्वीप के पार, शीर समुद्र भी मौजूद है.अमेरिका क्रौंचद्वीप में था. क्रौंचद्वीप में सात पहाड़ थे, जो इस द्वीप की सीमा के रूप में मौजूद थे. इन पहाड़ों से सात नदियां बहा करती थी

कुरुवर्षम जम्बूद्वीप की उत्तरी सीमा में स्थित था.आधुनिक ज़माने का शक्तिशाली देश रूस कुरुवर्षम में ही मौजूद था और इसका प्राचीन नाम किरीस्थहन था.अर्जुन ने उत्थारा कुरु भूमि पर अपना अधिकार जमा लिया था. वहीं तुषाराराज्यम, तुर्कमेनिस्तान बन गया और कंभोजराज्यम बाद में चलकर तज़ाकिस्तान कहलाया.

क्रौंचाद्वीपम में एक जंगल मौजूद था, जिसे कपिलारान्य कहा जाता था. यही जंगल आज कैलिफॉर्निया के नाम से जाना जाता है.अस्त्रआलयम जहां पांडव अपने अस्त्र-शस्त्र और हथियारों को रखा करते थे, उसे आज ऑस्ट्रेलिया कहा जाता है.

प्रियवर्था जो स्वायमभुव मनु के पहले बेटे थे, ने पृथ्वी पर 60 सालों तक राज किया था. उसने अपने सात बेटों के लिए पृथ्वी को सात भागों में बांट दिया था. पृथ्वी स्वयमभुव मनु के बेटों के पैदा होने के बाद सात द्वीपों में बंट गई थी. इन द्वीपों के नाम थे, जम्बूद्वीपम्, क्रौंचद्वीपम, प्लाक्शा द्वीपम, शालमली द्वीपम, शुकद्वीपम, शाकद्वीपम और पुष्करद्वीपम थे.

चीनी महाभारत के समय भी थे मौजूद

सन 1500 से लेकर सन 1750 तक आधुनिक पश्चिमी सभ्यता का बोल-बाला रहा और बदलते समय के साथ-साथ अलग-अलग सभ्यताओं ने अपना रुतबा कायम रखा. इस हिसाब से देखा जाए. तो भारतीय उपमहाद्वीप दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता रही.

दुनियाभर में 300 ज़्यादा रामायण के प्रचलित संस्करण हैं. उनमें वाल्मीकि रामायण, कंबन रामायण और रामचरित मानस, अद्भुत रामायण, आध्यात्म रामायण और आनंद रामायण की चर्चा ज़्यादा होती है. उक्त रामायण का अध्ययन करने पर हमें रामकथा से जुड़े कई नए तथ्‍यों की जानकारी मिलती है.

पुस्तकें और ग्रंथ : नेपाल, लाओस, कंपूचिया, मलेशिया, कंबोडिया, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका, बाली, जावा, सुमात्रा और थाईलैंड आदि देशों की लोक-संस्कृति व ग्रंथों में आज भी राम ज़िन्दा हैं. दुनियाभर में बिखरे शिलालेख, भित्तिचित्र, सिक्के, रामसेतु, अन्य पुरातात्विक अवशेष, प्राचीन भाषाओं के ग्रंथ आदि से राम के होने की पुष्टि होती है.

संस्कृत की महान गाथा महाभारत में कई ऐसे कई तत्व भी मौजूद है, जो चीन के अस्तित्व की पुष्टि करती है. महाभारत में, चीनियों के साथ असम के राजा भागादत्ता की अपनी सेना थी. वही राजा सभापर्वण जैसी जगह में भी चीनियों से घिरा रहता था. उस दौर में सिंधु घाटी सभ्यता और कांस्टेंटिनोपल (इस्तानबुल) के बीच व्यापार का एक रूट हुआ करता था.

 प्राचीन जगहों के बदले नाम

कुरुक्षेत्र के पास एक जगह मौजूद है, अमीन. ये इससे पहले तक अभिमन्युपुर के नाम से जानी जाती थी.

जयंता, कुरुक्षेत्र के पास ही स्थित एक गांव का नाम था. आधिकारिक तौर पर अब इस जगह को जींद कहा जाता है, जो हरियाणा में अब एक जिला बन चुका है.

पानीप्रस्थ को अब लोग पानीपत के नाम से जानते है, वहीं सोनीप्रस्थ अब सोनीपत और व्याग्रपत अब बागपत बन गया है.
खंडावप्रस्थ जो कि एक जंगल था, को पहले इंद्रप्रस्थ जैसे शहर के तौर पर स्थापित किया गया और अब आधुनिक समय में इसी जगह को दिल्ली कहा जाता है.

हस्तिनापुर (जिसका नाम राजा हस्तिन था) और मथुरा ऐसी दो जगहें जिनके नामों में अब तक कोई बदलाव नहीं आया है और आखिर में, गुरूग्राम है, जिसे मॉर्डन समय में गुड़गांव कहा गया. लेकिन अब ये एक बार फिर अपने प्राचीन नाम गुरुग्राम में जाना जाने लगा है.

कांधार को उस समय गांधार कहा जाता था. गांधार के राजा शकुनि, महाभारत में एक अहम किरदार के तौर पर जाने जाते हैं. गांधार इसी नाम के साथ ईरान में स्थित है. वहीं कुरुस ने एनाटॉलियंस को यावानास का नाम दिया. कंबोजा, उत्तर कुरु(उज्बेकिस्तान), फ़रस (सिस्तान) का नाम भी महाभारत में कुछ जगह मौजूद है.

जेएनयू प्रोफे़सर की इस मामले में ये है राय

स्त्राद्रु दास ने इस मामले में जेएनयू प्रोफेसर रोमिला थापर की राय पर प्रकाश डाला. प्रोफ़ेसर रोमिला थापर के मुताबिक, महाभारत की कहानी 1200 BC से और रामायण की 1300 BC से शुरु होती है. ये दोनो ही गाथाएं कई सदियों तक श्लोकों के रुप में बयान की जाती रही. 400 AD में इनके बारे में लिखना शुरु किया गया. इससे पहले भी कुछ ऐसे लेख थे, जो महत्वपूर्ण होने के बावजूद ज़्यादा चर्चा नहीं बटोर सकe

ये 1500 सालों का विकास था, जिसने महाभारत और रामायण को आज इस मुकाम पर लाकर खड़ा किया है. दोनों ही ग्रंथ अपने आप में बेहद जटिल है. दुनिया भर में इन्हें लेकर कई धारणाएं, परिभाषाएं और व्याख्याएं मौजूद है. दुनिया का विभिन्न समाज इसे जटिल और रहस्यमयी होने के चलते, अलग-अलग तरीकों से व्याख्या करता रहा हैं.

खास बात ये है कि इन्हें लंबे समय तक नहीं लिखा गया और इन महागाथाओं को केवल एक सीमित समय में ख़त्म कर दिया गया था. इससे ये अपने आस-पास होने वाली सामाजिक, राजनीतिक, वैचारिक परिस्थितियों से वंचित रहे जिसकी वजह से आने वाली सभ्यताएं इन्हें विभिन्न परिदृश्यों में कैद करने में कामयाब रही

2500 साल पहले तक ग्रीक सभ्यता अपने शुरुआती चरण में थी और रोमन सभ्यता में अब भी मछुआरे और चरवाहे काफ़ी संख्या में थे. Mesopotamian सभ्यता अपने ढलान पर थी, तो मिस्त्र की सभ्यता चरम पर. चीन की सभ्यता भी उस समय काफ़ी फल फूल रही थी और सिंधु घाटी सभ्यता पूरी तरह से ख़त्म होने की कगार पर थी क्योंकि लोगों ने दक्षिण की तरफ़ मुड़ना शुरु कर दिया था.
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ऐसे रोचक तथ्य जो आपने आज तक नहीं पढ़े और सुने होंगे।

Jai hind vande matram.jai mata dee.
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जानिए IPC में धाराओ का मतलब .....*
*धारा 307* = हत्या की कोशिश
*धारा 302* = हत्या का दंड
*धारा 376* = बलात्कार
*धारा 395* = डकैती
*धारा 377* = अप्राकृतिक कृत्य
*धारा 396* = डकैती के दौरान हत्या
*धारा 120* = षडयंत्र रचना
*धारा 365* = अपहरण
*धारा 201* = सबूत मिटाना
*धारा 34*   = सामान आशय
*धारा 412* = छीनाझपटी
*धारा 378* = चोरी
*धारा 141* = विधिविरुद्ध जमाव
*धारा 191* = मिथ्यासाक्ष्य देना
*धारा 300* = हत्या करना
*धारा 309* = आत्महत्या की कोशिश
*धारा 310* = ठगी करना
*धारा 312* = गर्भपात करना
*धारा 351* = हमला करना
*धारा 354* = स्त्री लज्जाभंग
*धारा 362* = अपहरण
*धारा 415* = छल करना
*धारा 445* = गृहभेदंन
*धारा 494* = पति/पत्नी के जीवनकाल में पुनःविवाह0
*धारा 499* = मानहानि
*धारा 511* = आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड।
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हमारेे देश में कानूनन कुछ ऐसी हकीक़तें है, जिसकी जानकारी हमारे पास नहीं होने के कारण  हम अपने अधिकार से मेहरूम रह जाते है।

   तो चलिए ऐसे ही कुछ 
*पांच रोचक फैक्ट्स* की जानकारी आपको देते है,
जो जीवन में कभी भी उपयोगी हो सकती है.

*(1)  शाम के वक्त महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं हो सकती*-
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कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, सेक्शन 46 के तहत शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 के पहले भारतीय पुलिस किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती, फिर चाहे गुनाह कितना भी संगीन क्यों ना हो. अगर पुलिस ऐसा करते हुए पाई जाती है तो गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत (मामला) दर्ज की जा सकती है. इससे उस पुलिस अधिकारी की नौकरी खतरे में आ सकती है.

*(2.) सिलेंडर फटने से जान-माल के नुकसान पर 40 लाख रूपये तक का बीमा कवर क्लेम कर सकते है*-

पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी के तहत अगर किसी कारण आपके घर में सिलेंडर फट जाता है और आपको जान-माल का नुकसान झेलना पड़ता है तो आप तुरंत गैस कंपनी से बीमा कवर क्लेम कर सकते है. आपको बता दे कि गैस कंपनी से 40 लाख रूपये तक का बीमा क्लेम कराया जा सकता है. अगर कंपनी आपका क्लेम देने से मना करती है या टालती है तो इसकी शिकायत की जा सकती है. दोषी पाये जाने पर गैस कंपनी का लायसेंस रद्द हो सकता है.

*(3) कोई भी हॉटेल चाहे वो 5 स्टार ही क्यों ना हो… आप फ्री में पानी पी सकते है और वाश रूम इस्तमाल कर सकते है*-

इंडियन सीरीज एक्ट, 1887 के अनुसार आप देश के किसी भी हॉटेल में जाकर पानी मांगकर पी सकते है और उस हॉटल का वाश रूम भी इस्तमाल कर सकते है. हॉटेल छोटा हो या 5 स्टार, वो आपको रोक नही सकते. अगर हॉटेल का मालिक या कोई कर्मचारी आपको पानी पिलाने से या वाश रूम इस्तमाल करने से रोकता है तो आप उन पर कारवाई  कर सकते है. आपकी शिकायत से उस हॉटेल का लायसेंस रद्द हो सकता है.

*(4) गर्भवती महिलाओं को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता*-

मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 के मुताबिक़ गर्भवती महिलाओं को अचानक नौकरी से नहीं निकाला जा सकता. मालिक को पहले तीन महीने की नोटिस देनी होगी और प्रेगनेंसी के दौरान लगने वाले खर्चे का कुछ हिस्सा देना होगा. अगर वो ऐसा नहीं करता है तो  उसके खिलाफ सरकारी रोज़गार संघटना में शिकायत कराई जा सकती है. इस शिकायत से कंपनी बंद हो सकती है या कंपनी को जुर्माना भरना पड़ सकता है.

*(5) पुलिस अफसर आपकी शिकायत लिखने से मना नहीं कर सकता*

आईपीसी के सेक्शन 166ए के अनुसार कोई भी पुलिस अधिकारी आपकी कोई भी शिकायत दर्ज करने से इंकार नही कर सकता. अगर वो ऐसा करता है तो उसके खिलाफ वरिष्ठ पुलिस दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. अगर वो पुलिस अफसर दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम *(6)*महीने से लेकर 1  साल तक की जेल हो सकती है या फिर उसे अपनी नौकरी गवानी पड़ सकती है.

*इन रोचक फैक्ट्स को हमने आपके लिए ढूंढ निकाला है*.

ये वो रोचक फैक्ट्स है, जो हमारे देश के कानून के अंतर्गत आते तो है पर हम इनसे अंजान है. हमारी कोशिश होगी कि हम आगे भी ऐसी बहोत सी रोचक बाते आपके समक्ष रखे, जो आपके जीवन में उपयोगी हो।

*इस मैसेज को आगे भी भेजना और अपने पास सहेज कर रखना, आपके कभी भी ये अधिकार काम आ सकते हैं।*

Abhishek yadav uttam.

जानते है आप 1949 से क्यों रखी हैं ,नाथू राम गोडसे की असाथिया@(अभिषेक।)uttam.

वंदे मातरम । जय हिंद।जय माता दी। जी महाकाली।
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नाथूराम गोडसे ने अपनी बेरेटा पिस्टल की तीन गोलियाँ महात्मा गाँधी के शरीर में उतार दी थीं.गोडसे ने स्वीकार किया कि उन्होंने ही गांधी को मारा है. अपना पक्ष रखते हुए गोडसे ने कहा, ”गांधी जी ने देश की जो सेवा की है, उसका मैं आदर करता हूँ. उनपर गोली चलाने से पूर्व मैं उनके सम्मान में इसीलिए नतमस्तक हुआ था किंतु जनता को धोखा देकर पूज्य मातृभूमि के विभाजन का अधिकार किसी बड़े से बड़े महात्मा को भी नहीं है.

15 नवंबर 1949 को जब नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को फाँसी के लिए ले जाया गया तो उनके एक हाथ में गीता और अखंड भारत का नक्शा था और दूसरे हाथ में भगवा ध्वज. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि फाँसी का फंदा पहनाए जाने से पहले उन्होंने वन्दे मातरम  का उच्चारण किया और जय हिंद के नारे लगाए.

उनकी अस्थियों को अभी तक सुरक्षित रखा हुआ है. हर 15 नवंबर को गोडसे सदन जो महाराष्ट्र में है वहा कार्यक्रम होता हैं शाम छह से आठ बजे तक. वहाँ लोगो को उनके मृत्यु-पत्र को पढ़कर सुनाते हैं. उनकी अंतिम इच्छा भी बच्चों को कंठस्थ है.”गोडसे परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी अस्थियों को अभी तक चाँदी के एक कलश में सुरक्षित रखा हुआ है.

”गोडसे ने लिखकर दिया था कि मेरे शरीर के कुछ हिस्से को संभाल कर रखो और जब सिंधु नदी स्वतंत्र भारत में फिर से समाहित हो जाए और फिर से अखंड भारत का निर्माण हो जाए, तब मेरी अस्थियां उसमें प्रवाहित कीजिए. इसमें दो-चार पीढ़ियाँ भी लग जाएं तो कोई बात नहीं.”

अखंड भारत का निर्माण होने के बाद ही गोडसे की अस्थियां प्रवाहित की जायेंगी,ताकि उन्हें मुक्ति मिल सके.
Yadavuttamabhi232@gmail.com

Makka madina ka such.abhishek.

इराक का एक पुस्तक है जिसे इराकी सरकार ने खुद छपवाया था। इस किताब में 622 ई से पहले के अरब जगत का जिक्र है। आपको बता दें कि ईस्लाम धर्म की स्थापना इसी साल हुई थी। किताब में बताया गया है कि मक्का में पहले शिवजी का एक विशाल मंदिर था जिसके अंदर एक शिवलिंग थी जो आज भी मक्का के काबा में एक काले पत्थर के रूप में मौजूद है। पुस्तक में लिखा है कि मंदिर में कविता पाठ और भजन हुआ करता था।
प्राचीन अरबी काव्य संग्रह गंथ ‘सेअरूल-ओकुल’ के 257वें पृष्ठ पर मोहम्मद से 2300 वर्ष पूर्व एवं ईसा मसीह से 1800 वर्ष पूर्व पैदा हुए लबी-बिन-ए-अरव्तब-बिन-ए-तुरफा ने अपनी सुप्रसिद्ध कविता में भारत भूमि एवं वेदों को जो सम्मान दिया है, वह इस प्रकार है-
“अया मुबारेकल अरज मुशैये नोंहा मिनार हिंदे।�व अरादकल्लाह मज्जोनज्जे जिकरतुन।1।
वह लवज्जलीयतुन ऐनाने सहबी अरवे अतुन जिकरा।�वहाजेही योनज्जेलुर्ररसूल मिनल हिंदतुन।2।
यकूलूनल्लाहः या अहलल अरज आलमीन फुल्लहुम।�फत्तेबेऊ जिकरतुल वेद हुक्कुन मालन योनज्वेलतुन।3।
वहोबा आलमुस्साम वल यजुरमिनल्लाहे तनजीलन।�फऐ नोमा या अरवीयो मुत्तवअन योवसीरीयोनजातुन।4।
जइसनैन हुमारिक अतर नासेहीन का-अ-खुबातुन।�व असनात अलाऊढ़न व होवा मश-ए-रतुन।5।”
अर्थात-(1) हे भारत की पुण्य भूमि (मिनार हिंदे) तू धन्य है, क्योंकि ईश्वर ने अपने ज्ञान के लिए तुझ को चुना। (2) वह ईश्वर का ज्ञान प्रकाश, जो चार प्रकाश स्तम्भों के सदृश्य सम्पूर्ण जगत् को प्रकाशित करता है, यह भारतवर्ष (हिंद तुन) में ऋषियों द्वारा चार रूप में प्रकट हुआ।
(3) और परमात्मा समस्त संसार के मनुष्यों को आज्ञा देता है कि वेद, जो मेरे ज्ञान है, इनकेअनुसार आचरण करो।(4) वह ज्ञान के भण्डार साम और यजुर है, जो ईश्वर ने प्रदान किये। इसलिए, हे मेरे भाइयों! इनको मानो, क्योंकि ये हमें मोक्ष का मार्ग बताते है।
(5) और दो उनमें से रिक्, अतर (ऋग्वेद, अथर्ववेद) जो हमें भ्रातृत्व की शिक्षा देते है, और जो इनकी शरण में आ गया, वह कभी अन्धकार को प्राप्त नहीं होता।
इस्लाम मजहब के प्रवर्तक मोहम्मद स्वयं भी वैदिक परिवार में हिन्दू के रूप में जन्में थे, और जब उन्होंने अपने हिन्दू परिवार की परम्परा और वंश से संबंध तोड़ने और स्वयं को पैगम्बर घोषित करना निश्चित किया, तब संयुक्त हिन्दू परिवार छिन्न-भिन्न हो गया
और काबा में स्थित महाकाय शिवलिंग (संगेअस्वद) के रक्षार्थ हुए युद्ध में पैगम्बर मोहम्मद के चाचा उमर-बिन-ए-हश्शाम को भी अपने प्राण गंवाने पड़े।
उमर-बिन-ए-हश्शाम का अरब में एवं केन्द्र काबा (मक्का) में इतना अधिक सम्मान होता था कि सम्पूर्ण अरबी समाज, जो कि भगवान शिव के भक्त थे एवं वेदों के उत्सुक गायक तथा हिन्दू देवी-देवताओं के अनन्य उपासक थे, उन्हें अबुल हाकम अर्थात ‘ज्ञान का पिता’ कहते थे। बाद में मोहम्मद के नये सम्प्रदाय ने उन्हें ईर्ष्यावश अबुलजिहाल ‘अज्ञान का पिता’ कहकर उनकी निन्दा की।
जब मोहम्मद ने मक्का पर आक्रमण किया, उस समय वहाँ बृहस्पति, मंगल, अश्विनीकुमार, गरूड़, नृसिंह की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित थी। साथ ही एक मूर्ति वहाँ विश्वविजेता महाराजा बलि की भी थी, और दानी होने की प्रसिद्धि से उसका एक हाथ सोने का बना था।
‘Holul’ के नाम से अभिहित यह मूर्ति वहां इब्राहम और इस्माइल की मूर्त्तियों के बराबर रखी थी। मोहम्मद ने उन सब मूर्त्तियों को तोड़कर वहां बने कुएं में फेंक दिया, किन्तु तोड़े गये शिवलिंग का एक टुकडा आज भी काबा में सम्मानपूर्वक न केवल प्रतिष्ठित है, वरन् हज करने जाने वाले मुसलमान उस काले (अश्वेत) प्रस्तर खण्ड अर्थात ‘संगे अस्वद’ को आदर मान देते हुए चूमते है।
जबकि इस्लाम में मूर्ति पूजा या अल्लाह के अलावा किसी की भी स्तुति हराम है�प्राचीन अरबों ने सिन्ध को सिन्ध ही कहा तथा भारत वर्ष के अन्य प्रदेशों को हिन्द निश्चित किया। सिन्ध से हिन्द होने की बात बहुत ही अवैज्ञानिक है। इस्लाम मत के प्रवर्तक मोहम्मद के पैदा होने से 2300 वर्ष पूर्व यानि लगभग 1800 ईश्वी पूर्व भी अरब में हिंद एवं हिंदू शब्द का व्यवहार ज्यों कात्यों आज ही के अर्थ में प्रयुक्त होता था।
अरब की प्राचीन समृद्ध संस्कृति वैदिक थी तथा उस समय ज्ञान-विज्ञान, कला-कौशल, धर्म-संस्कृति आदि में भारत (हिंद) के साथ उसके प्रगाढ़ संबंध थे। हिंद नाम अरबों को इतना प्यारा लगा कि उन्होंने उस देश के नाम पर अपनी स्त्रियों एवं बच्चों के नाम भी हिंद पर रखे।
अरबी काव्य संग्रह ग्रंथ ‘ से अरूल-ओकुल’ के 253वें पृष्ठ पर हजरत मोहम्मद के चाचा उमर-बिन-ए-हश्शाम की कविता है जिसमें उन्होंने हिन्दे यौमन एवं गबुल हिन्दू का प्रयोग बड़े आदर से किया है। ‘उमर-बिन-ए-हश्शाम’ की कविता नई दिल्ली स्थित मन्दिर मार्ग पर श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर (बिड़लामन्दिर) की वाटिका में यज्ञशाला के लाल पत्थर के स्तम्भ (खम्बे) पर कालीस्याही से लिखी हुई है, जो इस प्रकार है –
” कफविनक जिकरा मिन उलुमिन तब असेक ।�कलुवन अमातातुल हवा व तजक्करू ।1।
न तज खेरोहा उड़न एललवदए लिलवरा ।�वलुकएने जातल्लाहे औम असेरू ।2।
व अहालोलहा अजहू अरानीमन महादेव ओ ।�मनोजेल इलमुद्दीन मीनहुम व सयत्तरू ।3।
व सहबी वे याम फीम कामिल हिन्दे यौमन ।�व यकुलून न लातहजन फइन्नक तवज्जरू ।4।
मअस्सयरे अरव्लाकन हसनन कुल्लहूम ।�नजुमुन अजा अत सुम्मा गबुल हिन्दू ।5।
अर्थात् –(1) वह मनुष्य, जिसने सारा जीवन पाप व अधर्म में बिताया हो, काम, क्रोध में अपने यौवन को नष्ट किया हो। (2) यदि अन्त में उसको पश्चाताप हो, और भलाई की ओर लौटना चाहे, तो क्या उसका कल्याण हो सकता है ?�(3) एक बार भी सच्चे हृदय से वह महादेव जी की पूजा करे, तो धर्म-मार्ग में उच्च से उच्चपद को पा सकता है। (4) हे प्रभु ! मेरा समस्त जीवन लेकर केवल एक दिन भारत (हिंद) के निवास का दे दो, क्योंकि वहां पहुंचकर मनुष्य जीवन-मुक्त हो जाता है।
(5) वहां की यात्रा से सारे शुभ कर्मो की प्राप्ति होती है, और आदर्शगुरूजनों (गबुल हिन्दू) का सत्संग मिलता है।

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