सम्पूर्ण जानकारी नाथूराम गोडसे जी के बारे में ,क्या वो वास्तव में हत्यारे थे या देहभक्त ^"हा वो देहभक्त थे ** ये रहे उनके 150 बयान ।जरूर पढ़िए ।

जय माता जगदंबे ।Abhishek.{{uttam}}@
Yadavuttamabhi232@gmail.com.

इन नेताओं ने अपनी कुर्सी की खातिर देश के वास्तविक इतिहास को आज तक धूमिल कर रखा है। जिस दिन कोई सिरफिरा (सिरफिरा इसलिये कह रहा हूँ, क्योंकि यह कार्य देश को आज़ादी दिलाने से कहीं अधिक जोखिम भरा है, जिसे करने डॉ श्यामा प्रसाद मुख़र्जी, नेताजी बोस या भगतसिंह-पंडित चंद्रशेखर आज़ाद आदि आदि को पुनर्जन्म लेना होगा।) नेता देश के वास्ताविक इतिहास को उजागर करने में सफल हो गया, भारत तो क्या समस्त विश्व में कोई अपने आपको गाँधीवादी कहने वाला नहीं मिलेगा।गांधीवाद देश को बहुत हानि पहुंचा रहा है। और इस बात को समस्त नेता समाज भलीभाँति जानता और समझता भी है।

यदि समस्त भारत यह निश्चय कर ले कि “वोट केवल उसी को देंगे जो भारत का वास्तविक इतिहास सामने लायेगा। या केवल इतना बताओ गाँधी हत्या/वध देशहित में था अथवा नहीं।” अन्यथा झूठे आश्वासन देने वालों का सामाजिक बाहिष्कार किया जायेगा। यह तो सर्वविदित है कि भारत की आज़ादी में गाँधी का योगदान नहीं। एक आंदोलन सफल नहीं हुआ। अपनी रोटियाँ सेकने के क्रान्तिकारियों को गाँधी ने अपमानित ही किया है।

30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोड़से ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। लेकिन नाथूराम गोड़से घटना स्थल से फरार नही हुआ, बल्कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया | नाथूराम गोड़से समेत 17 अभियुक्तों पर गांधी की हत्या का मुकदमा चलाया गया | इस मुकदमे की सुनवाई के दरम्यान न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर जनता को सुनाने की अनुमति माँगी थी जिसे न्यायमूर्ति ने स्वीकार कर लिया था|

न्यायमूर्ति खोसला ने स्पष्ट शब्दों में कहा था “यदि कोर्ट परिसर और परिसर से बाहर मौजूद जनता से गोडसे के बयान सुनने पर राय ली जाए, सभी का एक ही मत होगा :नाथूराम गोडसे बेकसूर है।”  हालाँकि सरकार ने नाथूराम के इस वक्तव्य पर प्रतिबन्ध लगा दिया था।  लेकिन नाथूराम के छोटे भाई और गांधी जी की हत्या के सह-अभियोगी गोपाल गोड़से ने 60 साल की लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट में विजय प्राप्त की और नाथूराम का वक्तव्य प्रकाशित किया गया |

हमारे नेता समाज पर (महात्मा)गाँधीवाद इस कदर घर किये हुए है, जिसका शब्दों में वर्णन करना बहुत कठिन है। गाँधीवाद राग से इन नेताओं की मक्खन में रोटी तर जरूर हो रही है, परन्तु भोली-भाली जनता भ्रमित हो इनके चुँगल में फँस रही है। सेवानिर्वित होने उपरान्त एक हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते, जनता में नाथूराम गोडसे के विरुद्ध फैली भ्रांतियों को दूर करने 12-अंकों की श्रृंखला का लेखन किया, जिसे आवश्यकता से अधिक पाठकोँ ने सहराया गया। यह भी भ्रम दूर करने का प्रयास किया कि “भारत को आज़ादी महात्मा गाँधी के कारण नहीं बल्कि भगत सिंह,पण्डित चंद्रशेखर आज़ाद एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस आदि जैसे क्रान्तिकारियों की बदौरत मिली थी। गाँधी के आन्दोलन केवल जनता को भ्रमित कर रहे थे। क्रान्तिकारियों के हौंसले तोड़ रहे थे।

इस पाक्षिक में एक लेख भी लिखा था “भारत रत्न के वास्तविक अधिकारी नाथूराम गोडसे और शेर सिंह राणा” कानून की निगाह में कातिल जरूर है, लेकिन जो देशभक्ति इन दोनों ने दिखाई, भगत सिंह एवं नेताजी बोस आदि क्रान्तिकारियों से कम नहीं। गोडसे ने महात्मा गाँधी को मार भारत के एक और होने वाले विभाजन की हर सम्भावना का अंत किया तो फूलन देवी को मार तिहाड़ जेल में बन्द शेर सिंह राणा ने तिहाड़ से अफ़ग़ानिस्तान भाग कर मौहम्मद गौरी की कब्र की सीढ़ियों में अपमानित हो रही हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की अपमानित होती अस्थियों को भारत लाकर गंगा में प्रवाहित किया। जिसे शेर सिंह ने न्यूज़ चैनलों द्वारा जेल से भागने का कारण पूछने पर बताया भी था।

 

 

नाथूराम गोड़से ने गांधी हत्या के पक्ष में अपनी 150 दलीलें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुति की | प्रस्तुत है “नाथूराम गोड़से के वक्तव्य के मुख्य अंश”

1. नाथूराम का विचार था कि गांधी जी की अहिंसा हिन्दुओं को कायर बना देगी |कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी को मुसलमानों ने निर्दयता से मार दिया था महात्मा गांधी सभी हिन्दुओं से गणेश शंकर विद्यार्थी की तरह अहिंसा के मार्ग पर चलकर बलिदान करने की बात करते थे | नाथूराम गोड़से को भय था गांधी जी की ये अहिंसा वाली नीति हिन्दुओं को कमजोर बना देगी और वो अपना अधिकार कभी प्राप्त नहीं कर पायेंगे |

2. 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोलीकांड के बाद से पुरे देश में ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ आक्रोश उफ़ान पर था | भारतीय जनता इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाने की मंशा लेकर गांधी जी के पास गयी लेकिन गांधी जी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से साफ़ मना कर दिया।

3. महात्मा गांधी ने खिलाफ़त आन्दोलन का समर्थन करके भारतीय राजनीति में साम्प्रदायिकता का जहर घोल दिया | महात्मा गांधी खुद को मुसलमानों का हितैषी की तरह पेश करते थे वो केरल के मोपला मुसलमानों द्वारा वहाँ के 1500 हिन्दूओं को मारने और 2000 से अधिक हिन्दुओं को मुसलमान बनाये जाने की घटना का विरोध तक नहीं कर सके |

4. कांग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से काँग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गांधी जी ने अपने प्रिय सीतारमय्या का समर्थन कर रहे थे | गांधी जी ने सुभाष चन्द्र बोस से जोर जबरदस्ती करके इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर कर दिया |

5. 23 मार्च 1931 को भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गयी | पूरा देश इन वीर बालकों की फांसी को टालने के लिए महात्मा गांधी से प्रार्थना कर रहा था लेकिन गांधी जी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए देशवासियों की इस उचित माँग को अस्वीकार कर दिया।

6. गांधी जी कश्मीर के हिन्दू राजा हरि सिंह से कहा कि कश्मीर मुस्लिम बहुल क्षेत्र है अत: वहां का शासक कोई मुसलमान होना चाहिए | अतएव राजा हरिसिंह को शासन छोड़ कर काशी जाकर प्रायश्चित करने | जबकि  हैदराबाद के निज़ाम के शासन का गांधी जी ने समर्थन किया था जबकि हैदराबाद हिन्दू बहुल क्षेत्र था | गांधी जी की नीतियाँ धर्म के साथ, बदलती रहती थी | उनकी मृत्यु के पश्चात सरदार पटेल ने सशक्त बलों के सहयोग से हैदराबाद को भारत में मिलाने का कार्य किया | गांधी जी के रहते ऐसा करना संभव नहीं होता |

7. पाकिस्तान में हो रहे भीषण रक्तपात से किसी तरह से अपनी जान बचाकर भारत आने वाले विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली | मुसलमानों ने मस्जिद में रहने वाले हिन्दुओं का विरोध किया जिसके आगे गांधी नतमस्तक हो गये और गांधी ने उन विस्थापित हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।

8. महात्मा गांधी ने दिल्ली स्थित मंदिर में अपनी प्रार्थना सभा के दौरान नमाज पढ़ी जिसका मंदिर के पुजारी से लेकर तमाम हिन्दुओं ने विरोध किया लेकिन गांधी जी ने इस विरोध को दरकिनार कर दिया | लेकिन महात्मा गांधी एक बार भी किसी मस्जिद में जाकर गीता का पाठ नहीं कर सके |

9. लाहौर कांग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से विजय प्राप्त हुयी किन्तु गान्धी अपनी जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया | गांधी जी अपनी मांग को मनवाने के लिए अनशन-धरना-रूठना किसी से बात न करने जैसी युक्तियों को अपनाकर अपना काम निकलवाने में माहिर थे | इसके लिए वो नीति-अनीति का लेशमात्र विचार भी नहीं करते थे |

10. 14 जून 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, लेकिन गांधी जी ने वहाँ पहुँच कर प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि गांधी जी ने  स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा। न सिर्फ देश का विभाजन हुआ बल्कि लाखों निर्दोष लोगों का कत्लेआम भी हुआ लेकिन गांधी जी ने कुछ नहीं किया |

11. धर्म-निरपेक्षता के नाम पर मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के जन्मदाता महात्मा गाँधी ही थे | जब मुसलमानों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाये जाने का विरोध किया तो महात्मा गांधी ने सहर्ष ही इसे स्वीकार कर लिया और हिंदी की जगह हिन्दुस्तानी (हिंदी + उर्दू की खिचड़ी) को बढ़ावा देने लगे | बादशाह राम और बेगम सीता जैसे शब्दों का चलन शुरू हुआ |

12. कुछ एक मुसलमान द्वारा वंदेमातरम् गाने का विरोध करने पर महात्मा गांधी झुक गये और इस पावन गीत को भारत का राष्ट्र गान नहीं बनने दिया |

13. गांधी जी ने अनेक अवसरों पर शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोबिन्द सिंह को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा। वही दूसरी ओर गांधी जी मोहम्मद अली जिन्ना को क़ायदे-आजम कहकर पुकारते थे |

14. कांग्रेस ने 1931 में स्वतंत्र भारत के राष्ट्र ध्वज बनाने के लिए एक समिति का गठन किया था इस समिति ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र को भारत का राष्ट्र ध्वज के डिजाइन को मान्यता दी किन्तु गांधी जी की जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।

15. जब सरदार वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया तब गांधी जी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर  सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।

16. भारत को स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान को एक समझौते के तहत 75 करोड़ रूपये देने थे भारत ने 20 करोड़ रूपये दे भी दिए थे लेकिन इसी बीच 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया | केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल ने आक्रमण से क्षुब्ध होकर 55 करोड़ की राशि न देने का निर्णय लिया | जिसका महात्मा गांधी ने विरोध किया और आमरण अनशन शुरू कर दिया जिसके परिणामस्वरूप 55 करोड़ की राशि भारत ने पाकिस्तान दे दी ।

महात्मा गांधी भारत के नहीं अपितु पाकिस्तान के राष्ट्रपिता थे जो हर कदम पर पाकिस्तान के पक्ष में खड़े रहे, फिर चाहे पाकिस्तान की मांग जायज हो या नाजायज | गांधी जी ने कदाचित इसकी परवाह नहीं की |

उपरोक्त घटनाओं को देशविरोधी मानते हुए नाथूराम गोड़से ने महात्मा गांधी की हत्या को न्यायोचित ठहराने का प्रयास किया | नाथूराम ने न्यायालय में स्वीकार किया कि माहात्मा गांधी बहुत बड़े देशभक्त थे उन्होंने निस्वार्थ भाव से देश सेवा की | मैं उनका बहुत आदर करता हूँ लेकिन किसी भी देशभक्त को देश के टुकड़े करने के ,एक समप्रदाय के साथ पक्षपात करने की अनुमति नहीं दे सकता हूँ | गांधी जी की हत्या के सिवा मेरे पास कोई दूसरा उपाय नहीं था |

नाथूराम गोड़से द्वारा अदालत में दिए बयान के मुख्य अंश…..

मेने गांधी को नहीं मारा; मेने गांधी का वध किया है, गांधी वध…वो मेरे दुश्मन नहीं थे, परन्तु उनके निर्णय राष्ट्र के लिए घातक साबित हो रहे थे। जब व्यक्ति के पास कोई रास्ता न बचे तब वह मज़बूरी में सही कार्य के लिए गलत रास्ता अपनाता है।मुस्लिम लीग और पाकिस्तान निर्माण की गलत निति के प्रति गांधीजी की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने ही मुझे मजबूर किया।पाकिस्तान को 55 करोड़ का भुगतान  करने की गैरवाजिब मांग को लेकर गांधी जी अनशन पर बैठे।बटवारे में पाकिस्तान से आ रहे हिन्दुओ की आपबीती और दुर्दशा  ने मुझे हिला के रख दिया था।अखंड हिन्दू राष्ट्र गांधी जी के कारण मुस्लिम लीग के आगे घुटने  टेक रहा  था।बेटो के सामने माँ का खंडित होकर टुकड़ो में बटना विभाजित होना असहनीय था, अपनी ही धरती पर हम परदेशी बन गए थे।मुस्लिम लीग की सारी गलत मांगो को गांधी जी मानते जा रहे थे।मैंने  ये निर्णय किया कि  भारत माँ को अब और विखंडित और दयनीय स्थिति में नहीं होने देना है, तो मुझे गांधी को मारना ही होगा और मैंने इसलिए गांधी को मारा…..मुझे पता हे इसके लिए मुझे फ़ासी होगी, मैं  इसके लिए भी तैयार हु और हाँ, यदि मातृभूमि की रक्षा करना अपराध है  तो मैं  यह अपराध बार बार करूँगा हर बार करूँगाऔर जब तक सिन्ध नदी पुनः अखंड हिन्द में न बहने लगे तब तक मेरी अस्थियो का विसर्जन नहीं करना।मुझे फ़ासी देते वक्त मेरे एक हाथ में केसरिया  ध्वज और दूसरे हाथ में अखंड भारत का नक्शा हो मैं  फ़ासी चढ़ते वक्त अखंड भारत की जय जय बोलना चाहूँगाहे भारत माँ मुझे दुःख हे मैं  तेरी इतनी ही सेवा कर पाया…. (नाथूराम गोडसे)विभाजन के समय हुआ क्या क्या ?विभाजन के लिए क्या था विभिन्न राजनैतिक पार्टियों दृष्टिकोण ?क्या थी पीड़ा पाकिस्तान से आये हिन्दू शरणार्थियों की … मदन लाल पाहवा और विष्णु करकरे की?

क्या थी गोडसे की विवशता ?

क्या गोडसे नही जानते थे की आम आदमी को मरने में और एक राष्ट्रपिता को मरने में क्या अंतर है ?

क्या होगा परिवार का ?

कैसे कैसे कष्ट सहने पड़ेंगे परिवार और सम्बन्धियों को और मित्रों को ?

क्या था गांधी वध का वास्तविक कारण ?

क्या हुआ 30 जनवरी की रात्री को … पुणे के ब्राह्मणों के साथ ?

क्या था सावरकर और हिन्दू महासभा का चिन्तन ?

क्या हुआ गोडसे के बाद नारायण राव आप्टे का .. कैसी नृशंस फांसी दी गयी उन्हें l

यह लेख पढने के बाद कृपया बताएं कैसे उतारेगा भारतीय जनमानस हुतात्मा नाथूराम गोडसे जी का कर्ज….

आइये इन सब सवालों के उत्तर खोजें ….

पाकिस्तान से दिल्ली की तरफ जो रेलगाड़िया आ रही थी, उनमे हिन्दू इस प्रकार बैठे थे जैसे माल की बोरिया एक के ऊपर एक रची जाती हैं.अन्दर ज्यादातर मरे हुए ही थे, गला कटे हुए lरेलगाड़ी के छप्पर पर बहुत से लोग बैठे हुए थे, डिब्बों के अन्दर सिर्फ सांस लेने भर की जगह बाकी थी l बैलगाड़िया ट्रक्स हिन्दुओं से भरे हुए थे, रेलगाड़ियों पर लिखा हुआ था,,” आज़ादी का तोहफा ” रेलगाड़ी में जो लाशें भरी हुई

थी उनकी हालत कुछ ऐसी थी की उनको उठाना मुश्किल था, दिल्ली पुलिस को फावड़ें में उन लाशों को भरकर उठाना पड़ा l ट्रक में भरकर किसी निर्जन स्थान पर ले जाकर, उन पर पेट्रोल के फवारे मारकर उन लाशों को जलाना पड़ा इतनी विकट हालत थी उन मृतदेहों की… भयानक बदबू……

सियालकोट से खबरे आ रही थी की वहां से हिन्दुओं को निकाला जा रहा हैं, उनके घर, उनकी खेती, पैसा-अडका, सोना-चाँदी, बर्तन सब मुसलमानों ने अपने कब्जे में ले लिए थे l मुस्लिम लीग ने सिवाय कपड़ों के कुछ भी ले जाने पर रोक लगा दी थी. किसी भी गाडी पर हमला करके हाथ को लगे उतनी महिलाओं- बच्चियों को भगाया गया.बलात्कार किये बिना एक भी हिन्दू स्त्री वहां से वापस नहीं आ सकती थी … बलात्कार किये बिना…..?

जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आई वो अपनी वैद्यकीय जांच करवाने से डर रही थी….

डॉक्टर ने पूछा क्यों ???

उन महिलाओं ने जवाब दिया… हम आपको क्या बताये हमें क्या हुआ हैं ?

हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं हमें भी पता नहीं हैं…उनके सारे शारीर पर चाकुओं के घाव थे.

“आज़ादी का तोहफा”

जिन स्थानों से लोगों ने जाने से मना कर दिया, उन स्थानों पर हिन्दू स्त्रियों की नग्न यात्राएं (धिंड) निकाली गयीं, बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ लगायी गयीं और उनको दासियों की तरह खरीदा बेचा गया l

1947 के बाद दिल्ली में 400000 हिन्दू निर्वासित आये, और इन हिन्दुओं को जिस हाल में यहाँ आना पड़ा था, उसके बावजूद पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने ही चाहिए ऐसा महात्मा गाँधी जी का आग्रह था…क्योकि एक तिहाई भारत के तुकडे हुए हैं तो भारत के खजाने का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान को मिलना चाहिए था l

विधि मंडल ने विरोध किया, पैसा नहीं देगे….और फिर बिरला भवन के पटांगन में महात्मा जी अनशन पर बैठ गए…..पैसे दो, नहीं तो मैं मर जाउगा….एक तरफ अपने मुहँ से ये कहने वाले महात्मा जी, की हिंसा उनको पसंद नहीं हैं l दूसरी तरफ जो हिंसा कर रहे थे उनके लिए अनशन पर बैठ गए… क्या यह हिंसा नहीं थी .. अहिंसक आतंकवाद की आड़ में

दिल्ली में हिन्दू निर्वासितों के रहने की कोई व्यवस्था नहीं थी, इससे ज्यादा बुरी बात ये थी की दिल्ली में खाली पड़ी मस्जिदों में हिन्दुओं ने शरण ली तब बिरला भवन से महात्मा जी ने भाषण में कहा की दिल्ली पुलिस को मेरा आदेश हैं मस्जिद जैसी चीजों पर हिन्दुओं का कोई ताबा नहीं रहना चाहिए l निर्वासितों को बाहर निकालकर मस्जिदे खाली करे..क्योंकि महात्मा जी की दृष्टी में जान सिर्फ मुसलमानों में थी हिन्दुओं में नहीं…

जनवरी की कडकडाती ठंडी में हिन्दू महिलाओं और छोटे छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर पुलिस ने मस्जिद के बाहर निकाला, गटर के किनारे रहो लेकिन छत के निचे नहीं l क्योकि… तुम हिन्दू हो….

4000000 हिन्दू भारत में आये थे,ये सोचकर की ये भारत हमारा हैं….ये सब निर्वासित गांधीजी से मिलाने बिरला भवन जाते थे तब गांधीजी माइक पर से कहते थे क्यों आये यहाँ अपने घर जायदाद बेचकर, वहीँ पर अहिंसात्मक प्रतिकार करके क्यों नहीं रहे ??

यही अपराध हुआ तुमसे अभी भी वही वापस जाओ..और ये महात्मा किस आशा पर पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने निकले थे?

कैसा होगा वो मोहनदास करमचन्द गाजी उर्फ़ गंधासुर … कितना महान … जिसने बिना तलवार उठाये … 35 लाख हिन्दुओं का नरसंहार करवाया

2 करोड़ से ज्यादा हिन्दुओं का इस्लाम में धर्मांतरण हुआऔर उसके बाद यह संख्या 10 करोड़ भी पहुंची l
10 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को खरीदा बेचा गया l

20 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया, तरह तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाओं के बाद
ऐसे बहुत से प्रश्न, वास्तविकताएं और सत्य तथा तथ्य हैं जो की 1947 के समकालीन लोगों ने अपनी आने वाली पीढ़ियों से छुपाये, हिन्दू कहते हैं की जो हो गया उसे भूल जाओ, नए कल की शुरुआत करो …
परन्तु इस्लाम के लिए तो कोई कल नहीं .. कोई आज नहीं …वहां तो दार-उल-हर्ब को दार-उल-इस्लाम में बदलने का ही लक्ष्य है पल.. प्रति पल
विभाजन के बाद एक और विभाजन का षड्यंत्र …
आपने बहुत से देशों में से नए देशों का निर्माण देखा होगा, U S S R टूटने के बाद बहुत से नए देश बने, जैसे ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान आदि … परन्तु यह सब देश जो बने वो एक परिभाषित अविभाजित सीमा के अंदर बने l
और जब भारत का विभाजन हुआ .. तो क्या कारण थे की पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान बनाए गए… क्यों नही एक ही पाकिस्तान बनाया गया… या तो पश्चिम में बना लेते या फिर पूर्व में l
परन्तु ऐसा नही हुआ …. यहाँ पर उल्लेखनीय है की मोहनदास करमचन्द ने तो यहाँ तक कहा था की पूरा पंजाब पाकिस्तान में जाना चाहिए, बहुत कम लोगों को ज्ञात है की 1947 के समय में पंजाब की सीमा दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र तक होती थी … यानी की पाकिस्तान का बोर्डर दिल्ली के साथ होना तय था … मोहनदास करमचन्द गाँधी के अनुसार l
नवम्बर 1968 में पंजाब में से दो नये राज्यों का उदय हुआ .. हिमाचल प्रदेश और हरियाणा l
पाकिस्तान जैसा मुस्लिम राष्ट्र पाने के बाद भी जिन्ना और मुस्लिम लीग चैन से नहीं बैठे …
उन्होंने फिर से मांग की … की हमको पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में बहुत समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं l
1. पानी के रास्ते बहुत लम्बा सफर हो जाता है क्योंकि श्री लंका के रस्ते से घूम कर जाना पड़ता है l
2. और हवाई जहाज से यात्राएं करने में अभी पाकिस्तान के मुसलमान सक्षम नही हैं l इसलिए …. कुछ मांगें रखी गयीं 1. इसलिए हमको भारत के बीचो बीच एक Corridor बना कर दिया जाए….
2. जो लाहोर से ढाका तक जाता हो … (NH – 1)
3. जो दिल्ली के पास से जाता हो …
4. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील की हो … (10 Miles = 16 KM)
5. इस पूरे Corridor में केवल मुस्लिम लोग ही रहेंगे l
30 जनवरी को गांधी वध यदि न होता, तो तत्कालीन परिस्थितियों में बच्चा बच्चा यह जानता था की यदि मोहनदास करमचन्द 3 फरवरी, 1948 को पाकिस्तान पहुँच गया तो इस मांग को भी …मान लिया जायेगा
तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार तो मोहनदास करमचन्द किसी की बात सुनने की स्थिति में था न ही समझने में …और समय भी नहीं था जिसके कारण हुतात्मा नाथूराम गोडसे जी को गांधी वध जैसा अत्यधिक साहसी और शौर्यतापूर्ण निर्णय लेना पडा l
हुतात्मा का अर्थ होता है जिस आत्मा ने अपने प्राणों की आहुति दी हो …. जिसको की वीरगति को प्राप्त होना भी कहा जाता है l
यहाँ यह सार्थक चर्चा का विषय होना चाहिए की हुतात्मा पंडित नाथूराम गोडसे जीने क्या एक बार भी नहीं सोचा होगा की वो क्या करने जा रहे हैं ?
किसके लिए ये सब कुछ कर रहे हैं ?
उनके इस निर्णय से उनके घर, परिवार, सम्बन्धियों, उनकी जाती और उनसे जुड़े संगठनो पर क्या असर पड़ेगा ?
घर परिवार का तो जो हुआ सो हुआ …. जाने कितने जघन्य प्रकारों से समस्त परिवार और सम्बन्धियों को प्रताड़ित किया गया l
परन्तु ….. अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले मोहनदास करमचन्द के कुछ अहिंसक आतंकवादियों ने 30 जनवरी, 1948 की रात को ही पुणे में 6000 ब्राह्मणों को चुन चुन कर घर से निकाल निकाल कर जिन्दा जलाया l
10000 से ज्यादा ब्राह्मणों के घर और दुकानें जलाए गए l
सोचने का विषय यह है की उस समय संचार माध्यम इतने उच्च कोटि के नहीं थे, विकसित नही थे … फिर कैसे 3 घंटे के अंदर अंदर इतना सुनियोजित तरीके से इतना बड़ा नरसंहार कर दिया गया ….
सवाल उठता है की … क्या उन अहिंसक आतंकवादियों को पहले से यह ज्ञात था की गांधी वध होने वाला है ?
जस्टिस खोसला जिन्होंने गांधी वध से सम्बन्धित केस की पूरी सुनवाई की… 35 तारीखें पडीं l
अदालत ने निरीक्षण करवाया और पाया हुतात्मा पनदिर नाथूराम गोडसे जी की मानसिक दशा को तत्कालीन चिकित्सकों ने एक दम सामान्य घोषित किया l पंडित जी ने अपना अपराध स्वीकार किया पहली ही सुनवाई में और अगली 34 सुनवाइयों में कुछ नहीं बोले … सबसे आखिरी सुनवाई में पंडित जी ने अपने शब्द कहे “”
गाँधी वध के समय न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर सुनाने की अनुमति मांगी थी और उसे यह अनुमति मिली थी | नाथूराम गोडसे का यह न्यायालयीन वक्तव्य भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था |इस प्रतिबन्ध के विरुद्ध नाथूराम गोडसे के भाई तथा गाँधी वध के सह अभियुक्त गोपाल गोडसे ने ६० वर्षों तक वैधानिक लडाई लड़ी और उसके फलस्वरूप सर्वोच्च न्यायलय ने इस प्रतिबन्ध को हटा लिया तथा उस वक्तव्य के प्रकाशन की अनुमति दे दी।
नाथूराम गोडसे ने न्यायलय के समक्ष गाँधी वध के जो १५० कारण बताये थे उनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –
1. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए। गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।
2. भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गान्धी की ओर देख रहा था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं, किन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगत सिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहा जाता है।
3. 6 मई 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।
4.मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए 1921 में गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला में मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग 1500 हिन्दु मारे गए व 2000 से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस हिंसा का विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया।
5.1926 में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या अब्दुल रशीद नामक एक मुस्लिम युवक ने कर दी, इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए अहितकारी घोषित किया।
6.गान्धी ने अनेक अवसरों पर छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोविन्द सिंह जी को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।
7.गान्धी ने जहाँ एक ओर काश्मीर के हिन्दु राजा हरि सिंह को काश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।
8. यह गान्धी ही था जिसने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।
9. कॉंग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिए बनी समिति (1931) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गाँधी कि जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।
10. कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गान्धी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहा था, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पदत्याग कर दिया।
11. लाहोर कॉंग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गान्धी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।
12. 14-15 जून, 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गान्धी ने वहाँ पहुंच प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।
13. मोहम्मद अली जिन्ना ने गान्धी से विभाजन के समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की सम्पूर्ण अदला बदली का आग्रह किया था जिसे गान्धी ने अस्वीकार कर दिया।
14. जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गान्धी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।
15. पाकिस्तान से आए विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो गान्धी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।
16. 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने काश्मीर पर आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउँटबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपए की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन किया- फलस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी।
उपरोक्त परिस्थितियों में नथूराम गोडसे नामक एक देशभक्त सच्चे भारतीय युवक ने गान्धी का वध कर दिया।
न्य़यालय में चले अभियोग के परिणामस्वरूप गोडसे को मृत्युदण्ड मिला किन्तु गोडसे ने न्यायालय में अपने कृत्य का जो स्पष्टीकरण दिया उससे प्रभावित होकर उस अभियोग के न्यायधीश श्री जे. डी. खोसला ने अपनी एक पुस्तक में लिखा-
“नथूराम का अभिभाषण दर्शकों के लिए एक आकर्षक दृश्य था। खचाखच भरा न्यायालय इतना भावाकुल हुआ कि लोगों की आहें और सिसकियाँ सुनने में आती थींऔर उनके गीले नेत्र और गिरने वाले आँसू दृष्टिगोचर होते थे। न्यायालय में उपस्थित उन प्रेक्षकों को यदि न्यायदान का कार्य सौंपा जाता तो मुझे तनिक भी संदेह नहीं कि उन्होंने अधिकाधिक सँख्या में यह घोषित किया होता कि नथूराम निर्दोष है।”
तो भी नथूराम ने भारतीय न्यायव्यवस्था के अनुसार एक व्यक्ति की हत्या के अपराध का दण्ड मृत्युदण्ड के रूप में सहज ही स्वीकार किया। परन्तु भारतमाता के विरुद्ध जो अपराध गान्धी ने किए, उनका दण्ड भारतमाता व उसकी सन्तानों को भुगतना पड़ रहा है। यह स्थिति कब बदलेगी?
प्रश्न यह भी उठता है की पंडित नाथूराम गोडसे जी ने तो गाँधी वध किया उन्हें पैशाचिक कानूनों के द्वारा मृत्यु दंड दिया गया परन्तु नाना जी आप्टे ने तो गोली नहीं मारी थी … उन्हें क्यों मृत्युदंड दिया गया ?
नाथूराम गोडसे को सह अभियुक्त नाना आप्टे के साथ १५ नवम्बर १९४९ को पंजाब के अम्बाला की जेल में मृत्यु दंड दे दिया गया। उन्होंने अपने अंतिम शब्दों में कहा था…
यदि अपने देश के प्रति भक्तिभाव रखना कोई पाप है तो मैंने वो पाप किया है और यदि यह पुन्य हिया तो उसके द्वारा अर्जित पुन्य पद पर मैं अपना नम्र अधिकार व्यक्त करता हूँ

– नाथूराम गोडसे .

भारत के सबसे महंगे स्कूल। आपके होश उड़ा देंगे।

ये भारत के इतने महंगे स्कूल हैं कि फीस जानकर उड़ जाएंगे आपके होश
In Khabar 23 Jan. 2017 17:19

most expensive schools of India

नई दिल्ली : जब आप किसी स्कूल में अपने बच्चे का एडमिशन कराने जाते हैं तो सबसे पहले आप उसकी फीस देखते हैं उसके बाद ही आप फैसला लेते हैं, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि फीस सुनकर ही आप उस स्कूल में एडमिशन का मन त्याग देते हैं. आज हम आपको देश के 6 सबसे महंगे स्कूल के बारे बता रहे हैंं.
1. दून स्कूल (Doon School)
देहरादून के दून स्कूल के नाम से हर कोई परिचित है. इसकी स्थापना 1935 में हुई थी. इसमें अमीरों के बच्चे ही पढ़ सकते हैं क्योंकि यहां की सालाना फीस 970000 रुपये है, जिसमें सिक्योरिटी के लिए 350000 जिसे एडमिशन के समय देना पड़ता है. साथ ही एडमिशन फीस भी 3 लाख 50 हजार है जो एक बार में देना होता है.

यह स्कूल गांधी परिवार के लिए भी जाना जाता है. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने यहां पढ़ाई की और भाई संजय गांधी को अनुशासनहीनता के लिये नोटिस दिया गया था. स्कूल का कैंपस 80 एकड़ में फैला है. स्कूल देहरादून के शांत कैंट इलाके में है.
2. सिंधिया स्‍कूल (Scindia School)
सिंधिया स्कूल की स्थापना 1897 में हुई थी. महाराजा माधवराव सिंधिया ने ही इसे खोला था. ग्‍वालियर के इस स्कूल में मुकेश अंबानी, सलमान खान और अनुराग कश्‍यप जैसे दिग्गजों ने पढ़ाई की है. इसकी सालाना फीस 7,70,800 रुपए है.

3. मायो कॉलेज (Mayo College)
राजस्‍थान के अजमेर स्थित मायो स्कूल की स्थापना 1875 में हुई थी. इसे देश के सबसे पुराने ब्‍वॉयज रेसिडेंशनल पब्लिक स्‍कूल का गौरव हासिल है. इसके कैंपस में गोल्‍फ कोर्स, पोलो ग्राउंड, हॉर्स राइडिंग, 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग रेंज हैं. इस स्कूल से पत्रकार वीर सांघवी और जसवंत सिंह जैसे लोगों ने पढ़ाई की है. इसकी सालाना फीस 514000 रुपये है.

4. कोल मोंडिएल वर्ल्‍ड स्‍कूल (Ecole Mondiale World School)
मुंबई स्थित यह इंटरनेशनल बैकुलरेट स्कूल IB प्राइमरी ईयर्स प्रोग्राम, मिडल ईयर्स प्रोग्राम और डिप्‍लोमा प्रोग्राम के लिए है. यह स्कूल ग्रेड 9 और 10 के लिए IGCSE ऑफर करता है. इसकी सालाना फीस 1090000 रुपये है.

5. वेलहम ब्‍वॉयज स्‍कूल (Welham Boys' School)
यह स्कूल देहरादून में है जो 30 एकड़ में फैला है. इसकी सालाना फीस 570000 रुपये है. यहां से मणि शंकर अय्यर, नवीन पटनायक, संजय गांधी, विक्रम सेठ जैसे लोगों ने अपनी पढ़ाई पूरी की है.

6. वुडस्‍टॉक स्‍कूल (Woodstock School)
यह स्कूल मसूरी में है, जिसकी 12 कक्षा की सालाना फीस 1590000 रुपये है. साथ ही नामांकन के दौरान 4 लाख रुपये देने होते हैं जिसे वापस नहीं किया जाता. यहां से नयनतारा सहगल ने पढ़ाई की है.

"INDIAN" शब्द का वास्तविक अर्थ जानकर आप शर्म से द्दोब जायेंगे।अभिषेक यादव उत्तम।

”INDIAN” शब्द का वास्तविक अर्थ जानकर ,शर्म से डूब जाएंगे आप । जरूर पढ़ें ।

“Indian” शब्द का अर्थ है हरामी संतान:आपने पढ़ा होगा अंग्रेजोँ के समय मेँ सिनेमाघरोँ और कई सार्वजनिक जगहोँ पर “Dogs and Indians are not allowed”  का बोर्ड लगा रहता था इसी से आप समझ सकते हैँ अंग्रेज के लिये इंडियन्स की क्या वैल्यू थी।

लेकिन यदि आप ऑक्सफ़ोर्ड की पुरानी डिक्शनरी ( Oxford Dictionary ) खोलें तो पृष्ठ नं० 789 पर लिखा है Indian जिसका मतलब बताया गया है कि “old-fashioned & criminal peoples” अर्थात् पिछडे और घिसे-पिटे विचारों वाले अपराधी लोग तथा india का एक और अर्थ है “वह व्यक्ति या दंपत्ति जिसके माता-पिता का विवाह चर्च में नहीं हुआ हो|” अर्थात “Indian” शब्द का अर्थ है उस दंपत्ति से पैदा संतानें जो की चर्च में विवाह न होने के कारण नाजायज हैं मतलब कि बास्टर्ड या फिर हरामी संतान | ब्रिटेन में वहां के नागरिकों को “इंडियन” कहना क़ानूनी अपराध है |

 

 “भारत” या “इंडिया”  इस देश का क्या नाम है ? सरकार से यही सवाल लखनऊ की सामाजिक कार्यकर्ता ने पूछ कर केंद्र सरकार को मुश्किल में डाल दिया है सूचना के अधिकार क़ानून यानी आर0 टी0 आई0  के तहत पूछा है कि सरकारी तौर पर भारत का क्या नाम है ?

उन्होंने बीबीसी को बताया, “इस बारे में हमारे बीच काफी असमंजस है. बच्चे पूछते हैं कि जापान का एक नाम है, चीन का एक नाम है लेकिन अपने देश के दो नाम क्यूं हैं.” उनके इस सवाल ने सरकारी दफ्तरों में हलचल मचा दी है क्योंकि सरकार के पास फिलहाल इसका कोई जवाब नहीं है.

जबाब में आवेदक चाहता है कि  “हमें सुबूत चाहिए कि किसने और कब इस देश का नाम “इंडिया” रखा ? या भारत को “इंडिया” कहने का फैसला कब किसके द्वारा लिया गया ?”

उक्त आवेदन पर प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें जवाब मिला है जिसमें कहा गया है कि “उनके आवेदन को गृह मंत्रालय के पास भेजा गया है.”

गृह मंत्रालय में भी इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था अतः इसे “संस्कृति विभाग” और फिर वहां से “राष्ट्रीय अभिलेखागार” भेजा गया है जहां जानकारी खोजी जा रही है.

राष्ट्रीय अभिलेखागार 300 वर्षों के सरकारी दस्तावेज़ों का संग्रह है. वहां के एक अधिकारी ने बताया है कि  “हम इसका जवाब ढूंढ रहे हैं. जवाब शीघ्र ही भेजा जाएगा.”

भारतीय संविधान की प्रस्तावना में लिखा है- ‘इंडिया दैट इज़ भारत’. इसका मतलब यह हुआ है कि देश के दो नाम हैं. सरकारी तौर पर ‘गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया’ भी कहते हैं और ‘भारत सरकार’ भी कहते हैं.

सरकारी कार्यवाही में भारत और इंडिया दोनों का इस्तेमाल किया जाता है जबकि हमारे संविधान में भी कहा गया है ” इंडिया दैट इज भारत”|

 

कुछ विद्वान मानते हैं कि “इंड” शब्द कि उत्पत्ति “सिंध” शब्द से हुई है इसी “इंड” से इंडिया बना किन्तु यह विचार गलत है क्योंकि जिन स्थानों पर सिंध नदी नहीं थी वहाँ के निवासियों के लिए भी अंग्रेज “इंड” शब्द का प्रयोग करते थे | जैसेकि अमेरिका के मूल निवासियों को “रेड इंडियन” कहा जाता था इसके अलाव इंडोचीन, इंडोनेशिया, वेस्टइंडीज़, ईस्टइंडीज़ आदि शब्दों के प्रयोग में सिंधु से कोई लेना-देना नहीं है |

अर्थात “इंडियन” शब्द शतप्रतिशत गुलामी का प्रतीक है नफरत भरा शब्द है क्योंकि जो लोग ईसाई चर्चों की मान्यताओं के अनुसार विवाह नहीं करते थे उन्हें ‘इंडियन’ कहा जाता है ।

योगेश मिश्र
ज्योतिषाचार्य,संवैधानिक शोधकर्ता एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

Copied.jai mata dee.

5 ज़बरदस्त Science Facts जिन्हें लोग समझते हैं झूठ

5 ज़बरदस्त Science Facts जिन्हें लोग समझते हैं झूठ


1. अगर किसी एक आकाश गंगा के सारे तारे नमक के दाने जितने हो जाए तो वह Olympic का पूरा का पूरा Swimming pool भर सकते हैं.

2. शनि ग्रह का घनत्व इतना कम हैं कि यदि कांच के किसी विशालकर बर्तन में पानी भरकर शनि को उसमें डाला जाये तो वह उसमें तैरने लगेगा।

3. वैज्ञानिक आज तक निश्चित नहीं कर पाए हैं, कि डायनासोर का रंग क्या था।

4. आपकी जानकारी के लिए बता दे -40 डिग्री फारेनहाइट -40 डिग्री सेल्सियस के बराबर है

5. बृहस्पति इतना बड़ा ग्रह हैं की यदि शेष सभी ग्रह को आपस में जोड़ दिया जाये तो वह संयुक्त ग्रह भी बृहस्पति से छोटा ही रहेगा।

4 GB मेमोरी / पेनड्राइव 3.9 GB Space क्यों Show करती है क्या आपने कभी सोचा है

Vande matram. Abhishek welcome u all readers.
4 GB मेमोरी / पेनड्राइव 3.9 GB Space क्यों Show करती है क्या आपने कभी सोचा है

Why 4 GB Memory Show 3.9 GB Space Explaination in Hindi-हेलो दोस्तों मेरा नाम है दयाशंकर और आज मैं आप लोगों को बताने जा रहा हूं कि 4 GB मेमोरी में 3.9 GB स्पेस क्यों दिखाई देता है तो इसका एक Simple सा Logic है

की जो मेमोरी बनती है तो वहां जो मैन्युफैक्चर होते हैं उनका जो 1GB का पैमाना होता है वह 1000 MB होता है और जो हमारा कंप्यूटर मोबाइल या जो भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में हम मेमोरी को लगाते हैं उसका जो 1GB का पैमाना होता है वह 1024 MB होता है इसीलिए जो मेमोरी 4 GB की होती है यानी की मैन्युफैक्चरर के हिसाब से उसमें 4000 MB स्पेस होना चाहिए और जब आप उसे कंप्यूटर में लगाते हैं तो अगर उस पेन ड्राइव में 4096 MB स्पेस होगा तभी वह 4GB शो करेगा लेकिन एक्चुअल में स्पेस होता है 4000 MB इसीलिए जो है इस पर 3.9 GB Space Show करता है

AccordingTo manufacturer-
1GB = 1000 MB
4GB = 4000 MB

According To Electronic Device-
1 GB = 1024 MB
4 GB = 4096 MB

_____________________________

4000/1042 = 3.9 GB

Jai mata dee.om namah shivaay.

भारतीय मुद्रा रुपये से जुड़े 31अद्भुत रोचक तथ्य जो आपने आज तक नहीं पढ़े होंगे।अभिषेक यादव (उत्तम)*7068094926 whatsap no.

Jai bharat vande matram . be positive .Abhishek singh yadav.{uttam}@
Yadavuttamabhi232@gmail.com.
भारतीय मुद्रा (रुपया ₹) से जुड़े 31 ग़ज़ब रोचक तथ्य,

Amazing Facts about Indian Currency in Hindi – भारतीय रुपयें के बारे में रोचक तथ्य
रुपया, रुपया, रुपया! … सभी का यही हाल हैं। आप की कीमत तब तक है जब तक आप के पास ऐसा कुछ है जो पैसे से ख़रीदा ना जा सके। हम आपको रुपये की शुरूआत से लेकर बहुत से सवालों के जवाब देंगे। मैं आज आपके साथ Indian Currency Facts, Hindi में share कर रहा हूँ. मेरी कोशिश होगी की यह लेख Hindi में इस विषय पर लिखे गए सबसे अच्छे लेखों में से एक हो.1. भारत में करंसी का इतिहास 2500 साल पुराना हैं। इसकी शुरूआत एक राजा द्वारा की गई थी।2. अगर आपके पास आधे से ज्यादा (51 फीसदी) फटा हुआ नोट है तो भी आप बैंक में जाकर उसे बदल सकते हैं।3. बात सन् 1917 की हैं, जब 1₹ रुपया 13$ डाॅलर के बराबर हुआ करता था। फिर 1947 में भारत आजाद हुआ, 1₹ = 1$ कर दिया गया. फिर धीरे-धीरे भारत पर कर्ज बढ़ने लगा तो इंदिरा गांधी ने कर्ज चुकाने के लिए रूपये की कीमत कम करने का फैसला लिया उसके बाद आज तक रूपये की कीमत घटती आ रही हैं।4. अगर अंग्रेजों का बस चलता तो आज भारत की करंसी पाउंड होती. लेकिन रुपए की मजबूती के कारण ऐसा संभव नही हुआ।5. इस समय भारत में 400 करोड़ रूपए के नकली नोट हैं। उम्मीद है कि अब ये खत्म हो जाएगे6. सुरक्षा कारणों की वजह से आपको नोट के सीरियल नंबर में I, J, O, X, Y, Z अक्षर नही मिलेंगे।7. हर भारतीय नोट पर किसी न किसी चीज की फोटो छपी होती हैं जैसे- 20 रुपए के नोट पर अंडमान आइलैंड की तस्वीर है। वहीं, 10 रुपए के नोट पर हाथी, गैंडा और शेर छपा हुआ है, जबकि 100 रुपए के नोट पर पहाड़ और बादल की तस्वीर है। इसके अलावा 500 रुपए के नोट पर आजादी के आंदोलन से जुड़ी 11 मूर्ति की तस्वीर छपी हैं।8. भारतीय नोट पर उसकी कीमत 15 भाषाओं में लिखी जाती हैं।9. 1₹ में 100 पैसे होगे, ये बात सन् 1957 में लागू की गई थी। पहले इसे 16 आने में बाँटा जाता था। (सन् 1936 में बना 8 आनें का सिक्का मेरे पास भी हैं.)10. RBI, ने जनवरी 1938 में पहली बार 5₹ की पेपर करंसी छापी थी. जिस पर किंग जार्ज-6 का चित्र था। इसी साल 10,000₹ का नोट भी छापा गया था लेकिन 1978 में इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया।11. आजादी के बाद पाकिस्तान ने तब तक भारतीय मुद्रा का प्रयोग किया जब तक उन्होनें काम चलाने लायक नोट न छाप लिए।12. भारतीय नोट किसी आम कागज के नही, बल्कि काॅटन के बने होते हैं। ये इतने मजबूत होते हैं कि आप नए नोट के दोनो सिरों को पकड़कर उसे फाड़ नही सकते।13. एक समय ऐसा था, जब बांग्लादेश ब्लेड बनाने के लिए भारत से 5 रूपए के सिक्के मंगाया करता था. 5 रूपए के एक सिक्के से 6 ब्लेड बनते थे. 1 ब्लेड की कीमत 2 रूपए होती थी तो ब्लेड बनाने वाले को अच्छा फायदा होता था. इसे देखते हुए भारत सरकार ने सिक्का बनाने वाला मेटल ही बदल दिया।14. आजादी के बाद सिक्के तांबे के बनते थे। उसके बाद 1964 में एल्युमिनियम के और 1988 में स्टेनलेस स्टील के बनने शुरू हुए।

15. भारतीय नोट पर महात्मा गांधी की जो फोटो छपती हैं वह तब खीँची गई थी जब गांधीजी, तत्कालीन बर्मा और भारत में ब्रिटिश सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत फ्रेडरिक पेथिक लॉरेंस के साथ कोलकाता स्थित वायसराय हाउस में मुलाकात करने गए थे। यह फोटो 1996 में नोटों पर छपनी शुरू हुई थी। इससे पहले महात्मा गांधी की जगह अशोक स्तंभ छापा जाता था।16. भारत के 500 और 1,000 रूपये के नोट नेपाल में नही चलते। और अब तो भारत में भी नही चल रहे.17. 500₹ का पहला नोट 1987 में और 1,000₹ पहला नोट सन् 2000 में बनाया गया था। फिलहाल 1,000₹ का नोट बंद हो चुका है। और 500₹ का नया नोट मार्केट में आ रहा है।18. भारत में 75, 100 और 1,000₹ के भी सिक्के छप चुके हैं।19. 1₹ का नोट भारत सरकार द्वारा और 2 से 1,000₹ तक के नोट RBI द्वारा जारी किये जाते थे.20. एक समय पर भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए 0₹ का नोट 5thpillar नाम की गैर सरकारी संस्था द्वारा जारी किए गए थे।21. 10₹ के सिक्के को बनाने में 6.10₹ की लागत आती हैं.22. नोटो पर सीरियल नंबर इसलिए डाला जाता हैं ताकि आरबीआई(RBI) को पता चलता रहे कि इस समय मार्केट में कितनी करंसी हैं।23. रूपया भारत के अलावा इंडोनेशिया, मॉरीशस, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका की भी करंसी हैं।24. According to RBI, भारत हर साल 2,000 करोड़ करंसी नोट छापता हैं।25. कम्प्यूटर पर ₹ टाइप करने के लिए 'Ctrl+Shift+$' के बटन को एक साथ दबावें.26. ₹ के इस चिन्ह को 2010 में उदय कुमार ने बनाया था। इसके लिए इनको 2.5 लाख रूपयें का इनाम भी मिला था।27.
क्या RBI जितना मर्जी चाहे उतनी कीमत के नोट छाप सकती हैं ?ऐसा नही हैं, कि RBI जितनी मर्जी चाहे उतनी कीमत के नोट छाप सकती हैं, बल्कि वह सिर्फ 10,000₹ तक के नोट छाप सकती हैं। अगर इससे ज्यादा कीमत के नोट छापने हैं तो उसको रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 में बदलाव करना होगा।28. जब हमारे पास मशीन हैं तो हम अनगणित नोट क्यों नही छाप सकते ?हम कितने नोट छाप सकते हैं इसका निर्धारण मुद्रा स्फीति, जीडीपी ग्रोथ, बैंक नोट्स के रिप्लेसमेंट और रिजर्व बैंक के स्टॉक के आधार पर किया जाता है।29. हर सिक्के पर सन् के नीचे एक खास निशान बना होता हैं आप उस निशान को देखकर पता लगा सकते हैं कि ये सिक्का कहाँ बना हैं.मुंबई – हीरा [◆]
नोएडा – डाॅट [.]
हैदराबाद – सितारा [★]
कोलकाता – कोई निशान नहीं.
30. जानिए, एक नोट कितने रूपयें में छपता हैं।1₹ = 1.14₹
10₹ = 0.66₹
20₹ = 0.94₹
50₹ = 1.63₹
100₹ = 1.20₹
500₹ = 2.45₹
1,000₹ = 2.67₹
2,000₹ = फिलहाल कुछ पता नही.
31. रूपया, डाॅलर के मुकाबले बेशक कमजोर हैं लेकिन फिर भी कुछ देश ऐसे हैं, जिनकी करंसी के आगे रूपया काफी बड़ा हैं आप कम पैसों में इन देशों में घूमने का लुत्फ उठा सकते हैं.नेपाल (1₹ = 1.60 नेपाली रुपया)
आइसलैंड (1₹ = 1.94 क्रोन)
श्रीलंका (1₹ = 2.10 श्रीलंकाई रुपया)
हंगरी (1₹ = 4.27 फोरिंट)
कंबोडिया (1₹ = 62.34 रियाल)
पराग्‍वे (1₹ = 84.73 गुआरनी)
इंडोनेशिया (1₹ = 222.58 इंडोनेशियन रूपैया)
बेलारूस (1₹ = 267.97 बेलारूसी रुबल)
वियतनाम (1₹ = 340.39 वियतनामी डॉन्‍ग).
ABHISHEK YADAV UTTAAM
JAI MATA DEE.

आप इस पोस्ट से संतुष्ट हुए या नही ? आपने भारतीय रुपयें के बारे में इतनी Detail में आज तक नही पढ़ा होगा.. आपको ये पोस्ट कैसी लगी कमेंट में जरूर बताएँ
Love u aallllll.7068094926 whatsapp no.

कैंसर का अचूक उपाय।


कैंसर किे मरीजों पर 25 वर्षों के शोध के बाद केलीफोर्निया यूनिवर्सिटी के मेडिकल फिजिक्स एवं साइकोलॉजी के सीनियर प्रोफेसर डॉ. हर्डिन बी जॉन्स का कहना है कि कैंसर के इलाज के तौर पर प्रयोग की जाने वाली कीमोथैरेपी कैंसर पीड़ित मरीज को दर्दनाक मौत की तरह ले जा सकती है।

अंगूर के बीजों का सत्व-   

हाल ही में हुए एक शोध में यह बात साबित हुई है कि अंगूर के बीजों का सत्व या अर्क ल्यूकेमिया और कैंसर के अन्य प्रकारों को बहुत ही सकारात्मक ढंग से ठीक करने में बेहद मददगार साबित होता है।  

शोध में यह साबित हो चुका है कि अंगूर के बीज सिर्फ 48 घंटे में हर तरह के कैंसर को 76 प्रतिशत तक विकीर्ण करने में सक्षम है। अमेरिकन एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित एक कैसर रिसर्च के अनुसार अगूर के बीज में पाया जाने वाला जेएनके प्रोटीन, कैंसर कोशिकाओं की विकीर्णों को नियंत्रित करने का काम करता है।

 

तो अब अच्छी सेहत के लिए सिर्फ अंगूर का ही सेवन न करें बल्कि इसके चमत्कारिक बीजों से भी दोस्ती करें। कैंसर के इलाज के तौर पर अंगूर के बीज काफी कारगर घरेलु उपाय है।

रूबर्ब (rhubarb) का पौधा-             

रूबर्ब पौधा जिसे रेवतचीनी और रेवन्दचीनी के नाम से भी जाना जाता है. यह पौधा आयुर्वेदिक दवाइयों में प्रयोग किया जाता है. इस पौधे की पत्तियां ज़हरीली होती हैं लेकिन इसके डंठल दवा के रूप में प्रयोग किये जाते हैं.

हालिया हुए यूएस में एक शोध के अनुसार, रूबर्ब पौधे की डंठलों को कैंसर के इलाज के लिए प्रयोग में लाया जायेगा. इस शोध में हैरानी भरे परिणाम सामने आए हैं.

विज्ञानिकों द्वारा इस पौधे से कैंसर विरोधी दावा साल भर में बना लेने का दावा किया है. इस पौधे की डंठलों में एक ख़ास ऑरेंज पिगमेंट पाया जाता है जो कैंसर के सेल्स को 48 घंटे के अन्दर ही खत्म करने की ताकत रखता है.

शोध में इस डंठल का प्रयोग के जरिए दो ही दिनों में लयूकैमिया के आधे से ज्यादा सेल्स को यह पौधा नष्ट कर चुका था.

जॉर्जिया की विनशिप कैंसर इंस्टीट्यूट और एमोरी यूनिवर्सिटी द्वारा 2000 कॉम्पोनेन्ट के साथ इसका परिक्षण किया गया. जिसमें विज्ञानिकों ने पारीटिन पाया. जो एंटी-कैंसर ड्रग के रूप में जाना जाता है.

शोध में चूहों पर 11 दिनों पारीटिन का प्रयोग कर पाया की यह फेफड़ों के कैंसर में कारगर है. इसके साथ ही यह ब्रेन और गर्दन के ट्यूमर को भी ख़त्म कर सकता है.

शोध टीम का कहना है कि इस पौधे जिसे एक प्रकार का फल भी कहा जाता है के आधार पर कैंसर को ख़त्म करने के लिए नई दवाओं को बनाने में सहयोग मिलेगा. इसके परिणाम कीमोथेरेपी की तरह आने वाले सालों में इजात कर लिए जाएंगे.

विशेषज्ञों का कहना है कि पारीटिन का प्रयोग फफूंदी रोधक के रूप में किया जा चुका है लेकिन दवाओं के रूप में इसका प्रयोग इस अध्ययन के बाद किया जायेगा.

शोध में जुड़े प्रोफेसर चेन का कहना है कि कैंसर के 6PGD स्तर को एक्टिव करने के लिए रूबर्ब का प्रयोग किया जाना, कैंसर को खत्म करने के लिए जरुरी है. इसके प्रयोग से कैंसर 6PGD स्तर तेज़ी से बढ़ेगा जिससे कैंसर सेल्स जल्दी ही नष्ट हो जाएंगे.

यह शोध जर्नल नेचर सेल बायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है

 

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