चमार जाती सनातन धर्म रक्षक सबसे ऊंची जाति है , जानिए कैसे

By ABHISHEK yAdAv UtTaM.jai mata dee.
My whatsapp no.7068094926.....
आप जानकार हैरान हो सकते हैं कि भारत में जिस जाति चमार बोला जाता है वो असल में चंवरवंश की क्षत्रिय जाति है। यह खुलासा डॉक्टर विजय सोनकर की पुस्तक – “हिन्दू चर्ममारी जाति:एक स्वर्णिम गौरवशाली राजवंशीय इतिहास” में हुआ है। इस किताब में डॉ सोनकर ने लिखा है कि – “विदेशी विद्वान् कर्नल टॉड द्वारा पुस्तक “राजस्थान का इतिहास” में चंवरवंश के बारे में बहुत विस्तार में लिखा गया है।”
डॉ सोनकर बताते हैं कि – “इतना ही नहीं बल्कि महाभारत के अनुशासन पर्व में भी इस वंश का उल्लेख है। हिन्दू वर्ण व्यवस्था को क्रूर और भेद-भाव बनाने वाले हिन्दू नहीं, बल्कि विदेशी आक्रमणकारी थे!”
जब भारत पर तुर्कियों का राज था, उस सदी में इस वंश का शासन भारत के पश्चिमी भाग में था, उस समय उनके प्रतापी राजा थे चंवर सेन। इस राज परिवार के वैवाहिक सम्बन्ध बप्पा रावल के वंश के साथ थे। राणा सांगा और उनकी पत्नी झाली रानी ने संत रैदासजी जो कि चंवरवंश के थे, उनको मेवाड़ का राजगुरु बनाया
था। वे चित्तोड़ के किले में बाकायदा प्रार्थना करते थे। इस तरह आज के समाज में जिन्हें चमार बुलाया जाता है, उनका इतिहास में कहीं भी उल्लेख नहीं है।
डॉक्टर विजय सोनकर के अनुसार प्राचीनकाल में ना तो यह शब्द पाया जाता है, ना हीं इस नाम की कोई जाति है। ऋग्वेद में बुनकरों का उल्लेख तो है, पर वहाँ भी उन्हें चमार नहीं बल्कि तुतुवाय के नाम से सम्बोधित किया गया है। सोनकर कहते हैं कि चमार शब्द का उपयोग पहली बार सिकंदर लोदी ने किया था।
ये भी पढ़े :   सन 1976 तक भारत एक हिन्दू राष्ट्र था , जानिये फिर कैसे बन गया धर्म निरपेक्ष । जरूर पढ़ें share करें ।
ये वो समय था जब हिन्दू संत रविदास का चमत्कार बढ़ने लगा था अत: मुगल शासन घबरा गया। सिकंदर लोदी ने सदना कसाई को संत रविदास को मुसलमान बनाने के लिए भेजा। वह जानता था कि यदि संत रविदास इस्लाम स्वीकार लेते हैं तो भारत में बहुत बड़ी संख्या में हिन्दू इस्लाम स्वीकार कर लेंगे।
लेकिन उसकी सोच धरी की धरी रह गई, स्वयं सदना कसाई शास्त्रार्थ में पराजित हो कोई उत्तर न दे सके और संत रविदास की भक्ति से प्रभावित होकर उनका भक्त यानी वैष्णव (हिन्दू) हो गए। उनका नाम सदना कसाई से रामदास हो गया। दोनों संत मिलकर हिन्दू धर्म के प्रचार में लग गए। जिसके फलस्वरूप सिकंदर लोदी ने क्रोधित होकर इनके अनुयायियों को अपमानित करने के लिए पहली बार “चमार“ शब्द का उपयोग किया था।
उन्होंने संत रविदास को कारावास में डाल दिया। उनसे कारावास में खाल खिचवाने, खाल-चमड़ा पीटने, जूती बनाने इत्यादि काम जबरदस्ती कराया गया। उन्हें मुसलमान बनाने के लिए बहुत शारीरिक कष्ट दिए गए लेकिन उन्होंने कहा :-
”वेद धर्म सबसे बड़ा, अनुपम सच्चा ज्ञान, फिर मै क्यों छोडू इसे, पढ़ लू झूठ कुरान। वेद धर्म छोडू नहीं, कोसिस करो हज़ार, तिल-तिल काटो चाहि, गोदो अंग कटार॥”
यातनायें सहने के पश्चात् भी वे अपने वैदिक धर्म पर अडिग रहे और अपने अनुयायियों को विधर्मी होने से बचा लिया। ऐसे थे हमारे महान संत रविदास जिन्होंने धर्म, देश रक्षार्थ सारा जीवन लगा दिया। शीघ्र ही चंवरवंश के वीरों ने दिल्ली को घेर लिया और सिकन्दर लोदी को संत को छोड़ना ही पड़ा।
ये भी पढ़े :   भारत के वे महान राजा जिन्हें धरती पर कोई चुनौती देने वाला ना था और वो चक्रवर्ती सम्राट कहलाये
संत रविदास की मृत्यु चैत्र शुक्ल चतुर्दशी विक्रम संवत १५८४ रविवार के दिन चित्तौड़ में हुई। वे आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी स्मृति आज भी हमें उनके आदर्शो पर चलने हेतु प्रेरित करती है, आज भी उनका जीवन हमारे समाज के लिए प्रासंगिक है।
हमें यह ध्यान रखना होगा की आज के छह सौ वर्ष पहले चमार जाती थी ही नहीं। इतने ज़ुल्म सहने के बाद भी इस वंश के हिन्दुओं ने धर्म और राष्ट्र हित को नहीं त्यागा, गलती हमारे भारतीय समाज में है। आज भारतीय अपने से ज्यादा भरोसा वामपंथियों और अंग्रेजों के लेखन पर करते हैं, उनके कहे झूठ के चलते बस आपस में ही लड़ते रहते हैं। हिन्दू समाज को ऐसे सलीमशाही जूतियाँ चाटने वाले इतिहासकारों और इनके द्वारा फैलाए गये वैमनस्य से अवगत होकर ऊपर उठाना चाहिए l
सत्य तो यह है कि आज हिन्दू समाज अगर कायम है, तो उसमें बहुत बड़ा बलिदान इस वंश के वीरों का है। जिन्होंने नीचे काम करना स्वीकार किया, पर इस्लाम नहीं अपनाया। उस समय या तो आप इस्लाम को अपना सकते थे, या मौत को गले लगा सकते था, अपने जनपद/प्रदेश से भाग सकते थे, या फिर आप वो काम करने को हामी भर सकते थे जो अन्य लोग नहीं करना चाहते थे।
चंवर वंश के इन वीरों ने पद्दलित होना स्वीकार किया, धर्म बचाने हेतु सुवर पलना स्वीकार किया, लेकिन विधर्मी होना स्वीकार नहीं किया आज भी यह समाज हिन्दू धर्म का आधार बनकर खड़ा है।
नोट :- हिन्दू समाज में छुआ-छूत, भेद-भाव, ऊँच-नीच का भाव था ही नहीं, ये सब कुरीतियाँ मुगल कालीन, अंग्रेज कालीन और भाड़े के वामपंथी व् हिन्दू विरोधी इतिहासकारों की देन है।

जानिए मकर सक्रान्ति का वैज्ञानिक महत्व ,क्योंकि स्नान नहीं विज्ञान है मकर सक्रान्ति। ABHISHEK YADAV UTTAM. whatsapp 7068094926.

Jai mata dee.जानिए मकर सक्रान्ति का वैज्ञानिक महत्व ,क्योंकि स्नान नहीं विज्ञान है मकर सक्रान्ति। ABHISHEK YADAV UTTAM. whatsapp 7068094926.
मकर सक्रान्ति का पर्व आया और चला गया। नदी में एक डुबकी लगाई; खिचड़ी खाई और आगे बढ़ गये। क्या हमारे त्यौहारों का इतना ही मायने है अथवा इनका भी कोई विज्ञान है? मकर सक्रान्ति सूर्य पर्व है या नदी पर्व? हर सूर्य पर्व में नदी स्नान की बाध्यता है और हर नदी पर्व में सूर्य को अर्घ्य की। क्यों? कुल मिलाकर माघ का महीना, सूर्य, मकर राशि, संगम का तट, नदी का स्नान और खिचड़ी खाना-ये पांच मुख्य बातें मकर सक्रान्ति की तिथि से जुड़ी हैं।

इनके विज्ञान उल्लेख हमारे उन पुरातन ग्रंथों में दर्ज है, जिन्हें हमने अंधकार के पोथे कहकर खोलने से ही परहेज मान लिया है। क्या है इनका विज्ञान? मकर सक्रान्ति माघ के महीने में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व है। आइये! जानते हैं कि क्या है सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का मतलब? सभी जानते हैं कि इस ब्रह्मांड में दो तरह के पिण्ड हैं। ऑक्सीजन प्रधान और कार्बन डाइऑक्साइड प्रधान। ऑक्सीजन प्रधान पिण्ड

‘जीवनवर्धक’ होते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड प्रधान ‘जीवनसंहारक’। बृहस्पति ग्रह जीवनवर्धक तत्वों का सर्वश्रेष्ठ स्रोत है। शुक्र सौम्य होने के बावजूद आसुरी है। रवि यानी सूर्य का द्वादशांश यानी बारहवां हिस्सा छोड़ दें, तो शेष भाग जीवनवर्धक है। सूर्य पर दिखता काला धब्बे वाला भाग मात्र ही जीवन सहांरक प्रभाव डालता है। वह भी उस क्षेत्र में, जहां उस क्षेत्र से निकले विकिरण पहुंचते हैं।

अलग-अलग समय में पृथ्वी के अलग-अलग भाग इस नकारात्मक प्रभाव में आते हैं। अमावस्या के निकट काल में जब चंद्रमा क्षीण हो जाता है, तब संहारक प्रभाव डालता है। शेष दिनों में, खासकर पूर्णिमा के दिनों में चंद्रमा जीवनवर्धक होता है। इसीलिए चंद्रमा और सूर्य के हिसाब से गणना के दो अलग-अलग विधान हैं। मंगल रक्त और बुद्धि… दोनों पर प्रभाव डालता है। बुध उभयपिण्ड है।

जिस ग्रह का प्रभाव अधिक होता है, बुध उसके अनुकूल प्रभाव डालता है। इसीलिए इसे व्यापारी ग्रह कहा गया है। व्यापारी स्वाभाव वाला। छाया ग्रह राहु-केतु तो सदैव ही जीवनसंहारक यानी कार्बन डाइऑक्साइड से भरे पिण्ड हैं। इनसे जीवन की अपेक्षा करना बेकार है। जब-जब जीवनवर्धक ग्रह संहारक ग्रहों के मार्ग में अवरोध पैदा करते हैं। संहारक ग्रहों की राशि में प्रवेश कर उनके जीवनसंहारक तत्वों को हम तक आने से रोकने का प्रयास करते हैं; ऐसे संयोगों को हमारे शास्त्रों ने शुभ तिथियां माना। ऐसा ही एक संयोग मकर सक्रान्ति है।

शनि जीवनसंहारक शक्तियों का पुरोधा है। अलग-अलग ग्रह अलग-अलग राशि के स्वामी होते है। शनि मकर राशि का स्वामी ग्रह है। जिस क्षण से जीवनवर्धक सूर्य, जीवनसहांरक शनि की राशि में प्रवेश कर उसके नकरात्मक प्रभाव को रोकता है। वह पल ही मकर संक्रान्ति का शुभ संदेश लेकर आता है। तीसरा वैज्ञानिक संदर्भ संगम का तट, नदी का स्नान और सूर्य अर्घ्य के रिश्ते को लेकर है। हम जानते हैं कि नदियां सिर्फ पानी नहीं होती। हर नदी की अपनी एक अलग जैविकी होती है।…एक अलग पारिस्थितिकी।

जहां दो अलग-अलग मार्ग से आने वाले जीवंत प्रवाह स्वाभाविक तौर पर मिलते हैं, उस स्थान का हम संगम व प्रयाग के नाम से पुकारते हैं। प्रयाग पर प्रवाहों के एक-दूसरे में समा जाने की क्रिया से नूतन उर्जा उत्पन्न होती है। लहरें उछाल मारती हैं। जिसका नतीजा ऑक्सीकरण की रासायनिक क्रिया के रूप में होता है। ऑक्सीकरण की क्रिया में पानी ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाती है। यह प्रक्रिया बी.ओ.डी. यानी बायो ऑक्सीजन डिमांड को कम करती है। जाहिर है कि प्रयाग स्थल पर पानी की गुणवत्ता व मात्रा दोनों ही बेहतर होती है। अतः हमारे पुरातन ग्रंथ प्रयाग में स्नान को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं।

मकर सक्रान्ति के दिन लाखों लोगों द्वारा एक साथ स्नान से नदियों में होने वाले वाष्पन का वैज्ञानिक महत्व है। इस दिन से भारत में सूर्य के प्रभाव में अधिकता आनी शुरू होती है। सूर्य के प्रभाव में अधिकता का प्रारंभ और ठीक उसी समय नदियों में एक साथ वाष्पन की क्रिया एक-दूसरे के सहयोगी हैं। दोनों मौसम के तापमान को प्रभावित करते हैं। इससे ठीक एक दिन पहले एक साथ-समय पूरे पंजाब में लोहड़ी मनाते हैं। इन क्रियाओं के आपसी तालमेल का प्रभाव यह होता है कि उत्तर भारत के मैदानों में मकर सक्रान्ति से ठंड उतरनी शुरू हो जाती है। ध्यान देने की बात है कि इस ठंड की विदाई भी हम होली पर पूरे उत्तर भारत में एक खास मुहुर्त पर व्यापक अग्नि प्रज्वलन से करते हैं।

मकर सक्रान्ति को खिचड़ी भी कहते हैं। इस दिन खिचड़ी आराध्य को चढ़ाने, खिलाने व खाने का प्रावधान है। मकर सक्रान्ति से मौसम बदलता है। जब भी मौसम बदले, मन व स्वास्थ्य की दृष्टि से खानपान में

ताजमहल : ताले तो खोलो, सामने आ जायेगी असलियात।

ताजमहल : ताले तो खोलो, सामने आ जायेगी असलियात।

ताजमहल शाहजहाँ द्वारा बनाया गया मकबरा है अथवा प्राचीन हिन्दू मंदिर मुझे नहीं पता. शंकराचार्य के पूर्व भी कई लोग ताजमहल के मंदिर होने का दावा करते रहें है. मै सिर्फ इतना चाहता हूँ कि सत्य सामने आये.

Archaeological Survey of India (ASI) लगभग 285 वर्ष पुरानी संस्था है,  इसका गठन अंग्रेजों ने 1731 में किया. पहले इसका नाम Indian Archaeological Survey था. इसमें Alexander Cunningham जैसे सैन्य अधिकारियों को इसका डायरेक्टर जनरल बनाया जाता था जिनकी इतिहास या पुरातत्व की कोई समझ नहीं होती थी.

तब ASI का मुख्य कार्य महलों मंदिरों-किलों की खुदाई कर बहुमूल्य खजाने को लन्दन पहुचाना था. Alexander Cunningham जैसे सैन्य अधिकारियों ने भारतीय इतिहास को तोड़ कर लिखा, आज उसी को प्रामाणिक माना जाता है.

Cunningham ने कब्र इंतजामिया को ताजमहल से बाहर किया और सात मंजिला ताजमहल के मुख्य मकबरे को छोड़ कर शेष 500 कमरों में ताले लगवा दिए, जो आज भी लगे हुए हैं. (देखे कनिघम की डायरी 1870).

Secret bricked door that hides more evidenceSecret walled door that leads to other rooms

जब 1905 में अंग्रेजो ने फूट डालो – राज करो नीति के अंतर्गत बंगाल का सांप्रदायिक आधार पर विभाजन किया और वहां हिन्दू-मुस्लिम दंगे होने लगे, तब सर जॉन मार्शल ने वायसराय को पत्र लिखा – बंगाल की तरह अवध का विभाजन करने की जरूरत नहीं केवल ताजमहल के बंद कमरों को खोलने की जरूरत है और अवध में भी बंगाल जैसे हालत हो जायेंगे. (see- Awadh in revolt by R Mukherjee)

वायसराय लार्ड कर्जन ने 1902 में सर जॉन मार्शल को ASI का डायरेक्टर जनरल बनाया, दोनों ही घोर साम्राज्यवादी थे. भारत की सभी ऐतिहासिक इमारतों को ASI के अधीन कर दिया गया (जो कि आज भी है). दुनिया के अन्य देशों में Archaeological Survey का कार्य सर्वे तथा खुदाई करना है न कि इतिहास की व्याख्या करना और टूरिज्म चलाना.

1947 में एक अंग्रेज इतिहासकार स्टीफन नैप भारत आया, बाद में वह हिन्दू हो गया. एक इतिहासकार के रूप में उसने ताजमहल का निरीक्षण किया, उसका कहना था कि ताजमहल के बंद कमरों में हिन्दू मूर्तियां है जो कि शाहजहाँ के समय से इन कमरों में भरी हैं.

स्टीफन नैप ने ताजमहल की दुर्लभ तस्वीरें ली थी जो आज नेट पर उपलब्ध हैं.जिन्हें इस लिंक पर देखा जा सकता है – http://stephen-knapp.com/was_the_taj_mahal_a_vedic_temple.htm

Interior of one of the 22 secret rooms

एक RTI के उत्तर में ASI ने जानकारी दी की ताजमहल में लगभग 500 कमरे बंद हैं,  इन्हें कब खोला गया था इसका पता नहीं, इन कमरों में क्या है इसका पता नहीं.

2004 में एक संस्थान द्वारा इलाहबाद हाई कोर्ट में भारत सरकार के टूरिज्म सचिव तथा डायरेक्टर जनरल ASI के विरूद्ध Civil Misc. Writ Petition No. 3618 of 2004 Under Article 226 of constitution of India पिटीशन लगाई गयी.

इसमें कहा गया कि ASI को निर्देश दिया जाए कि वह बंद कमरे खोले. इस पर सरकार ने जवाब दिया कि ऐसा करना लोक हित में ठीक नहीं होगा. मामला अभी कोर्ट में है.

2010 में बीबीसी की टीम ने ताजमहल पर एक डॉक्यूमेंट्री बनायी और ताजमहल के मंदिर होने को ही प्रमाणिक माना. इसे बीबीसी ने कई बार टीवी पर दिखाया. जिसका लिंक है – http://www.bbc.co.uk/dna/place-london/plain/A5220

जो भी हो सरकार ताजमहल के सभी बंद कमरों का ताला खोल दे असलियत सामने आ जाएगी...

जानें, प्राचीन काल में भारत कितना विशाल था, कहां तक हमारी संस्कृति थी

By Abhishek yadav uttam .भारत बहुत प्राचीन देश है। विविधताओं से भरे इस देश में आज बहुत से धर्म, संस्कृतियां और लोग हैं। आज हम जैसा भारत देखते हैं अतीत में भारत ऐसा नहीं था भारत बहुत विशाल देश हुआ करता था। ईरान से इंडोनेशिया तक सारा हिन्दुस्थान ही था। समय के साथ-साथ भारत के टुकड़े होते चले गये जिससे भारत की संस्कृति का अलग-अलग जगहों में बटवारां हो गया। हम आपको उन देशों को नाम बतायेंगे जो कभी भारत के हिस्से थे।

ईरान – ईरान में आर्य संस्कृति का उद्भव 2000 ई. पू. उस वक्त हुआ जब ब्लूचिस्तान के मार्ग से आर्य ईरान पहुंचे और अपनी सभ्यता व संस्कृति का प्रचार वहां किया। उन्हीं के नाम पर इस देश का नाम आर्याना पड़ा। 644 ई. में अरबों ने ईरान पर आक्रमण कर उसे जीत लिया।

कम्बोडिया – प्रथम शताब्दी में कौंडिन्य नामक एक ब्राह्मण ने हिन्दचीन में हिन्दू राज्य की स्थापना की।

वियतनाम – वियतनाम का पुराना नाम चम्पा था। दूसरी शताब्दी में स्थापित चम्पा भारतीय संस्कृति का प्रमुख केंद्र था। यहां के चम लोगों ने भारतीय धर्म, भाषा, सभ्यता ग्रहण की थी। 1825 में चम्पा के महान हिन्दू राज्य का अन्त हुआ।

मलेशिया – प्रथम शताब्दी में साहसी भारतीयों ने मलेशिया पहुंचकर वहां के निवासियों को भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति से परिचित करवाया। कालान्तर में मलेशिया में शैव, वैष्णव तथा बौद्ध धर्म का प्रचलन हो गया। 1948 में अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हो यह सम्प्रभुता सम्पन्न राज्य बना।

इण्डोनेशिया – इण्डोनिशिया किसी समय में भारत का एक सम्पन्न राज्य था। आज इण्डोनेशिया में बाली द्वीप को छोड़कर शेष सभी द्वीपों पर मुसलमान बहुसंख्यक हैं। फिर भी हिन्दू देवी-देवताओं से यहां का जनमानस आज भी परंपराओं के माधयम से जुड़ा है।

फिलीपींस – फिलीपींस में किसी समय भारतीय संस्कृति का पूर्ण प्रभाव था पर 15 वीं शताब्दी में मुसलमानों ने आक्रमण कर वहां आधिपत्य जमा लिया। आज भी फिलीपींस में कुछ हिन्दू रीति-रिवाज प्रचलित हैं।

अफगानिस्तान – अफगानिस्तान 350 इ.पू. तक भारत का एक अंग था। सातवीं शताब्दी में इस्लाम के आगमन के बाद अफगानिस्तान धीरे-धीरे राजनीतिक और बाद में सांस्कृतिक रूप से भारत से अलग हो गया।

नेपाल – विश्व का एक मात्र हिन्दू राज्य है, जिसका एकीकरण गोरखा राजा ने 1769 ई. में किया था। पूर्व में यह प्राय: भारतीय राज्यों का ही अंग रहा।

भूटान – प्राचीन काल में भूटान भद्र देश के नाम से जाना जाता था। 8 अगस्त 1949 में भारत-भूटान संधि हुई जिससे स्वतंत्र प्रभुता सम्पन्न भूटान की पहचान बनी।

तिब्बत – तिब्बत का उल्लेख हमारे ग्रन्थों में त्रिविष्टप के नाम से आता है। यहां बौद्ध धर्म का प्रचार चौथी शताब्दी में शुरू हुआ। तिब्बत प्राचीन भारत के सांस्कृतिक प्रभाव क्षेत्र में था। भारतीय शासकों की अदूरदर्शिता के कारण चीन ने 1957 में तिब्बत पर कब्जा कर लिया।

श्रीलंका – श्रीलंका का प्राचीन नाम ताम्रपर्णी था। श्रीलंका भारत का प्रमुख अंग था। 1505 में पुर्तगाली, 1606 में डच और 1795 में अंग्रेजों ने लंका पर अधिकार किया। 1935 ई. में अंग्रेजों ने लंका को भारत से अलग कर दिया।

म्यांमार (बर्मा) – अराकान की अनुश्रुतियों के अनुसार यहां का प्रथम राजा वाराणसी का एक राजकुमार था। 1852 में अंग्रेजों का बर्मा पर अधिकार हो गया। 1937 में भारत से इसे अलग कर दिया गया।

पाकिस्तान – 15 अगस्त, 1947 के पहले पाकिस्तान भारत का एक अंग था। हालांकि बटवारे के बाद पाकिस्तान में बहुत से हिन्दू मंदिर तोड़ दिये गये हैं, जो बचे भी हैं उनकी हालत बहुत ही जर्जर है। 

बांग्लादेश – बांग्लादेश भी 15 अगस्त 1947 के पहले भारत का अंग था। देश विभाजन के बाद पूर्वी पाकिस्तान के रूप में यह भारत से अलग हो गया। 1971 में यह पाकिस्तान से भी अलग हो गया।

प्राचीन भारत बहुत संपन्न था, दूर – दूर से लोग हमारी संस्कृति सीखने आया करते थे। नालंदा और तक्षशिला जैसे ज्ञान के भंडार हमारे देश में ही थे। जब दुनिया अपना नाम तक नहीं जानती थी, हमारे ऋषि – मुनि बहुत से गहरे अनुसंधान किया करते थे। मेरा सभी भारतवासियों से निवेदन है कि थोड़ा अपने जीवन का कीमती समय निकालकर अपने भारतके इतिहास और धरोवरों को बारे में भी पढ़ना चाहिए। 

दोस्तों यदि आपको मेरा यह कार्य अच्छा लगा हो तो शेयर जरूर करें ताकि और लोग भी इसे जान सकें।।
Jai hind vande matram.

ISRO के बारे में 20 रोचक तथ्य।🌹🌷🌺🌻

इसरो के बारे में रोचक तथ्य
Abhishek yadav uttam
इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) ने जो किया वो काबिल-ए-तारीफ है। इसरो ने वो कर दिखाया जो बहुत देशों ने सोचा होगा कि भारत जैसे विकासशील देश के लिए असंभव है। कुछ समय पहले हमने NASA की पोस्ट डाली थी तो उसी समय से लोगो के कमेंट आ रहे थे कि ISRO के बारे में भी बताएँ। आज हम आपको भारत की अंतरिक्ष स्पेस एजेंसी ISRO के बारे में बहुत विस्तार से बताने वाले है…

1. ISRO की Full From है “Indian Space Research Organisation”. इसका हेडक्वार्टर बेंगलूर में है यह अंतरिक्ष विभाग द्वारा कंट्रोल की जाती है जो सीधे भारत के प्रधानमंत्री को रिपोर्ट भेजता है। भारत में इसरो के कुल 13 सेंटर है।

2. ISRO की स्थापना डाॅ. विक्रम साराभाई ने सन् 1969 में स्वतंत्रता दिवस के दिन की थी। इन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक भी माना जाता है।

3. अमेरिका, रूसफ्रांसजापानचीन समेत भारत दुनिया के उन छः देशों में शामिल है जो अपनी भूमि पर सैटेलाइट बनाने और उसे लाॅन्च करने की क्षमता रखते है।

4. भारत के लिए 86 satellites लांच करने के अलावा ISRO ने अभी तक 21 अलग-अलग देशों के लिए भी 79 satellites लांच किए है।

5. इसरो का बजट केंद्र सरकार के कुल खर्च का 0.34% और GDP का 0.08% है। यह कोई ज्यादा खर्च नही है।

6. ISRO का पिछले 40 साल का खर्च NASA के एक साल के खर्च का आधा है। वहीं नासा की इंटरनेट स्पीड 91GBps है और इसरो की इंटरनेट स्पीड 2GBps है।

7. पाकिस्तान की भी एक स्पेस एजेंसी है जिसका नाम है SUPARCO. यह 1961 में बनी थी जबकि ISRO 1969 में। ISRO आज तक अपने लिए 86 satellites लांच कर चुका है बल्कि SUPARCO सिर्फ 2 वो भी विदेशी देशों की मदद से।

8. भारत के पहले राॅकेट के लांच के समय भारतीय वैज्ञानिक हर रोज तिरूवंतपूरम से बसों में आते थे और रेलवे स्टेशन से दोपहर का खाना खाते थे। पहले राॅकेट के कुछ हिस्सों को साइकिल पर ले जाया गया था।

9. आर्यभट्ट, इसरो का पहला उपग्रह जो 19 अप्रैल 1975 को रूस की सहायता से लांच किया गया था।

10. 1981 में APPLE Satellite को संसाधनों की कमी की वजह से बैलगाड़ी पर ले जाया गया था।

11. SLV-3 भारत द्वारा लांच किया गया पहला स्वदेशी उपग्रह था और इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर डाॅ. ऐ. पी. जे. अब्दुल कलाम थे।

12. ANTRIX, यह इसरो की कमर्शियल डिविजन है जो हमारी स्पेस तकनीक को दूसरे देशों तक पहुंचाती है। ANTRIX के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर देश के दो बड़े उद्योगपति रतन टाटा और जमशेद गोदरेज है।

13. किसी और संगठन की अपेक्षा इसरो में सबसे ज्यादा single scientist है इन्होनें कभी शादी नही की और पूरा जीवन संगठन को समर्पित कर दिया।

14. 2008-09 में इसरो ने चंद्रयान-1 लाॅन्च किया था जिसका बजट 350 करोड़ रूपए यानि नासा से 8-9 गुना कम था। इसी ने चाँद पर पानी की खोज की थी।

15. भारत (इसरो) अपने पहले प्रयास में मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला एकमात्र देश है। अमेरिका 5 बार सेवियत संघ 8 बार और चीन, रूस भी अपने पहले प्रयास में असफल रहे थे।

16. ISRO का मंगल मिशन आज तक का सबसे सस्ता है सिर्फ 450 करोड़ रूपए अर्थात 12 रूपए प्रति किलोमीटर, जो एक ऑटो के किराए के बराबर है। हमारा मंगल मिशन कई हाॅलीवुड फिल्मों से भी सस्ता है।

17. इसरो ने गूगल अर्थ का देशी वर्जन भुवन बनाया है यह वेब आधारित 3D सेटेलाइट इमेजरी टूल है।

18. जब बहुत से देश navigational purpose के लिए अमेरिका के GPS पर निर्भर थे तब ISRO सफलतापूर्वक अपने navigational satellites, IRNSS लांच कर चुका था।

19. आप चाहे तो इसरो से सैटेलाइट डाटा भी खरीद सकते है। HD चित्रों आदि की जरूरत पड़ने पर इस अवसर का लाभ उठा सकते है।

20. क्या आपको लगता है कि ISRO छोटी सी संस्था है ? लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इसरो ने पिछले साल 14 अरब रूपए की कमाई की थी।
Jai hind .........

🌷🌼 राजीव दीक्षित जी का परिचय🌹🌷

 

राजीव दीक्षित जी का परिचय
👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍🌹🌹🌹🌷
Jai hind vande matram.Abhishek yadav
Uttam

दोस्तों राजीव दीक्षित जी के परिचय मे जितनी बातें कही जाए वो कम है ! कुछ चंद शब्दो मे उनके परिचय को बयान कर पाना असंभव है ! ये बात वो लोग बहुत अच्छे से समझ सकते है जिन्होने राजीव दीक्षित जी को गहराई से सुना और समझा है !! फिर भी हमने कुछ प्रयास कर उनके परिचय को कुछ शब्दो का रूप देने का प्रयत्न किया है ! परिचय शुरू करने से पहले हम आपको ये बात स्पष्ट करना चाहते हैं कि जितना परिचय राजीव भाई का हम आपको बताने का प्रयत्न करेंगे वो उनके जीवन मे किये गये कार्यो का मात्र 1% से भी कम ही होगा ! उनको पूर्ण रूप से जानना है तो आपको उनके व्याख्यानों को सुनना पडेगा !!

राजीव दीक्षित जी का जन्म 30 नवम्बर 1967 को उत्तर प्रदेश राज्य के अलीगढ़ जनपद की अतरौली तहसील के नाह गाँव में पिता राधेश्याम दीक्षित एवं माता मिथिलेश कुमारी के यहाँ हुआ था। उन्होने प्रारम्भिक और माध्यमिक शिक्षा फिरोजाबाद जिले के एक स्कूल से प्राप्त की !! इसके उपरान्त उन्होने इलाहाबाद शहर के जे.के इंस्टीटयूट से बी. टेक. और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Technology से एम. टेक. की उपाधि प्राप्त की। उसके बाद राजीव भाई ने कुछ समय भारत CSIR (Council of Scientific and Industrial Research) मे कार्य किया। तत्पश्चात उन्होंने किसी Research Project मे भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के साथ भी कार्य किया !!

श्री राजीव जी इलाहाबाद के जे.के इंस्टीटयूट से बी.टेक. की शिक्षा लेते समय ही ‘‘आजादी बचाओ आंदोलन’’ से जुड गए जिसके संस्थापक श्री बनवारी लाल शर्मा जी थे जो कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ही गणित विभाग के मुख्य शिक्षक थे ! इसी संस्था में राजीव भाई प्रवक्ता के पद पर थे, संस्था में श्री अभय प्रताप, संत समीर, केशर जी, राम धीरज जी, मनोज त्यागी जी तथा योगेश कुमार मिश्रा जी शोधकर्ता अपने अपने विषयों पर शोध कार्य किया करते थे जो कि संस्था द्वारा प्रकाशित ‘‘नई आजादी उद्घोष’’ नमक मासिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ करते थे और राजीव भाई के ओजस्वी वाणी से देश के कोने-कोने में व्याख्यानों की एक विशाल श्रंखला-बद्ध वैचारिक क्रान्ति आने लगी राजीव जी ने अपने प्रवक्ता पद के दायित्वों को एक सच्चे राष्ट्रभक्त के रूप में निभाया जो कि अतुल्य है ……

बचपन से ही राजीव भाई में देश की समस्याओ को जानने की गहरी रुची थी ! प्रति मास 800 रूपये का खर्च उनका मैगजीनों, सभी प्रकार के अखबारो को पढने मे हुआ करता था! वे अभी नौवी कक्षा मे ही थे कि उन्होने अपने इतिहास के अध्यापक से एक ऐसा सवाल पूछा जिसका जवाब उस अध्यापक के पास भी नहीं था जैसा कि आप जानते है कि हमको इतिहास की किताबों मे पढाया जाता है कि अंग्रेजो का भारत के राजा से प्रथम युद्ध 1757 मे पलासी के मैदान मे रोबर्ट क्लाइव और बंगाल के नवाब सिराजुद्दोला से हुआ था ! उस युद्ध मे रोबर्ट क्लाइव ने सिराजुद्दोला को हराया था और उसके बाद भारत गुलाम हो गया था !!

राजीव भाई ने अपने इतिहास के अध्यापक से पूछा कि सर मुझे ये बताइए कि प्लासी के युद्ध में अंग्रेजो की तरफ से लड़ने वाले कितने सिपाही थें? तो अध्यापक कहते थे कि मुझको नहीं मालूम, तो राजीव भाई ने पूछा क्यों नहीं मालूम? तो कहते थे कि मुझे किसी ने नहीं पढाया तो मै तुमको कहाँ से पढा दू।

तो राजीव भाई ने उनको बराबर एक ही सवाल पूछा कि सर आप जरा ये बताईये कि बिना सिपाही के कोई युद्ध हो सकता है ?? तो अध्यापक ने कहा नहीं ! तो फिर राजीव भाई ने पूछा फिर हमको ये क्यों नहीं पढाया जाता है कि युद्ध में कितने सिपाही थे अंग्रेजो के पास ? और उसके दूसरी तरफ एक और सवाल राजीव भाई ने पूछा था कि अच्छा ये बताईये कि अंग्रेजो के पास कितने सिपाही थे ये तो हमको नहीं मालुम सिराजुद्दोला जो लड रहा था हिंदुस्तान की तरफ से उनके पास कितने सिपाही थे? तो अध्यापक ने कहा कि वो भी नहीं मालूम। तो खैर इस सवाल का जवाब बहुत बडा और गंभीर है कि आखिर इतना बडा भारत मुठी भर अंग्रेजो का गुलाम कैसे हो गया ?? यहाँ लिखेंगे तो बात बहुत बडी हो जाएगी ! इसका जवाब आपको राजीव भाई के एक व्याख्यान जिसका नाम आजादी का असली इतिहास मे मिल जाएगा।

तो देश की आजादी से जुडे ऐसे सैंकडों-सैंकडों सवाल दिन रात राजीव भाई के दिमाग मे घूमते रहते थे !! इसी बीच उनकी मुलाकात प्रो. धर्मपाल नाम के एक इतिहासकार से हुई जिनकी किताबें अमेरिका मे पढाई जाती है लेकिन भारत मे नहीं !! धर्मपाल जी को राजीव भाई अपना गुरु भी मानते है, उन्होने राजीव भाई के काफी सवालों का जवाब ढूंढने मे बहुत मदद की! उन्होने राजीव भाई को भारत के बारे मे वो दस्तावेज उपलब्ध करवाए जो इंग्लैंड की लाइब्रेरी हाउस आफ कामन्स मे रखे हुए थे जिनमे अंग्रेजो ने पूरा वर्णन किया था कि कैसे उन्होने भारत गुलाम बनाया ! राजीव भाई ने उन सब दस्तावेजो का बहुत अध्यन किया और ये जानकर उनके रोंगटे खडे हो गए कि भारत के लोगो को भारत के बारे मे कितना गलत इतिहास पढाया जा रहा है !! फिर सच्चाई को लोगो के सामने लाने के लिए राजीव भाई गाँव–गाँव, शहर–शहर जाकर व्याख्यान देने लगे ! और साथ-साथ देश की आजादी और देश के अन्य गंभीर समस्याओ का इतिहास और उसका समाधान तलाशने मे लगे रहते !!

इलाहबाद मे पढते हुए उनके एक खास मित्र हुआ करते थे जिनका नाम है योगेश मिश्रा जी उनके पिता जी इलाहबाद हाईकोर्ट मे वकील थे !! तो राजीव भाई और उनके मित्र अक्सर उनसे देश की आजादी से जुडी रहस्यमयी बातों पर वार्तालाप किया करते थे ! तब राजीव भाई को देश की आजादी के विषय मे बहुत ही गंभीर जानकारी प्राप्त हुई ! कि 15 अगस्त 1947 को देश मे कोई आजादी नहीं आई ! बल्कि 14 अगस्त 1947 की रात को अंग्रेज माउंट बेटन और नेहरू के बीच के समझोता हुआ था जिसे सत्ता का हस्तांतरण ( transfer of power agreement) कहते हैं ! इस समझोते के अनुसार अंग्रेज अपनी कुर्सी नेहरू को देकर जाएंगे लेकिन उनके द्वारा भारत को बर्बाद करने के लिए बनाए गये 34735 कानून वैसे ही इस देश मे चलेंगे !! और क्योकि आजादी की लडाई मे पूरे देश का विरोध अँग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ था तो सिर्फ एक ईस्ट इंडिया कंपनी भारत छोड कर जाएगी और उसके साथ जो 126 कंपनिया और भारत को लुटने आए थी वो वैसे की वैसे ही भारत मे व्यापार करेगी ! लूटती रहेगी ! आज उन विदेशी कंपनियो की संख्या बढ कर 6000 को पार कर गई है !! (इस बारे मे और अधिक जानकरी उनके व्याख्यानों मे मिलेगी)

एक बात जो राजीव भाई को हमेशा परेशान करती रहती थी कि आजादी के बाद भी अगर भारत मे अँग्रेजी कानून वैसे के वैसे ही चलेंगे और आजादी के बाद भी विदेशी कंपनियाँ भारत को वैसे ही लूटेंगी जैसे आजादी से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी लूटा करती थी ! आजादी के बाद भी भारत मे वैसे ही गौ हत्या होगी जैसे अंग्रेजो के समय होती थी, तो हमारे देश की आजादी का अर्थ क्या है ??

तो ये सब जानने के बाद राजीव भाई ने इन विदेशी कंपनियो और भारत में चल रहे अँग्रेजी कानूनों के खिलाफ एक बार फिर से वैसा ही स्वदेशी आंदोलन शुरू करने का संकल्प लिया जैसा किसी समय मे बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेजो के खिलाफ लिया था !! अपने राष्ट्र मे पूर्ण स्वतंत्रता लाने और आर्थिक महाशक्ति के रुप में खडा करने के लिए उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की और उसे जीवन पर्यन्त निभाया। वो गाँव-गाँव, शहर-शहर घूम कर लोगो को लोगो को भारत मे चल रहे अँग्रेजी कानून, आधी अधूरी आजादी का सच, विदेशी कंपनियो की भारत मे लूट आदि विषयो के बारे मे बताने लगे ! सन् 1999 में राजीव के स्वदेशी व्याख्यानों की कैसेटों ने समूचे देश में धूम मचा दी थी।!

1984 मे जब भारत मे भोपाल गैस कांड हुआ तब राजीव भाई ने इसके पीछे के षडयंत्र का पता लगाया और ये खुलासा किया कि ये कोई घटना नहीं थी बल्कि अमेरिका द्वारा किया गया एक परीक्षण था (जिसकी अधिक जानकारी आपको उनके व्याख्यानों मे मिलेगी) तब राजीव भाई यूनियन कार्बाइड कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया!

इसी प्रकार 1995-96 में टिहरी बाँध के बनने के खिलाफ ऐतिहासिक मोर्चे में भाग लिया और पुलिस लाठी चार्ज में काफी चोटें भी खायीं। !! और इसी प्रकार 1999 मे उन्होने राजस्थान के कुछ गांवसियों साथ मिलकर एक शराब बनाने वाली कंपनी जिसको सरकार ने लाइसेन्स दिया था और वो कंपनी रोज जमीन की नीचे बहुत अधिक मात्रा मे पानी निकाल कर शराब बनाने वाली थी उस कंपनी को भगाया !!

1991 भारत मे चले ग्लोबलाएशन, लिब्रलाइजेसशन को राजीव भाई स्वदेशी उद्योगो का सर्वनाश करने वाला बताया और पूरे आंकडों के साथ घंटो-घंटो इस पर व्याख्यान दिये और स्वदेशी व्यापारियो को इसके खिलाफ जागरूक किया !! फिर 1994 मे भारत सरकार द्वारा किए WTO समझोते का विरोध किया क्योकि ये समझोता भारत को एक बहुत बडी आर्थिक गुलामी की और धकेलने वाला था ! इस समझोते मे सैंकडों ऐसे शर्ते सरकार ने स्वीकार कर ली थी जो आज भारत मे किसानो की आत्महत्या करने का, रुपए का डालर की तुलना मे नीचे जाने का, देश बढ रही भूख और बेरोजगारी का, खत्म होते स्वदेशी उद्योगो का, बैंकिंग, इन्सुरेंस, वकालत सभी सर्विस सेक्टर मे बढ रही विदेशी कंपनियो का कारण है ! राजीव भाई के अनुसार इस समझोते के बाद सरकार देश को नहीं चलाएगी बल्कि इस समझोते के अनुसार देश चलेगा !! देश की सारी आर्थिक नीतियाँ इस समझौते को ध्यान मे रख कर बनाई जाएगी ! और भारत मे आज तक बनी किसी भी सरकार में हिम्मत नहीं जो इस WTO समझौते को रद्द करवा सके !!

उन्होने ने बताया कि कैसे WORLD BANK, IMF, UNO जैसे संस्थाये अमेरिका आदि देशो की पिठ्ठू है और विकासशील देशो की सम्पत्ति लूटने के लिए इनको पैदा किया गया है ! (WTO समझोते के बारे मे अधिक जानकारी राजीव भाई के व्याख्यानों मे मिलेगी) इन राष्ट्र विरोधी ताकतों के खिलाफ अपनी लडाई को और मजबूत करने लिए राजीव भाई अपने कुछ साथियो के साथ मिलकर पूरे देश मे विदेशी कम्पनियों, अँग्रेजी कानून, WTO, आदि के खिलाफ अभियान चलाने लगे !! ऐसे ही आर्थर डंकल नाम एक अधिकारी जिसने डंकल ड्राफ्ट बनाया था भारत मे लागू करवाने के लिए वो एक बार भारत आया तो राजीव भाई और बाकी कार्यकर्ता बहुत गुस्से मे थे तब राजीव भाई ने उसे एयरपोर्ट पर ही जूते से मार मार कर भगाया और फिर उनको जेल हुई !!

1999-2000 सन् मे उन्होने दो अमेरिकन कम्पनियाँ पेप्सी और कोकाकोला के खिलाफ प्रदर्शन किया और लोगो को बताया कि ये दोनों कम्पनियाँ पेय पदार्थ के नाम पर आप सबको जहर बेच रही है और हजारो करोड की लूट इस देश मे कर रही हैं ! और आपका स्वास्थ बिगाड रही हैं ! राजीव भाई ने लोगो से कोक ,पेप्सी और इसका विज्ञापन करने वाले क्रिकेट खिलाडियो और, फिल्मी स्टारों का बहिष्कार करने को कहा !! सन 2000 मे 9-11 की घटना घटी तो कुछ अखबार वाले राजीव भाई के पास भी उनके विचार जानने को पहुँचे ! तब राजीव भाई ने कहा की मुझे नहीं लगता कि ये दोनों टावर आतंकवादियो ने गिराये है ! तब उन्होने पूछा आपको क्या लगता है ? राजीव भाई ने कहा मुझे लगता है ये काम अमेरिका ने खुद ही करवाया है ! तो उन्होने कहा आपके पास क्या सबूत है ? राजीव भाई ने कहा समय दो जल्दी सबूत भी ला दूंगा !!

और 2007 मे राजीव भाई ने गुजरात के एक व्याख्यान मे इस 9-11 की घटना का पूरा सच लाइव प्रोजक्टर के माध्यम से लोगो के सामने रखा ! (जिसका विडियो youtube पर 9-11 was totally lie के नाम से उपलब्ध है) और 9 सितंबर 2013 को रूस ने भी एक विडियो जारी कर 9-11 की घटना को झूठा बताया! 2003-2004 मे राजीव भाई ने भारत सरकार द्वारा बनाये गये VAT कानून का विरोध किया और पूरे देश के व्यपरियो के समूह मे जाकर घंटो-घंटो व्याख्यान दिये और उन्होने जागरूक किया कि ये VAT का कानून आपकी आर्थिक लूट से ज्यादा आपके धर्म को कमजोर करने और भारत मे ईसाईयत को बढावा देने के लिए बनाया गया है !! (इस बारे मे अधिक जानकारी राजीव भाई के VAT वाले व्याख्यान मे मिलेगी) देश मे हो रही गौ हत्या को रोकने के लिए भी राजीव भाई ने कडा संघर्ष किया ! राजीव भाई का कहना था कि जब तक हम गौ माता का आर्थिक मूल्यांकन कर लोगो को नहीं समझाएँगे ! तब तक भारत मे गौ रक्षा नहीं हो सकती ! क्योंकि कोई भी सरकार आजतक गौ हत्या के खिलाफ संसद मे बिल पास नहीं कर सकी ! उनका कहना था कि सरकारो का तो पता नहीं वो कब संसद मे गौ हत्या के खिलाफ बिल पास करें क्योकि कि आजादी के 64 साल मे तो उनसे बिल पास नहीं हुआ और आगे करेंगे इसका भरोसा नहीं !! इसलिए तब हमे खुद अपने स्तर पर ही गौ हत्या रोकने का प्रयास करना चाहिए !!

उन्होने देश भर मे घूम घूम कर अलग अलग जगह पर व्याख्यान कर लोगो को गौ माता की महत्वता और उसका आर्थिक महत्व बताया ! उन्होने 60 लाख से अधिक किसानो को देसी खेती (organic farming) करने के सूत्र बताये कि कैसे किसान रासायनिक खाद, यूरिया आदि खेतो मे डाले बिना गौ माता के गोबर और गौ मूत्र से खेती कर सकते है ! जिससे उनके उत्पादन का खर्चा लगभग शून्य होगा !! और उनकी आय मे बहुत बढोतरी होगी ! आज किसान 15-15 हजार रुपए लीटर कीटनाश्क खेत मे छिडक रहा है !! टनों टन महंगा यूरिया, रासायनिक खाद खेत मे डाल रहा है जिससे उसके उत्पादन का खर्चा बढता जा रहा है और उत्पादन भी कम होता जा रहा है !! रासायनिक खाद वाले फल सब्जियाँ खाकर लाखो लाखो लोग दिन प्रतिदिन बीमार हो रहे हैं ! राजीव भाई ने गरीब किसानो को गाय ना बेचने की सलाह दी और उसके गोबर और गौ मूत्र से खेती करने के सूत्र बताये !! किसानो ने राजीव भाई के बताये हुए देसी खेती के सूत्रो द्वारा खेती करना शुरू किया और उनकी आर्थिक समृद्धि बहुत बढीं !!

1998 मे राजीव भाई ने कुछ गौ समितियों के साथ मिलकर गौ हत्या रोकने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट मे मुकदमा दायर कर दिया कि गौ हत्या नहीं होनी चाहिए ! सामने बैठे कुरेशी कसाइयो ने कहा क्यों नहीं होनी चाहिए ? कोर्ट मे साबित ये करना था की गाय की हत्या कर मांस बेचने से ज्यादा लाभ है या बचाने से !! कसाइयो की तरफ से लड़ने वाले भारत के सभी बड़े-बड़े वकील जो 50-50 लाख तक फीस लेते हैं सोली सोराब्जी की बीस लाख की फीस है, कपिल सिब्बल 22 लाख की फीस है, महेश जेठ मालानी (राम जेठ मालानी का लड़का) जो फीस लेते है 32 लाख से 35 लाख सारे सभी बड़े वकील कसाइयों के पक्ष में ! और इधर राजीव भाई जैसे लोगो के पास कोई बडा वकील नहीं था क्योंकि इतना पैसा नहीं था ! तो इन लोगो ने अपना मुकदमा खुद ही लडा !!

(इस मुकद्दमे की पूरी जानकारी आपको राजीव भाई के व्याख्यान जिसका नाम गौ हत्या और राजनीति) मे मिल जाएगी!! हाँ इतना आपको जरूर बता दें 2005 मे मुकदमा राजीव भाई और उनके कार्यकर्ताओ ने जीत लिया !! राजीव भाई अदालत मे गाय के एक किलो गोबर से 33 किलो खाद तैयार करने का फॉर्मूला बताया और अदालत के सामने करके भी दिखया जिससे रोज की 1800 से 2000 रुपए की रोज की कमाई की जा सकती है !! ऐसे ही उन्होने गौ मूत्र से बनने वाली औषधियों का आर्थिक मूल्यांकन करके बताया !!! और तो और उन्होने सुप्रीम कोर्ट के जज की गाडी गोबर गैस से चलाकर दिखा दी !! जज ने तीन महीने गाडी चलाई और ये सब देख अपने दाँतो तले उंगली दबा ली!! अधिक जानकरी आपको राजीव भाई के व्याख्यान मे मिलेगी !! (Gau Hatya Rajniti Supreme Court mein ladai at Aurngabaad.mp3)

राजीव भाई को जब पता चला कि रासायनिक खाद बनाने वाली कंपनियो के बाद देश की सबसे अधिक हजारो करोड रुपए की लूट दवा बनाने वाली सैंकडों विदेशी कंपनियाँ कर रही है ! और इसके इलावा ये बडी बडी कंपनियाँ वो दवाये भारत मे बेच रहे है जो अमेरिका और यूरोप के बहुत से देशों मे बैन है और जिससे देश वासियो को भयंकर बीमारियाँ हो रही है तब राजीव भाई ने इन कंपनियो के खिलाफ भी आंदोलन शुरू कर दिया !! राजीव भाई ने आयुर्वेद का अध्यन किया और 3500 वर्ष पूर्व महाऋषि चरक के शिष्य वागभट्ट जी को महीनो महीनो तक पढा !! और बहुत ज्ञान अर्जित किया ! फिर घूम घूम कर लोगो को आयुर्वेदिक चिकित्सा के बारे मे बताना शुरू किया की कैसे बिना दवा खाये आयुर्वेद के कुछ नियमो का पालन कर हम सब बिना डॉक्टर के स्वस्थ रह सकते है और जीवन जी सकते है इसके अलावा हर व्यक्ति अपने शरीर की 85% चिकित्सा स्वंय कर सकता है !! राजीव भाई खुद इन नियमो का पालन 15 वर्ष से लगातार कर रहे थे जिस कारण वे पूर्ण स्वस्थ थे 15 वर्ष तक किसी डॉक्टर के पास नहीं गए थे !! वो आयुर्वेद के इतने बडे ज्ञाता हो गए थे कि लोगो की गम्भीर से गम्भीर बीमारियाँ जैसे शुगर, बीपी, दमा, अस्थमा, हार्ट ब्लोकेज, कोलेस्ट्रोल आदि का इलाज करने लगे थे और लोगो को सबसे पहले बीमारी होने का असली कारण समझाते थे और फिर उसका समाधान बताते थे !! लोग उनके हेल्थ के लेक्चर सुनने के लिए दीवाने हो गए थे इसके इलावा वो होमोपैथी चिकित्सा के भी बडे ज्ञाता थे होमोपैथी चिकित्सा मे तो उन्हे डिग्री भी हासिल थी !!

एक बार उनको खबर मिली कि उनके गुरु धर्मपाल जी को लकवा का अटैक आ गया है और उनके कुछ शिष्य उनको अस्पताल ले गए थे ! राजीव भाई ने जाकर देखा तो उनकी आवाज पूरी जा चुकी थी हाथ पाँव चलने पूरे बंद हो गए थे ! अस्पताल मे उनको बांध कर रखा हुआ था ! राजीव भाई धर्मपाल जी को घर ले आए और उनको एक होमियोपैथी दवा दी मात्र 3 दिन उनकी आवाज वापिस आ गई और एक सप्ताह मे वो वैसे चलने फिरने लगे कि कोई देखने वाला मानने को तैयार नहीं था कि इनको कभी लकवा का अटैक आया था !! कर्नाटक राज्य में एक बार बहुत भयंकर चिकन-गुनिया फैल गया हजारो की संख्या मे लोग मरे ! राजीव भाई अपनी टीम के साथ वहाँ पहुँच कर हजारो हजारो लोगो को इलाज करके मृत्यु से बचाया ! ये देख कर कर्नाटक सरकार ने अपनी डॉक्टरों की टीम राजीव भाई के पास भेजी और कहा कि जाकर देखो कि वो किस ढंग से इलाज कर रहे हैं !

(अधिक जानकारी के लिए आप राजीव भाई के हेल्थ के लेक्चर सुन सकते हैं घंटो घंटो उन्होने स्वस्थ रहने और रोगो की चिकित्सा के व्याख्यान दिये है)

इसके इलावा राजीव भाई ने यूरोप और भारत की सभ्यता संस्कृति और इनकी भिन्नताओ पर गहरा अध्यन किया और लोगो को बताया कि कैसे भारतवासी यूरोप के लोगो की मजबूरी को अपना फैशन बना रहे है और कैसे उनकी नकल कर बीमारियो के शिकार हो रहे है !! राजीव भाई का कहना था कि देश मे आधुनिकीकरण के नाम पर पश्चिमीकरण हो रहा है ! और इसका एक मात्र कारण देश मे चल रहा अंग्रेज मैकॉले का बनाया हुआ indian education system है ! क्योकि आजाद भारत मे सारे कानून अंग्रेजो के चल रहे हैं इसीलिए ये मैकॉले द्वारा बनाया गया शिक्षा तंत्र भी चल रहा है !

राजीव भाई कहते थे कि इस अंग्रेज मैकॉले ने जब भारत का शिक्षा तंत्र का कानून बनाया और शिक्षा का पाठयक्रम तैयार किया तब इसने एक बात कही कि मैंने भारत का शिक्षा तंत्र ऐसा बना दिया है की इसमे पढ के निकलने वाला व्यक्ति शक्ल से तो भारतीय होगा पर अकल से पूरा अंग्रेज होगा ! उसकी आत्मा अंगेजों जैसी होगी उसको भारत की हर चीज मे पिछडापन दिखाई देगा !! और उसको अंग्रेज और अंग्रेजियत ही सबसे बढिया लगेगी !!

इसके इलावा राजीव भाई का कहना था कि इसी अंग्रेज मैकॉले ने भारत की न्याय व्यवस्था को तोड कर IPC, CPC जैसे कानून बनाये और उसके बाद ब्यान दिया की मैंने भारत की न्याय पद्धति को ऐसा बना दिया है कि इसमे किसी गरीब को इंसाफ नहीं मिलेगा ! सालों साल मुकदमे लटकते रहेंगे !! मुकदमो के सिर्फ फैंसले आएंगे न्याय नहीं मिलेगा !! इस अंग्रेज शिक्षा पद्धति और अँग्रेजी न्यायव्यवस्था के खिलाफ लोगो को जागरूक करने के लिए राजीव राजीव भाई ने मैकॉले शिक्षा और भारत की प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पर बहुत व्याख्यान दिये और इसके अतिरिक्त अपने एक मित्र आजादी बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता पवन गुप्ता जी के साथ मिल कर एक गुरुकुल की स्थापना की वहाँ वो फेल हुए बच्चो को ही दाखिल करते थे कुछ वर्ष उन बच्चो को उन्होने प्राचीन शिक्षा पद्धति से पढाया ! और बच्चे बाद मे इतने ज्ञानी हो गए की आधुनिक शिक्षा मे पढे बडे बडे वैज्ञानिक उनके आगे दाँतो तले उंगली दबाते थे !

राजीव जी ने रामराज्य की कल्पना को समझना चाहा ! इसके लिए वे भारत अनेकों साधू संतो,रामकथा करने वालों से मिले और उनसे पूछते थे की भगवान श्री राम रामराज्य के बारे क्या कहा है ?? लेकिन कोई भी उत्तर उनको संतुष्ट नहीं कर पाया ! फिर उन्होने भारत मे लिखी सभी प्रकार की रामायणों का अध्यन किया और खुद ये हैरान हुए कि रामकथा मे से भारत की सभी समस्याओ का समाधान निकलता है ! फिर राजीव भाई घूम घूम कर खुद रामकथा करने लगे और उनकी रामकथा सभी संत और बाबाओ से अलग होती वो सिर्फ उसी बात पर अधिक चर्चा करते जिसे अन्य संत तो बताते नहीं या वो खुद ही ना जानते है ! राजीव भाई लोगो को बताते कि किस प्रकार रामकथा मे भारत की सभी समस्याओ का समाधान निकलता है ! (इस बारे मे अधिक जानकारी के लिए आप राजीव भाई की रामकथा वाला व्याख्यान सुन सकते हैं)

2009 मे राजीव भाई बाबा रामदेव के संपर्क मे आए और बाबा रामदेव को देश की गंभीर समस्याओ और उनके समाधानो से परिचित करवाया और विदेशो मे जमा कालेधन आदि के विषय मे बताया और उनके साथ मिल कर आंदोलन को आगे बढाने का फैसला किया !! आजादी बचाओ के कुछ कार्यकर्ता राजीव भाई के इस निर्णय से सहमत नहीं थे !! फिर भी राजीव भाई ने 5 जनवरी 2009 को भारत स्वाभिमान आंदोलन की नीव रखी !! जिसका मुख्य उदेश्य लोगो को अपनी विचार धारा से जोडना, उनको देश की मुख्य समस्याओ का कारण और समाधान बताना !! योग और आयुर्वेद से लोगो को निरोगी बनाना और भारत स्वाभिमान आंदोलन के साथ जोड कर 2014 मे देश से अच्छे लोगो को आगे लाकर एक नई पार्टी का निर्माण करना था जिसका उदेश्य भारत मे चल रही अँग्रेजी व्यवस्थाओ को पूर्ण रूप से खत्म करना, विदेशो मे जमा काला धन वापिस लाना, गौ हत्या पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाना, और एक वाक्य मे कहा जाए ये आंदोलन सम्पूर्ण आजादी को लाने के लिए शुरू किया गया था !!

राजीव भाई के व्याख्यान सुन कर मात्र ढाई महीने मे 6 लाख कार्यकर्ता पूरे देश मे प्रत्यक्ष रूप मे इस अंदोलन से जुड गए थे राजीव भाई पतंजलि मे भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ताओ के बीच व्याख्यान दिया करते थे जो पतंजलि योगपीठ के आस्था चैनल पर के माध्यम से भारत के लोगो तक पहुंचा करते थे इस प्रकार अप्रत्यक्ष रूप से भारत स्वाभिमान अंदोलन के साथ 3 से 4 करोड लोग जुड गए थे ! फिर राजीव भाई भारत स्वाभिमान आंदोलन के प्रतिनिधि बनकर पूरे भारत की यात्रा पर निकले गाँव-गाँव शहर-शहर जाया करते थे पहले की तरह व्याख्यान देकर लोगो को भारत स्वाभिमान से जुडने के लिए प्रेरित करते थे !!

लगभग आधे भारत की यात्रा करने के बाद राजीव भाई 26 नवंबर 2010 को उडीसा से छतीसगढ राज्य के एक शहर रायगढ पहुंचे वहाँ उन्होने 2 जन सभाओ को आयोजित किया ! इसके पश्चात अगले दिन 27 नवंबर 2010 को जंजगीर जिले मे दो विशाल जन सभाए की इसी प्रकार 28 नवंबर बिलासपुर जिले मे व्याख्यान देने से पश्चात 29 नवंबर 2010 को छतीसगढ के दुर्ग जिले मे पहुंचे ! उनके साथ छतीसगढ के राज्य प्रभारी दया सागर और कुछ अन्य लोग साथ थे ! दुर्ग जिले मे उनकी दो विशाल जन सभाए आयोजित थी पहली जनसभा तहसील बेमतरा मे सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक थी! राजीव भाई ने विशाल जन सभा को आयोजित किया !! इसके बाद का कार्यक्रम साय 4 बजे दुर्ग मे था !! जिसके लिए वह दोपहर 2 बजे बेमेतरा तहसील से रवाना हुए !

(इसके बात की घटना विश्वास योग्य नहीं है इसके बाद की सारी घटना उस समय उपस्थित छतीसगढ के प्रभारी दयासागर और कुछ अन्य साथियो द्वारा बताई गई है)

उन लोगो का कहना है गाडी मे बैठने के बाद उनका शरीर पसीना पसीना हो गया ! दयासागर ने राजीव जी से पूछा तो जवाब मिला की मुझे थोडी गैस सीने मे चढ गई है शोचालय जाऊँ तो ठीक हो जाऊंगा ! फिर दयासागर तुरंत उनको दुर्ग के अपने आश्रम मे ले गए वहाँ राजीव भाई शोचालय गए और जब कुछ देर बाद बाहर नहीं आए तो दयासागर ने उनको आवाज दी राजीव भाई ने दबी दबी आवाज मे कहा गाडी स्टार्ट करो मैं निकल रहा हूँ ! जब काफी देर बाद राजीव भाई बाहर नहीं आए तो दरवाजा खोला गया राजीव भाई पसीने से लथपत होकर नीचे गिरे हुए थे ! उनको बिस्तर पर लिटाया गया और पानी छिडका गया दयासागर ने उनको अस्पताल चलने को कहा ! राजीव भाई ने मना कर दिया उन्होने कहा होमियोपैथी डॉक्टर को दिखाएंगे !

थोडी देर बाद होमियोपैथी डॉक्टर आकर उनको दवाइयाँ दी ! फिर भी आराम ना आने पर उनको भिलाई के सेक्टर 9 मे इस्पात स्वयं अस्पताल मे भर्ती किया गया ! इस अस्पताल मे अच्छी सुविधाइए ना होने के कारण उनको Apollo BSR मे भर्ती करवाया गया ! राजीव भाई एलोपेथी चिकित्सा लेने से मना करते रहे ! उनका संकल्प इतना मजबूत था कि वो अस्पताल मे भर्ती नहीं होना चाहते थे ! उनका कहना था कि सारी जिंदगी एलोपेथी चिकित्सा नहीं ली तो अब कैसे ले लू ? ! ऐसा कहा जाता है कि इसी समय बाबा रामदेव ने उनसे फोन पर बात की और उनको आईसीयु मे भर्ती होने को कहा !

फिर राजीव भाई 5 डॉक्टरों की टीम के निरीक्षण मे आईसीयु भर्ती करवाएगे !! उनकी अवस्था और भी गंभीर होती गई और रात्रि एक से दो के बीच डॉक्टरों ने उन्हे मृत घोषित किया !!

(बेमेतरा तहसील से रवाना होने के बाद की ये सारी घटना राज्य प्रभारी दयासागर और अन्य अधिकारियों द्वारा बताई गई है अब ये कितनी सच है या झूठ ये तो उनके नार्को टेस्ट करने ही पता चलेगा !!)

क्योकि राजीव जी की मृत्यु का कारण दिल का दौरा बता कर सब तरफ प्रचारित किया गया ! 30 नवंबर को उनके मृत शरीर को पतंजलि, हरिद्वार लाया गया जहां हजारो की संख्या मे लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे ! और 1 दिसंबर राजीव जी का दाह संस्कार कनखल हरिद्वार मे किया गया !!

राजीव भाई के चाहने वालों का कहना है कि अंतिम समय मे राजीव जी का चेहरा पूरा हल्का नीला, काला पड गया था ! उनके चाहने वालों ने बार-बार उनका पोस्टमार्टम करवाने का आग्रह किया लेकिन पोस्टमार्ट्म नहीं करवाया गया !! राजीव भाई की मौत लगभग भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की मौत से मिलती जुलती है आप सबको याद होगा ताशकंद से जब शास्त्री जी का मृत शरीर लाया गया था तो उनके भी चेहरे का रंग नीला, काला पड गया था !! और अन्य लोगो की तरह राजीव भाई भी ये मानते थे कि शास्त्री जी को विष दिया गया था !! राजीव भाई और शास्त्री जी की मृत्यु मे एक जो समानता है कि दोनों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ था !!

राजीव भाई की मृत्यु से जुडे कुछ सवाल !!

किसके आदेश पर ये प्रचारित किया गया ? कि राजीव भाई की मृत्यु दिल का दौरा पडने से हुयी है ?

29 नवंबर दोपहर 2 बजे बेमेतरा से निकलने के पश्चात जब उनको गैस की समस्या हुए और रात 2 बजे जब उनको मृत घोषित किया गया इसके बीच मे पूरे 12 घंटे का समय था 12 घंटे मे मात्र एक गैस की समस्या का समाधान नहीं हो पाया ??

आखिर पोस्ट मार्टम करवाने मे क्या तकलीफ थी ??

राजीव भाई का फोन जो हमेशा आन रहता था उस 2 बजे बाद बंद क्यों था ??

राजीव भाई के पास एक थैला रहता था जिसमे वो हमेशा आयुर्वेदिक, होमियोपैथी दवाएं रखते थे वो थैला खाली क्यों था ??

30 नवंबर को जब उनको पतंजलि योगपीठ मे अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था उनके मुंह और नाक से क्या टपक रहा था उनके सिर को माथे से लेकर पीछे तक काले रंग के पालिथीन से क्यूँ ढका था ?

राजीव भाई की अंतिम विडियो जो आस्था चैनल पर दिखाई गई तो उसको एडिट कर चेहरे का रंग सफेद कर क्यों दिखाया गया ?? अगर किसी के मन को चोर नहीं था तो विडियो एडिट करने की क्या जरूरत थी ??

अंत पोस्टमार्टम ना होने के कारण उनकी मृत्यु आजतक एक रहस्य ही बन कर रह गई !!

राजीव भाई के कई समर्थक उनके जाने के बाद बाबा रामदेव से काफी खफा है क्योंकि बाबा रामदेव अपने एक व्याख्यान मे कहा कि राजीव भाई को हार्ट ब्लोकेज था, शुगर की समस्या थी, बी.पी. भी था राजीव भाई पतंजलि योगपीठ की बनी दवा मधुनाशनी खाते थे ! जबकि राजीव भाई खुद अपने एक व्याख्यान मे बता रहे हैं कि उनका शुगर, बीपी, कोलेस्ट्रोल सब नार्मल है !! वे पिछले 20 साल से डॉक्टर के पास नहीं गए ! और अगले 15 साल तक जाने की संभावना नहीं !!

और राजीव भाई के चाहने वालो का कहना है कि हम कुछ देर के लिए राजीव भाई की मृत्यु पर प्रश्न नहीं उठाते लेकिन हमको एक बात समझ नहीं आती कि पतंजलि योगपीठ वालों ने राजीव भाई की मृत्यु के बाद उनको तिरस्कृत करना क्यों शुरू कर दिया ??

मंचो के पीछे उनकी फोटो क्यों नहीं लगाई जाती ??

आस्था चैनल पर उनके व्याख्यान दिखाने क्यों बंद कर दिये गए ?? कभी साल अगर उनकी पुण्यतिथि पर व्याख्यान दिखाये भी जाते है तो वो भी 2-3 घंटे के व्याख्यान को काट काट कर एक घंटे का बनाकर दिखा दिया जाता है !!

इसके अतिरिक्त उनके कुछ समर्थक कहते हैं कि भारत स्वाभिमान आंदोलन की स्थापना जिस उदेश्य के लिए हुए थी राजीव भाई की मृत्यु के बाबा रामदेव उस राह हट क्यों गए ?

राजीव भाई और बाबा खुद कहते थे कि सब राजनीतिक पार्टियां एक जैसी है हम 2014 मे अच्छे लोगो को आगे लाकर एक नया राजनीतिक विकल्प देंगे ! लेकिन राजीव भाई की मृत्यु के बाद बाबा रामदेव ने भारत स्वाभिमान के आंदोलन की दिशा बदल दी और राजीव की सोच के विरुद्ध आज वो भाजपा सरकार का समर्थन कर रहें !! इसलिए बहुत से राजीव भाई के चाहने वाले भारत स्वाभिमान से हट कर अपने अपने स्तर पर राजीव भाई का प्रचार करने मे लगे हैं !!

राजीव भाई ने अपने पूरे जीवन मे देश भर मे घूम घूम कर 5000 से ज्यादा व्याख्यान दिये! सन 2005 तक वह भारत के पूर्व से पश्चिम उत्तर से दक्षिण चार बार भ्रमण कर चुके थे !! उन्होने विदेशी कंपनियो की नाक मे दम कर रखा था !

भारत के किसी भी मीडिया चैनल ने उनको दिखाने का साहस नहीं किया !! क्योकि वह देश से जुडे ऐसे मुद्दो पर बात करते थे की एक बार लोग सुन ले तो देश मे 1857 से बडी क्रांति हो जाती ! वह ऐसे ओजस्वी वक्ता थे जिनकी वाणी पर माँ सरस्वती साक्षात निवास करती थी। जब वे बोलते थे तो स्रोता घण्टों मन्त्र-मुग्ध होकर उनको सुना करते थे ! 30 नवम्बर 1967 को जन्मे और 30 नवंबर 2010 को ही संसार छोडने वाले ज्ञान के महासागर श्री राजीव दीक्षित जी आज केवल आवाज के रूप मे हम सबके बीच जिंदा है उनके जाने के बाद भी उनकी आवाज आज देश के लाखो करोडो लोगो का मार्गदर्शन कर रही है और भारत को भारत की मान्यताओं के आधार पर खडा करने आखिरी उम्मीद बनी हुई है !

राजीव भाई को शत शत नमन !!

 

अंतिम शब्दों में एक भाव पूर्ण श्रद्धांजलि ….

~!~ शत् – शत् नमन है ~!~

जिसने भारत का सोया स्वाभिमान जगा दिया…..

भारत सोने की चिडिया था ..है….और आगे कैसे होगा

हम-सब को फिर से बता दिया ……

आज जब सत्य बोलना नामुमकिन हो ,

उसने उस डगर पे चलना हमे सिखा दिया ……

भारत का सोया स्वाभिमान जगा दिया…..

वो आया था ‘‘विवेकान्द’’ बन कर

अपने सत् कर्मो से बता दिया…….

पर अफसोस कि देश आज भरा गदारो से,

जिस कारण ‘‘माँ भारतीय के लाल को ,

‘‘शास्त्री जी’’ की तरह विदा किया

नास्त्रेदमस की साल 2017 के लिए टॉप 7 भविष्यवाणियां.

नास्त्रेदमस की साल 2017 के लिए टॉप 7 भविष्यवाणियां.
Abhishek yadav uttam.🎂🎂🎂💐💐👍
प्रख्यात भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों से पूरी दुनिया में बड़ी संख्या में लोग अवगत हैं। उन्होंने अपनी किताब 'द प्रोफेसीज' में कई भविष्यवाणियां की हैं। इनमें से कई तो बिलकुल सच साबित हुई हैं। फ्रांस के भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस का जन्म 14 दिसंबर 1503 में हुआ था। हालांकि, कई जगह उनकी जन्मतिथि 21 दिसंबर भी दी गई है। 

नास्त्रेदमस ने अपनी ज्यादातर भविष्यवाणियों को कोड के जरिए लिखा था। इनमें से कई भविष्यवाणियां समय समय पर बाहर आती हैं। अब जब साल 2016 के बीतने में महज कुछ ही समय बचा है, तो ऐसे में लोगों के अंदर नास्त्रेदमस की साल 2017 को लेकर की गई भविष्यवाणियों को जानने की काफी इच्छा है। यहां हम आपको अगले साल को लेकर नास्त्रेदमस की गई टॉप-7 भविष्यवाणियां बताने जा रहे हैं। पढ़ें:

रूस और यूक्रेन शांति समझौते पर कर सकते हैं हस्ताक्षर!

नास्त्रेदमस के अनुसार, साल 2017 रूस और यूक्रेन के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है। अगले साल दोनों देश शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस समझौते के निर्णय को अमेरिका स्वीकार नहीं करेगा लेकिन अन्य यूरोपीय देश इसे अपना समर्थन दे सकते हैंं।

चीन ले सकता है कई बड़े फैसले! 

चीन दुनिया में मौजूद कुछ शक्तिशाली देशों में से एक है। नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी की मानें तो अगले साल कई बड़े फैसले चीन ले सकता है। चीन के ये फैसले दुनिया के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद हो सकते हैं।

इटली को करना होगा आर्थिक दिक्कतों का सामना! 

नास्त्रेदमस की मानें तो आने वाला साल इटली के लिए बेहतर नहीं होने वाला है। आर्थिक मोर्चे पर इटली को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इटली का बैंकिंग सिस्टम परेशानियों में पड़ सकता है। इन दिक्कतों से इटली को संभलने में कई साल लग जाएंगे। बता दें कि इटली बीते दो वर्षों से लोन संबंधी दिक्कतों का सामना कर रहा है।


क्लाउड कम्प्यूटिंग के लिए अच्छा नहीं होगा 2017!

क्लाउड कम्प्यूटिंग के बारे में भी प्रख्यात भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने भविष्यवाणियां की हैं। बताया जा रहा है कि आने वाला वर्ष क्लाउड कम्प्यूटिंग के लिए अच्छा नहीं होने वाला है। यह दुनिया से गायब भी हो सकती है। 

ग्लोबल वार्मिंग को लेकर छिड़ सकता है युद्ध! 

दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इसके लिए कई देश गंभीरता से विचार भी कर रहे हैं। नास्त्रेदमस की मानें तो आने वाले वर्ष में ग्लोबल वार्मिंग को लेकर भी युद्ध छिड़ सकता है। 

सोलर पावर का इस्तेमाल होगा अधिक!

पिछले कई वर्षों से सरकार सोलर पावर को लगातार बढ़ावा दे रही है। नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों में सोलर पावर का भी जिक्र किया गया है। कहा गया है कि आने वाला साल सोलर पावर के लिए बेहतर रहने वाला है। दुनियाभर में लोग इसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने वाले हैं। 

उत्तर कोरिया व दक्षिण कोरिया का होगा विलय! 

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया का आपस में विलय हो सकता है। नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी की मानें तो उत्तर कोरिया के क्रूर शासक किम जोंग को उनके पद से अपदस्थ कर दिया जाएगा। इसके बाद किम जोंग रूस में पनाह ले सकता है।

नास्त्रेदमस की ये भविष्यवाणियां हो चुकी हैं सच!

नास्त्रेदमस की कई भविष्यवाणियां सटीक साबित हुई हैं। उन्होंने अपनी किताब में कोड भाषा में परमाणु बम विस्फोट की हिरोशिमा व नागासाकी में तबाही को लेकर उल्लेख किया था। इसके अलावा वे अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले सहित कई घटनाओं का पहले ही अपनी भविष्यवाणी में जिक्र कर चुके थे। 
➡➡➡➡➡➡➡➡➡➡➡➡➡➡➡➡➡➡➡↕↕🔝🔝🔝🔝🔝🔝🔝🔝🔝🔝🔚🕉

The kashmir file movie download link. download the kashmir file movie. HD, Full hd.

 watch and download. the kashmir file direct. download the kashmir file. for any problem in downloading msg me and follow me on insta i will...

Popular